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उत्तर प्रदेश में लगाए गए 54 करोड़ पौधे, फिर भी घट गया 100 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र !
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News18 Uttar Pradesh
Updated: January 28, 2020, 8:42 PM IST
उत्तर प्रदेश में लगाए गए 54 करोड़ पौधे, फिर भी घट गया 100 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र !
वृक्षारोपण करते हुए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ (फ़ाइल तस्वीर)

वन विभाग (Forest Department) की ओर से जितना पौधरोपण हुआ है, यदि तीस फीसदी पौधे भी पेड़ बनते तो यूपी में एक विशाल जंगल (forest) हर जनपद में तैयार होता....

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बांदा. पर्यावरण संरक्षण को लेकर कथित संजीदा दिखती यूपी सरकार साल दर साल लाखों पौधरोपण करती है. उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में दो तो वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में एक गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड (Guinness Book of World Record) एक दिन के पौधरोपण पर बन चुका है. लेकिन हालिया प्रकाशित फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया (Forest Survey of India) की मीडिया बुलेटिन रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां करती है.

रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में पिछले सात वर्षों के दौरान 54 करोड़ पौधे रोपित हुए हैं बावजूद इसके 100 वर्ग किलोमीटर वनक्षेत्र घटा है जो कि आश्चर्यजनक है. वन विभाग की ओर से जितना पौधरोपण हुआ है, यदि तीस फीसदी पौधे भी पेड़ बनते तो यूपी में एक विशाल जंगल हर जनपद में तैयार होता.

अवैध कब्जे में है वन भूमि!
बताते चलें कि इस वर्ष यूपी में 22 करोड़ पौधे तो वहीं बुंदेलखंड के सात जनपदों में 1.44 करोड़ पौधरोपण हुआ है. बुंदेलखंड में ही वन विभाग ने गत एक दशक में 3 अरब रुपये खर्च कर करीब 16 करोड़ पौधे कागजी आंकड़ों के मुताबिक लगवाये हैं. बुंदेलखंड के सामाजिक कार्यकर्ता को सूचनाधिकार से मिली जानकारी के मुताबिक यहां 500 हेक्टेयर वन-भूमि पर अवैध कब्जे हैं, तो वहीं सात जनपद वन क्षेत्र डार्क जोन में है.



सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित बताते हैं उन्होंने मुख्य वन संरक्षक लखनऊ को सारी रिपोर्ट्स सौंपते हुए बुंदेलखंड में एक दशक के अंतराल में पौधरोपण, हरियाली पर खर्च धनराशि की सीबीआई जांच की मांग की पर उनका आरोप है कि वन विभाग ने जनपद चित्रकूट के डीएफओ को जांच सौंपकर आगे कोई कार्रवाई नहीं की. घटते वन क्षेत्र को लेकर जब प्रभागीय वन अधिकारी बांदा संजय अग्रवाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड की बात करें या बांदा जनपद की यहां पर सूखे की स्थिति बराबर बनी रहती है, हालांकि हमारी पूरी कोशिश रहती है कि सभी जगह लगे पेड़ सुरक्षित रहें और जानकारी मिलते ही समय-समय पर मौके का निरीक्षण भी किया जाता है, लेकिन यहां की मिट्टी सही न होने की वजह से और सूखे जैसी स्थिति बनने पर लगाए गए पेड़ नष्ट हो जाते हैं. ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी ही है कि एक तरफ करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण के वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए जा रहे हैं दूसरी तरफ उसी प्रदेश का वन क्षेत्र घटता जा रहा है इसका जिम्मेदार कौन है.

 

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First published: January 28, 2020, 8:42 PM IST
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