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पुलिस से इंसाफ के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर है यह महिला

पुलिस से इंसाफ के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर है यह महिला

उत्तर प्रदेश की पुलिस से इंसाफ पाना कितना मुश्किल है, इसकी एक से बढ़कर एक बानगी आपने देखी होगी और सुनी होगी। पीड़ितों को इंसाफ देने वाली उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एक ऐसा कारनाम कर दिखाया है, जिसको देखने के बाद सौ साल तक देश में राज करने वाली अंग्रेजी हुकूमत की याद आना लाजिमी हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश की पुलिस से इंसाफ पाना कितना मुश्किल है, इसकी एक से बढ़कर एक बानगी आपने देखी होगी और सुनी होगी। पीड़ितों को इंसाफ देने वाली उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एक ऐसा कारनाम कर दिखाया है, जिसको देखने के बाद सौ साल तक देश में राज करने वाली अंग्रेजी हुकूमत की याद आना लाजिमी हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश की पुलिस से इंसाफ पाना कितना मुश्किल है, इसकी एक से बढ़कर एक बानगी आपने देखी होगी और सुनी होगी। पीड़ितों को इंसाफ देने वाली उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एक ऐसा कारनाम कर दिखाया है, जिसको देखने के बाद सौ साल तक देश में राज करने वाली अंग्रेजी हुकूमत की याद आना लाजिमी हो जाएगा।

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उत्तर प्रदेश की पुलिस से इंसाफ पाना कितना मुश्किल है, इसकी एक से बढ़कर एक बानगी आपने देखी होगी और सुनी होगी। पीड़ितों को इंसाफ देने वाली उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एक ऐसा कारनाम कर दिखाया है, जिसको देखने के बाद सौ साल तक देश में राज करने वाली अंग्रेजी हुकूमत की याद आना लाजिमी हो जाएगा।

बुंदेलखंड के बांदा जनपद में अतर्रा थाने की पुलिस महिलाओं के मामले में किस कदर संजीदा है। इसकी बानगी देखने को मिली पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जहां ससुराल वालों की प्रताड़ना से परेशान एक विवाहिता इंसाफ के लिए सिर्फ और सिर्फ पुलिस महकमें के आलाधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने के लिए मजबूर हो गई है।

बांदा में तीन दिन पहले थाने के सामने ससुराल वालों की मारपीट की शिकार एक पीड़िता ने आरोप लगाते हुए कहा कि थाने की पुलिस उसकी मदद करने की बजाय उल्टे उसके खिलाफ भी लूट का मुकदमा दर्ज कर उसके साथ अनोखा इंसाफ किया है। मामला अतर्रा थाना क्षेत्र का है। जहां प्रीती गुप्ता नाम की एक विवाहिता ने आरोप लगाते हुए कहा कि दहेज केस के सिलसिले में वो तीन दिन पहले चित्रकूटधाम मंडल के डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी से मिलने गई थी।

डीआईजी को आपबीती बताने के बाद पीड़ित प्रीती अपने परिजनों के साथ बस से वापस घर लौट रही थी। बस जैसे ही अतर्रा थाने के सामने रुकी। पीड़िता के ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। शाम सात बजे हुई मारपीट की रिपोर्ट लिखाने के लिए पीड़िता को थाने में रात के बारह बजे तक बैठना पड़ा। बावजूद इसके अतर्रा थाने की पुलिस ने मारपीट की शिकार प्रीती की रिपोर्ट नहीं दर्ज की।

इस बीच पीड़िता ने चित्रकूटधाम मंडल के डीआईजी, जिले के एसपी राकेश शंकर समेत इलाहाबाद जोन के आईजी से मदद की गुहार लगाई। तब जाकर कहीं अगले दिन पीड़िता का मुकदमा लिखा गया। ऐसे में पुलिस ने मारपीट के आरोपी की तहरीर पर पुलिस ने पीड़िता के खिलाफ लूट जैसी गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज कर पीड़िता की मदद करने की बजाए उसकी इंसाफ मिलने की उम्मीदों पर कुठाराघात कर दिया।

वहीं, इस बाबत जिले के पुलिस अधीक्षक राकेश शंकर से उनके सीयूजी नंबर जानकारी के लिए फोन किया गया। तो एसपी ने फोन को डिस्कनेक्ट कर दिया। हालांकि पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने मारपीट करने वाले पीड़िता के ससुरालियों पर भी केस दर्ज कर लिया है, लेकिन ससुराल वालों की दोहरी प्रताड़ना का शिकार पीड़िता प्रीती के खिलाफ लूट का मुकदमा दर्ज करना महिलाओं के खिलाफ जनपद की पुलिस की संवेदनहीनता को साफ साफ दर्शाता है।

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