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CAA का विरोध कर रहे दल जिन्ना की विचारधारा के हिमायती हैं: वीरेंद्र सिंह ‘मस्त’
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Updated: January 6, 2020, 5:23 PM IST
CAA का विरोध कर रहे दल जिन्ना की विचारधारा के हिमायती हैं: वीरेंद्र सिंह ‘मस्त’
बलिया से भाजपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा है कि CAA का विरोध कर रहे दल जिन्ना के द्विराष्ट्रवाद के हिमायती हैं: (फाइल फोटो)

भाजपा किसान मोर्चा (BJP Kisan Morcha) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बलिया लोकसभा क्षेत्र से सांसद वीरेंद्र सिंह (Virender Singh) ने कहा है कि, संशोधित नागरिकता कानून (Amended Citizenship Act) का विरोध कर रहे दल मोहम्मद अली जिन्ना के द्विराष्ट्रवाद सिद्धांत के हिमायती हैं.

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  • Last Updated: January 6, 2020, 5:23 PM IST
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बलिया. भाजपा किसान मोर्चा (BJP Kisan Morcha) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बलिया लोकसभा क्षेत्र से सांसद वीरेंद्र सिंह (Virender Singh) 'मस्त' ने केरल विधानसभा में संशोधित नागरिकता कानून (Amended Citizenship Act) के खिलाफ पारित प्रस्ताव को संविधान का मखौल उड़ाना करार दिया. उन्होंने कहा कि इस कानून का विरोध कर रहे दल मोहम्मद अली जिन्ना के द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत के हिमायती हैं.

वीरेंद्र सिंह ने सीएए को लेकर जनजागरण अभियान की शुरुआत के अवसर पर रविवार को कहा कि केरल में संविधान का मखौल उड़ाया गया है और यह राष्ट्र द्रोह की परिधि में आता है. उन्होंने कहा कि संसद से पारित और राष्ट्रपति से हस्ताक्षरित कानून का सभी को सम्मान करना चाहिए.

पीएम बनने की दोनों की जिद के कारण ही हुआ देश का बंटवारा



बलिया के सांसद ने कहा कि जो लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं, वे मोहम्मद जिन्ना की विचारधारा यानी द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत का समर्थन कर रहे हैं. सिंह ने देश के बंटवारे के लिए जवाहर लाल नेहरू और मोहम्मद जिन्ना को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ‘प्रधानमंत्री बनने की इन दोनों की जिद’ के कारण ही देश का बंटवारा हुआ था.



कांग्रेस और विपक्ष बोल रहे हैं जिन्ना की भाषा

मस्त ने कहा कि देश का बंटवारा धर्म के आधार पर ही हुआ था तथा कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कांग्रेस से अलग होना पड़ा. सिंह ने दावा किया कि आजादी मिलने के पूर्व जो भाषा मोहम्मद अली जिन्ना बोलते रहे हैं, आज वही भाषा कांग्रेस और विपक्ष बोल रहा है.

यह है संशोधित नागरिकता कानून

संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण देश में शरण लेने आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था. ऐसे सभी लोग भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस कानून के विरोधियों का कहना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने की बात कही गई है, इसलिए विरोधी इसे धार्मिक भेदभाव करने वाला कानून कह रहे हैं, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.

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First published: January 6, 2020, 3:36 PM IST
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