बांदा कृषि विश्वविद्यालय में 24 नियुक्तियां, 11 एक ही जाति के; BJP विधायक ने उठाए सवाल

बांदा के कृषि एवं प्रौद्याेगिकी यूनिवर्सिटी में भर्ती घोटाले की भाजपा के विधायक ने सीएम योगी और पीएम मोदी से शिकायत की है.

बांदा के कृषि एवं प्रौद्याेगिकी यूनिवर्सिटी में भर्ती घोटाले की भाजपा के विधायक ने सीएम योगी और पीएम मोदी से शिकायत की है.

उत्तर प्रदेश में बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय इन दिनों में चर्चा के केंद्र में है. वहां हाल में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद भर्तियां हुई जिसमें 11 असिस्टेंट पदों पर एक ही जाति के उम्मीदवारों की नियुक्तियां कर दी गईं. तिंदवारी बीजेपी विधायक बृजेश प्रजापति ने नियुक्तियों की जांच कराने की मांग की है.

  • Share this:

बांदा. उत्तर प्रदेश का बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय इन दिनों में चर्चा में है. इसकी वजह है, हाल में भर्तियों में जाति के आधार पर 11 असिस्टेंट पदों पर की गई भर्तियां. फरवरी माह में बांदा कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के 40 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था, जिसके बाद कुल 24 पदों में चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, इन पदों पर प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर पद की भर्ती होने के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक पूर्वांचल क्षेत्र के एक ही जाति की 11 लोगों का असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए चयन किया गया है, इन्हें वाइस चांसलर उधम सिंह का करीबी बताया जा रहा है.

अन्य 16 पदों के लिए किसी ने आवेदन नहीं किया था जिसके चलते ये पद आज भी रिक्त पड़े हुए हैं. अब भर्ती मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है. तमाम लोग सवाल खड़े कर रहे हैं. यहां तक की उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार के तिंदवारी विधायक बृजेश प्रजापति भी विश्वविद्यालय पर हुई नियुक्तियों की जांच कराने की मांग कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिख चुके हैं. इसमें उन्होंने कहा है कि नियुक्तियां गलत तरीके से की गई हैं. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्यवाही की जाए और भर्तियों को निरस्त किया जाए क्योंकि ये भर्ती रोस्टर के हिसाब से नहीं की गई हैं.

बांदा कृषि एवं  प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलसचिव एसके सिंह ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय में फरवरी माह में कुल 40 पद के लिए आवेदन मांगे गए थे, जिसमें से 24 पद के लिए आवेदन आए थे. जिन पदों पर प्रोफेसरों की नियुक्तियां कर दी गई हैं. अन्य 16 पदों के लिए किसी भी व्यक्ति ने आवेदन नहीं किया. जिसके चलते वह पद आज भी रिक्त पड़े हुए हैं. उसकी पुनः विज्ञप्ति निकाली जाएगी. पूरे मामले में भर्ती नियुक्ति की जाएगी. जाति के आधार से 11 नियुक्तियों को लेकर जब सवाल पूछा गया तो कुलसचिव एसके सिंह ने बताया कि सारी भर्तियां नियमानुसार की गई है.

डॉक्टर एसके सिंह ने कहा कि पूरे मामले में सिर्फ अफवाह फैलाई जा रही है. अगर बात की जाए तो नियुक्ति के वक्त एक टीम का गठन होता है. उस टीम में यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के साथ आरक्षण पदों के अधिकारी की एक समिति बनती है. वही समिति के सामने पूरी चयन प्रक्रिया होती है. जिसमें वीडियोग्राफी के साथ पूरा चयन किया जाता है और उसके बाद राज्यपाल के समक्ष पूरा नियुक्ति चयन प्रक्रिया के साथ परसेंटेज के आधार पर रखा जाता है. जिस पर राज्यपाल की मुहर लगती है, इसके बाद विश्वविद्यालय में नियुक्तियां होती हैं.
नए कुलपति की 2019 में नियुक्त हुए, तब से 50 नियुक्तियां हुईं 

वाइस चांसलर उधम सिंह गौतम का कार्यकाल 2019 से बांदा कृषि विश्वविद्यालय में शुरू हुआ था, जिसके बाद लगभग 50 नियुक्तियां बांदा कृषि विश्वविद्यालय में की गई हैं. इसमें कुछ मामले कोर्ट में भी चल रहे हैं, सूत्रों की माने तो लोगों ने पहले भी आरोप लगा है कि नियुक्ति गलत ढंग से हुई है. अब इस बार अभी फरवरी माह में जो 40 पद के लिए वैकेंसी निकाली गई थी. चयन प्रकिया की गड़बड़ी की बात सामने आ रही है. 40 में से 24 पद की चयन प्रक्रिया पूर्ण हो गई है. 24 पदों में से 11 पद मे सिंह ठाकुर बिरादरी के लोगो की नियुक्त हुई हैं.

चर्चाएं यह भी हाे रही हैं 



वाइस चांसलर भी ठाकुर जाति से होने के चलते तो नहीं धांधली करके ठाकुरों का सिलेक्शन करा दिया. ये सवाल बहुत सारे लोगो के मन में है, इन्हीं वजहों से इन दिनों बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सुर्खियों में है. फिलहाल पूरे मामले में अब तक कोई विशेष कार्यवाही नहीं हुई है, न कोई जांच बैठी. लेकिन योगी सरकार के भाजपा विधायक ब्रजेश प्रजापति ने देश के प्रधानमंत्री यूपी के मुख्यमंत्री के साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को पत्र लिख पूरे मामले जांच कराने मांग की है. उम्मीद है कि इस मामले में भी जांच होगी क्योंकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज