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केवल एक लाख लगाकर पांच महीने में हो रही तीन लाख से ज्यादा की कमाई, मशरूम की खेती से किसान कर रहे कमाल

केवल एक लाख लगाकर पांच महीने में हो रही तीन लाख से ज्यादा की कमाई, मशरूम की खेती से किसान कर रहे कमाल

बाराबंकी में किसानों को मशरूम की खेती से हो रहा लाभ

बाराबंकी में किसानों को मशरूम की खेती से हो रहा लाभ

Barabanki Mashroom Farming: बाराबंकी किसानों का कहना है कि इस खेती में केवल एक लाख की लागत लगाकर पांच से छह महीने में करीब तीन से साढ़े तीन लाख रुपये कमाया जा सकता है. वहीं किसानों को मशरूम की खेती से जोड़ने के लिए अनुदान भी दिया जाता है.

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बाराबंकी. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बाराबंकी (Barabanki) जिले में मशरूम (Mashroom) की खेती किसानों के लिये समृद्धि का द्वार खोल रही है. गेहूं और धान की परंपरागत खेती करने वाले जिले हजारों किसान अब बाराबंकी जिले में मशरूम की खेती कर रहे हैं. किसान पांरपरिक खेती के साथ-साथ मशरूम की खेती करके दोगुना से ज्यादा का लाभ कमा रहे है. वैसे तो हर मौसम में मशरूम होती है, मगर जाड़े के मौसम में मशरूम का उत्पादन भी ज्यादा होता है और लोग इसे खाने में पसंद भी करते हैं. बाराबंकी जिले की अगर बात करें तो यहां के हैदरगढ़, बनीकोडर, दरियाबाद, सिद्धौर, हरख, त्रिवेदीगंज और सूरतगंज ब्लॉक में मशरूम की काफी खेती होने लगी है. इतना ही नहीं मशरूम उत्पादन में कृषि विभाग की ओर से किसानों को पुरस्कार भी दिया गया है. बाराबंकी किसानों का कहना है कि इस खेती में केवल एक लाख की लागत लगाकर पांच से छह महीने में करीब तीन से साढ़े तीन लाख रुपये कमाया जा सकता है. वहीं किसानों को मशरूम की खेती से जोड़ने के लिए अनुदान भी दिया जाता है.

बाराबंकी जिले के सैदनपुर गांव में मशरूम की खेती करने वाले ऐसे ही एक किसान राजेश हैं. राजेश ऐसे किसान हैं, जिन्होंने एक समय पर माली हालत अच्छी न होने के चलते केवल 20 हजार की लागत लगाकर मशरूम की खेती की थी. लेकिन राजेश इस समय करीब पांच से छह लाख की लागत लगाकर मशरूम की खेती कर रहे हैं. उनका कहना है कि मशरूम की खेती करके किसान केवल एक लाख की लागत लगाकर चार से पांच महीने में करीब तीन से साढ़े 3 लाख रुपये कमा सकते हैं. राजेश ने कांट्रैक्ट पर खेत लेकर उसमें छप्पर से कई बंगले तैयार किये हैं और उसके अंदर मशरूम की खेती कर रहे हैं. बंगले के अंदर बांस बल्लियों के सहारे मशरूम बोने के लिए बेड बनाए गए हैं. आलम यह है कि एक समय में अपने गांव में केवल राजेश ही मशरूम की खेती कर रहे थे, लेकिन अब उनकी देखा-देखी गांव में करीब 150 लोग मशरूम की खेती कर रहे हैं.

ऐसे हो रहा फायदा
किसान राजेश का कहना है कि मशरूम की खेती में गेहूं के भूसे की खपत ज्यादा होती है. एक बंगले के अंदर मशरूम बोने के लिए लगभग 50 क्विंटल भूसे की जरूरत पड़ती है. भूसे में रासायनिक और ऑर्गेनिक खाद मिलाकर उसे करीब एक महीने सड़या जाता है. उसके बाद इसमें मशरूम के बीज बोए जाते हैं. राजेश के मुताबिक वह मशरूम के बीज दिल्ली से लेकर आते हैं. मशरूम बोने के करीब एक महीने के बाद से ही वह टूटने लगी और प्रति दिन एक क्विंटल तक मशरूम निकलने का औसत है. यह मशरूम 80 रुपये प्रति किलो से लेकर 150 रुपये प्रति किलो तक बिक जाती है. तैयार मशरूम को इलाहाबाद, गोरखपुर, लखनऊ, गोंडा, बहराइच आदि की मंडियों में वाहनों पर लाद कर भेजा जाता है.

Tags: Barabanki News, UP news, Up news in hindi, UP police

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