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बुंदेलखंड के इस मंदिर में मकर संक्रांति पर सदियों से लगता आ रहा है 'आशिकों का मेला', ये है मान्यता

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 16, 2020, 1:13 PM IST
बुंदेलखंड के इस मंदिर में मकर संक्रांति पर सदियों से लगता आ रहा है 'आशिकों का मेला', ये है मान्यता
मकर संक्रांति के दिन लगता है मेला

मकर संक्रांति के दिन बांदा शहर के किनारे केन नदी के उस पार बने भूरागढ़ दुर्ग के ठीक नीचे हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है और किले की प्राचीर पर ही एक मंदिर अचानक आस्था के केंद्र में बदल जाता है.

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बांदा. मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का पर्व यूं तो देश के हर हिस्से में मनाया जाता है, लेकिन बुन्देलखण्ड (Bundelkhand) के बांदा (Banda) में इस पर्व का विशेष महत्व है. दरअसल इस दिन केन नदी के किनारे भूरागढ़ दुर्ग (Bhuragarh Fort) में आशिकों का मेला लगता है. प्रेम को पाने की चाहत में अपने प्राणों की बलि देने वाले नट महाबली के प्रेम मंदिर में मकर संक्राति के दिन हजारों जोड़े विधिवत पूजा अर्चना कर प्रसाद चढ़ा कर मन्नत मांगते हैं. पुराने लोगों का मानना है की इस मंदिर को "प्यार का मंदिर" भी कहा जाता है.

हर साल मकर संक्रांति के दिन इस किले के नीचे बने नटबाबा के मन्दिर में मेला भी लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालू आते हैं. हर साल की तरह इस साल भी केन नदी में मेला लगा जिसमें श्रद्धालुओं ने स्नान किया व नदी से सटे हुए भूरागढ़ के किले में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्रसाद चढ़ाया व दरगाह पर फातहा दिलाकर मन्नत मांगी.

लगता है आशिकों का जमावड़ा

मकर संक्रांति के दिन बांदा शहर के किनारे केन नदी के उस पार बने भूरागढ़ दुर्ग के ठीक नीचे हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है और किले की प्राचीर पर ही एक मंदिर अचानक आस्था के केंद्र में बदल जाता है. जी हां, ये नट महाबली का मंदिर है. यह वो मंदिर है, जहां आने वालों की हर मन्नत पूरी होने की बात कही जाती है. इस मंदिर में विराजमान नट बाबा भले इतिहास में दर्ज न हो, लेकिन बुन्देलियों के दिलो में नटबाबा के बलिदान की अमिट छाप है. ये जगह आशिकों के लिए किसी इबादतगाह से कम नहीं. मकर संक्रांति के मौके पर शादीशुदा जोड़े यहां आशीर्वाद लेने आते हैं तो सैकड़ो प्रेमी-प्रेमिकाएं अपने मनपसंद साथी के लिए यहां मन्नत मांगते हैं. इस किले में केवल बांदा के ही नहीं बल्कि दूर-दूर से युवक-युवतियां यहां आती हैं. इसलिए इस मंदिर व किले को "प्यार का मंदिर" कहा जाता है.

ये है एक राजा के धोखे की कहानी

मान्यता है कि 600 वर्ष पूर्व महोबा जनपद के सुगिरा के रहने वाले नोने अर्जुन सिंह भूरागढ़ दुर्ग के किलेदार (राजा) थे. यहां से कुछ दूर मध्यप्रदेश के सरबई गांव के एक नट जाति का 21 वर्षीय युवा बीरन किले में ही नौकर था, जो की नाचने गाने का काम करता था. राजा की एक पुत्री थी, उसका प्रेम उस नाचने गाने वाले नटबलि से हो गया था. नटबलि ब्रह्मचारी और तपस्वी नट था. राजा की बेटी के प्रेम प्रसंग की चर्चा राजा को पता चली, तो राजा ने मंत्रियो से सलाह मशवरा कर नट बलि के सामने एक शर्त रखी. राजा ने कहा अगर तुम नदी के उस पार बांबेश्वर पर्वत से किले तक नदी तक का सफर सूत (कच्चा धागे की रस्सी) पर चढ़कर पार करते हुए किले तक आ जाओगे तो तुम्हारी शादी राजकुमारी से कर दी जाएगी. नट बलि जानता था की एक धागे पर पैर रखकर नदी से किले का सफ़र नामुमकिन है. लेकिन प्यार कि खातिर नट बलि ने ये शर्त मान ली. प्रेमी नट ने ये शर्त स्वीकार कर ली और फिर शर्त पूरी करने का दिन आया और ख़ास मकर संक्रांति के दिन नट बलि ने अपनी तपस्या और विद्या से एक धागे को रेशम में परिवर्तित करके केन नदी से किले तक बांध दिया व सफ़र पूरा करने लगा. नटबलि ने आधे से भी ज्यादा का सफ़र रेशम के घागे के सहारे पूरा कर लिया. जिसके बाद मंत्रियो ने राजा से कहा की ये नट बलि तो सफ़र पूरा करने वाला है, अब इस नचनिए से आपको अपनी पुत्री की शादी करनी पड़ जाएगी. तभी राजा नोने अर्जुन सिंह ने किले की दीवार से बंधे सूत को काटने का प्रयास किया. राजा ने तलवार, चाक़ू, भाला सभी का प्रयोग किया पर रेशम का धागा नहीं टूटा. फिर राजा ने चमड़ा काटने वाले फरसे से धागा काट दिया. जिससे नट बीरन उंचाई से चट्टानों पर गिर गया और उसकी वहीं मौत हो गई. किले की खिड़की से राजा की बेटी ने जब अपने प्रेमी की मौत देखी तो वह भी किले से कूद गई और उसी चट्टान से टकराकर उसकी भी मौत हो गई.

अब है सिद्ध मंदिरइस घटना के बाद किले के नीचे ही दोनों प्रेमी युगल की समाधि बना दी गई, जो अब मंदिर में बदल गई है. आज ये नट महाबली का सिद्ध मंदिर माना जाता है. कहते हैं प्यार भगवान का रूप होता है, पर जब धोखा हो तो ये जानलेवा भी बन जाता है. ये थी नटबलि की प्रेम कहानी जो सदियों से आज तक न ही कभी भूली गयी है और न ही भूली जाएगी.

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First published: January 16, 2020, 1:13 PM IST
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