पिछले 15 सालों से बेटी के साथ कुएं में रह रही है यह दलित महिला

खास बात यह है कि उसके आधार कार्ड और राशन कार्ड में भी घर का पता कुआं वाला घर ही लिखा हुआ है. कुएं पर रहने के कारण लोग उसे कबूतरी कहकर बुलाते हैं.

NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: April 17, 2018, 9:13 AM IST
पिछले 15 सालों से बेटी के साथ कुएं में रह रही है यह दलित महिला
कुएं पर अपनी बेटी के साथ खाना बनाती छोटी की फोटो.
NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: April 17, 2018, 9:13 AM IST
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अभी हाल में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत गरीबों को घर देने में देश में खुद को 'नंबर वन' बताया है, लेकिन बांदा जिले की नरैनी तहसील इलाके के नसेनी गांव में एक महिला पिछले 15 सालों से एक कुएं पर अपना आशियाना बना कर रह रही है. खास बात यह है कि उसके आधार कार्ड और राशन कार्ड में भी घर का पता कुआं वाला घर ही लिखा हुआ है. कुएं में रहने के कारण लोग उसे कबूतरी कहकर बुलाते हैं. कुएं में ही पलकर आज उसकी बेटी 15 साल की हो गई है.

मूलरूप से मध्य प्रदेश के अजयगढ़ के पांड़ेपुरवा की रहने वाली उक्त महिला एक दलित है, जो पति की मौत के बाद ससुरालवालों द्वारा घर से निकालने के बाद कूएं में रह रही है. उसने बताया कि जब उसकी बेटी 6 माह की थी तब उसने नरैनी तहसील के नसेनी गांव में शरण ली और एक कुएं को घर मानकर रहने लगी. दलित महिला की बेटी रोशनी आज 15 साल की है, जो स्कूल जाती है. कुआं वाले घर में महिला की पूरी गृहस्थी मौजूद है. महिला की पहचान छोटी के रूप में हुई है, जो दो वक्त की रोटी का इंतजाम मेहनत-मजदूरी से करती है.

बकौल छोटी, एक दो दिन में मजदूरी मिलती है बाकी दिन खाली जाता है. दूसरों के यहां काम करती हूं, झाड़ू पोछा- बर्तन धोकर गुजारा करती हूं. 15 साल पहले पति खत्म हो गया. मेरी बेटी रोशनी उस वक्त महज 3 साल की थी. 3-4 साल से अधिकारियों से काॅलोनी की बात चल रही है, लेकिन अभी तक कुछ इंतजाम नहीं हुआ इसलिए आज भी अपनी बेटी के साथ इसी कुएं में रह रही हूं.

कुएं पर रखा गृहस्थी के सामान की फोटो.


छोटी के मुताबिक उसे कुछ साल पहले आवासीय भूखंड का पट्टा दिया गया था, लेकिन यह भूखंड कब्रिस्तान के बिल्कुल बगल में होने की वजह से वहां घर नहीं बना सकी. ग्राम प्रधान से लेकर अधिकारियों की चौखट पर कई बार माथा टेक चुकी छोटी की किसी ने मेरी फरियाद नहीं सुनी.

पिता की मौत के बाद खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर बेटी रोशनी कहती है कि सबके पास मदद के लिए गई, लेकिन काॅलोनी नहीं मिली.अब क्या करें. पिता जी चले गए. यहीं गांव के स्कूल में पढ़ते हैं. मां के साथ तहसीलदार के पास गए थे, लेकिन कोई मदद नहीं मिली.

मामला सामने आने के बाद न्यूज18 ने बांदा के जिलाधिकारी दिव्य प्रकाश गिरि से बात की. उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद हमने मौके पर एसडीएम और सीडीओ को मौके पर भेजा था. हमने वैकल्पिक तौर पर महिला को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत मकान आवंटित कर दिया गया है. महिला को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है.

उन्होंने कहा कि मैं इस मामले को तुरंत दिखवा रहा हूं. यह भी देखा जाएगा कि जो भी इसकी आर्थिक स्थिति के अनुसार इनको सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सकता है. इस पीड़ित महिल को आवास तत्काल प्रदान किया जाएगा. इस मामले को मैं स्वयं दिखाकर जांच कराके यथासंभव सहायता दिलवाने में मदद करूंगा. सरकारी आवास आवंटन अब तक क्यों नहीं हुआ इसकी अपने स्तर से जांच कराएंगे.

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