बाराबंकी में घाघरा का तांडव, स्कूल और अस्पताल भी नदी के पानी से लबालब

बाराबंकी जिले के तराई इलाकों में बाढ़ की मुसीबत फिलहाल अभी टलती नजर नहीं आ रही है. घाघरा नदी के जलस्तर में कमी तो आई है, लेकिन बाढ़ का पानी पूरी तरह से कम नहीं हुआ है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 20, 2018, 4:58 PM IST
बाराबंकी में घाघरा का तांडव, स्कूल और अस्पताल भी नदी के पानी से लबालब
नाव से स्कूल जाते बच्चे
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Updated: August 20, 2018, 4:58 PM IST
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद के तराई इलाकों में घाघरा नदी का तांडव लगातार जारी है. नदी का पानी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है. हालांकि हालात पहले से कुछ सामान्य हुए हैं, लेकिन यहां रह रहे लोगों को इस समस्या से अभी पूरी तरह से निजात नहीं मिल सका है. बाढ़ के पानी ने सैकड़ों गांवों को तो बुरी तरह प्रभावित किया ही है, साथ ही यहां के प्राइमरी स्कूल और अस्पतालों में भी नदी का पानी लबालब भरा है.

बाराबंकी जिले के तराई इलाकों में बाढ़ की मुसीबत फिलहाल अभी टलती नजर नहीं आ रही है. घाघरा नदी के जलस्तर में कमी तो आई है, लेकिन बाढ़ का पानी पूरी तरह से कम नहीं हुआ है. तमाम रास्ते और गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं. वहीं. घाघरा से होने वाली तबाही का दायरा भी दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है. बाढ़ के पानी ने रामनगर, सिरौलीगौसपुर, रामसनेहीघाट और फतेहपुर तहसील के तमाम गांवों को बुरी तरह जलमग्न कर दिया है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में नेता से लेकर तमाम आलाधिकारी लगातार दौरा कर रहे हैं. अधिकारी ग्रामीणों को राहत सामग्री पहुंचाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन फिर भी कई लोग कोई मदद न मिलने का आरोप लगा रहे है.

इलाके के सभी सराकारी स्कूलों और अस्पतालों के अंदर अब भी बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है. वहीं सरकारी स्कूल तक जाने वाले रास्तों पर भी बाढ़ का पानी भरने से बच्चों को स्कूल जाने में दुश्वारी हो रही है. बच्चों का कहना है कि कई हफ्तों से उनके स्कूलों में पानी भरा है. जब पानी निकल जाएगा तभी उनकी पढ़ाई आगे बढ़ पाएगी.

वहीं यहां के अस्पतालों के अंदर कई फीट पानी भरने से यहां के डॉक्टर दूसरी जगहों पर बैठकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. गांव के लोग नाव का सहारा लेकर किसी तरह मरीजों को डॉक्टर के पास पहुंचा रहे हैं. दूसरी जगहों पर बैठकर इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों कें अंदर काफी पानी भरा हुआ है. जिसके चलते वहां मरीजों का इलाज नहीं हो सकता. हम दूसरी जगहों पर अपना सेंटर लगाकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. हमारे पास मरीजों की जरूरत की लगभग सारी दवाइयां मौजूद हैं. इसलिए किसी के इलाज में हमें कोई परेशानी नहीं हो रही.

बाराबंकी के बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार का कहना है कि बाढ़ग्रस्त इलाकों के स्कूलों को बंधे पर शिफ्ट किया गया है. शिक्षक वहीं पर जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं. सिरौलीगौसपुर के तिलवारी गांव में नाव के सहारे बच्चों के स्कूल जाने पर बीएसए का कहना है कि उनको इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है. वह मामले की जानकारी लेकर उचित कार्रवाई करेंगे.

बाराबंकी के सीएमओ डॉ रमेश चंद्र ने बताया कि बाढ़ पीड़ित इलाकों में हमने 22 चौकियां बनाई हैं. सभी चौकियों पर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ समेत तमाम कर्मचारी तैनात हैं. सभी चौकियों पर पर्याप्त मात्रा में दवाइयों के इंतजाम भी किए गए हैं. पानी को साफ करने, उल्टी दस्त समेत सांप काटने की दवाइयों की भी पूरी व्यवस्था की गई है. सीएमओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग का असल काम बाढ़ खत्म होने के बाद शुरू होता है, क्योंकि उसके बाद तमाम बीमारियां फैलती हैं. वहीं अस्पतालों में पानी भरने के सवाल पर सीएमओ ने बताया कि डॉक्टर दूसरी जगहों पर बैठकर मरीजों का बराबर इलाज कर रहे हैं. मरीजों के इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती जा रही.

(रिपोर्ट: अनिरुद्ध शुक्ला)
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