बाराबंकी में विकास का दूसरा नाम थे बेनी प्रसाद वर्मा, अपने बेबाक अंदाज से सियासत पर छोड़ी अलग छाप

पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का निधन हो गया है. (File Photo)
पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का निधन हो गया है. (File Photo)

बाराबंकी (Barabanki) बेनी प्रसाद वर्मा (Beni Prasad Verma) की सिर्फ जन्म स्थली ही नहीं बल्कि उनकी कर्मस्थली भी रही. उनके प्रशंसक बेनी प्रसाद वर्मा के राजनीति में उदय को बाराबंकी के भाग्य के उदय से जोड़कर देखते हैं. समाजवादी पार्टी की पहली सरकार में जब वह लोक निर्माण विभाग मंत्री बने तो बाराबंकी जिले में सड़कों का जाल बिछा दिया गया.

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बाराबंकी. उत्तर प्रदेश के बाराबंकी (Barabanki) जनपद में लोग पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा (Beni Prasad Verma) द्वारा कराए गए विकास कार्यों को आज भी याद करते हैं. यहां तक कहा जाता है कि जिले में विकास की सही शुरुआत बेनी प्रसाद वर्मा ने ही की. बेनी प्रसाद वर्मा को जब भी सरकार में मौका मिला, ये बाराबंकी के लिए बड़ा शुभ रहा. समाजवादी पार्टी में वह मुलायम सिंह के बाद दूसरे नम्बर के नेता के रूप में माने जाते थे. कहा जाता था कि मुलायम सिंह स्वयं अपनी बात काट सकते हैं, मगर बेनी प्रसाद वर्मा की बात कभी नहीं काटते. प्रदेश में जब पहली बार सपा सरकार बनी तो लगभग सभी महत्वपूर्ण विभाग बेनी प्रसाद वर्मा के पास थे. इनमें लोक निर्माण विभाग, आबकारी, सिचाईं आदि.

जब-जब बने मंत्री बाराबंकी की खुली किस्मत

बाराबंकी बेनी प्रसाद वर्मा की सिर्फ जन्म स्थली ही नहीं बल्कि उनकी कर्मस्थली भी रही. उनके प्रशंसक बेनी प्रसाद वर्मा के राजनीति में उदय को बाराबंकी के भाग्य के उदय से जोड़कर देखते हैं. समाजवादी पार्टी की पहली सरकार में जब वह लोक निर्माण विभाग मंत्री बने तो बाराबंकी जिले में सड़कों का जाल बिछा दिया गया. केन्द्रीय संचार मंत्री बनने पर देश का सबसे अधिक क्षमताओं में गिना जाने वाला टेलीफोन एक्सचेंज बाराबंकी में बनवाकर बेनी प्रसाद वर्मा ने एक बार फिर जिले के प्रति अपनी भावना को व्यक्त किया. यही नहीं यूपीए-2 में केन्द्रीय इस्पात मंत्री बनने पर वह सांसद तो गोंडा से थे मगर सबसे ज्यादा विकास कराया बाराबंकी का.



यूपी की सियासत में 'जिद्दी' नेताओं में शुमार
वैसे उत्तर प्रदेश की सियासत में बेनी प्रसाद वर्मा 'जिद्दी' नेताओ में भी शुमार किया जाता है. अपनी जिद के कारण ही 2007 विधानसभा चुनाव से पहले बेनी पूर्व मुलायम सिंह यादव से नाराज हो गए. इसके बाद उन्होंने समाजवादी क्रान्ति दल की स्थापना कर डाली और अपनी नई पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. बाद में वह काँग्रेस में शामिल होकर अपने सजातीय मतों के जरिये प्रदेश में काँग्रेस की लहर भी 2009 के लोकसभा चुनाव में लेकर आये. इन आम चुनावों में यूपी में कांग्रेस ने सबको चौंकाते हुए लोकसभा की 22 सीटें जीत लीं. इसका इनाम भी कांग्रेस ने उनको केन्द्रीय इस्पात मंत्री बना कर दिया.
वैसे कांग्रेस में पीएल पुनिया से उनका छत्तीस का आंकड़ा रहा. 2012 के विधानसभा चुनाव में नेशनल टीवी चैनल पर उन्हें बाहरी कहकर कांग्रेस को भी सकते में डाल दिया. 2014 में गोंडा से बेनी प्रसाद चुनाव चुनाव हार गए.

आखिरकार मुलायम ने कराई 'घर वापसी'
इसके बाद तस्वीर बदली और समाजवादी पार्टी ने उनकी अहमियत समझते हुए फिर मनाना शुरू किया. आखिरकार मुलायम सिंह यादव उन्हें फिर मना कर समाजवादी पार्टी में ले आये और राज्यसभा भेजने का काम पार्टी कोटे से किया.

सदन में घनिष्ठ मुलायम पर भी हमला करने से नहीं चूके
वैसे बेनी प्रसाद वर्मा हमेशा से अपनी बेबाक टिप्पणी के कारण चर्चा में रहे. उन्होंने अपनी टिप्पणी से उन पार्टियों को भी नहीं छोड़ा जिस में वह रहे. यही कारण रहा कि मुलायम सिंह यादव से घनिष्ठ सम्बन्ध होने के बावजूद कांग्रेस में रहते हुए उन्हें सदन के अन्दर आतंकवादियों से सम्बन्ध होना करार दे दिया. पिछले काफी समय से बेनी प्रसाद वर्मा बीमार चल रहे थे. आज अचानक उनका शरीर शान्त हो गया. बेनी प्रसाद वर्मा के जाने से जिले में शोक की लहर दौड़ गई. वह अपने अक्खड़ मिजाज और जनपद में कराए गए अपने विकास के लिए सदैव याद किए जाएंगे.

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