हांथों की लंबाई उंगलियों से कम, फिर भी भर रही हौसले की उड़ान

नारी शक्ति के लिए पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाने वाले बुदेलखंड में महिला संघर्ष और साहस की एक से बढ़कर एक मिसाल देखने को मिल जाती है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर अतंरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बहादुरी और हौसले की उंची उड़ान से देश ही नहीं बल्कि विदेशों में अपना लोहा मनवा चुकी गुलाबी गैंग की राष्ट्रीय कमांडर संपत पाल ऐसे तमाम नाम है, जो लोगों की जुबान पर गाहे बगाहे आते ही रहते हैं।

Ashwani Mishra | ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 1, 2015, 7:42 AM IST
हांथों की लंबाई उंगलियों से कम, फिर भी भर रही हौसले की उड़ान
नारी शक्ति के लिए पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाने वाले बुदेलखंड में महिला संघर्ष और साहस की एक से बढ़कर एक मिसाल देखने को मिल जाती है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर अतंरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बहादुरी और हौसले की उंची उड़ान से देश ही नहीं बल्कि विदेशों में अपना लोहा मनवा चुकी गुलाबी गैंग की राष्ट्रीय कमांडर संपत पाल ऐसे तमाम नाम है, जो लोगों की जुबान पर गाहे बगाहे आते ही रहते हैं।
Ashwani Mishra | ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 1, 2015, 7:42 AM IST
नारी शक्ति के लिए पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाने वाले बुदेलखंड में महिला संघर्ष और साहस की एक से बढ़कर एक मिसाल देखने को मिल जाती है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर अतंरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बहादुरी और हौसले की उंची उड़ान से देश ही नहीं बल्कि विदेशों में अपना लोहा मनवा चुकी गुलाबी गैंग की राष्ट्रीय कमांडर संपत पाल ऐसे तमाम नाम है, जो लोगों की जुबान पर गाहे बगाहे आते ही रहते हैं।

बुंदेली महिला संघर्ष, साहस और हौसले के कारवें को आगे बढ़ाते हुए तिंदवारी थाना क्षेत्र के जसइपुर गांव में एक ऐसी महिला जिसको भगवान ने दो हांथ ऐसे दिए हैं, जो सिर्फ नाम के लिए हैं।

अपने नाम वाले हाथों वाली इस महिला का नाम महरजिया है, जिसके दोनों हाथ बचपन से पूरी तरह से विकलांगता की भेट चढ़ गए थे। दोनों हांथों में महज तीन उंगलियां और दोनों हांथों की लंबाई, तीनों उंगलियों की लंबाई से भी कम है। बावजूद इसके हिम्मत और हौसले की अनोखी मिसाल बन चुकी महरजिया आम दिनचर्या के हर वह काम करती हैं, जिसको एक स्वस्थ वयक्ति करता है।

ताकतविहीन दोनों हांथों से ये महिला घरेलू काम से लेकर खेतों पर फसल की देखरेख करना और भारी भरकम बाल्टी में हैंडपंप से पानी भरने जैसे काम को करते महरजिया को जो भी देखता है, तो बस देखता ही रह जाता है।

अपने पिता और दो भाइयों के साथ खुशनुमा जीवन जी रही महरजिया का कहना है कि उसके दोनों हांथ पूरी तरह से अपंग है, इसका उसके उपर कोई असर नहीं पड़ता है। बचपन से लेकर बड़े होने तक कभी भी हांथों की विकलांगता के खौफ को उसने अपने उपर हावी नहीं होने दिया। वहीं इस बाबत गांव की महिलाओं का कहना है कि महरजिया को काम करते और चेहरे पर खुशी के सितारों को देखने के बाद उनकी की हिम्मत बढ़ती है।

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First published: February 28, 2015, 5:46 PM IST
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