बाराबंकी के इस स्कूल में बच्चे रोज पढ़ाई से पहले लगाते हैं झाड़ू

जब न्यूज 18 ने ये तस्वीरें बाराबंकी के बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार को दिखाईं तो वह भी हैरान रह गए. उन्होंने इस मामले में स्कूल के टीचरों नोटिस भेजकर जवाब मांगा है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 18, 2018, 5:27 PM IST
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Updated: July 18, 2018, 5:27 PM IST
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही सरकारी स्कूल के बच्चों को कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर सुविधा देने की बात कर रही हो. लेकिन हकीकत काफी अलग है. बाराबंकी के कई स्कूलों के शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय उनसे साफ-सफाई करवाते हैं. कई स्कूलों के बच्चे क्लास में पढ़ाई की शुरुआत करने से पहले खुद झाड़ू लगाकर साफ-सफाई करते हैं और ये नजारा अक्सर ही देखने को मिलता है.

उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की क्या हालत है, इस बात का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि यहां बच्चों के हाथों में कॉपी-किताब की जगह झाड़ू नजर आती है. बेसिक शिक्षा विभाग ने भले ही स्कूलों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी वहां पढ़ा रहे टीचरों को दी हो लेकिन कुछ टीचरों ने छात्रों के हाथों में झाड़ू थमा दी.

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ऐसा ही एक मामला फतेहपुर तहसील के पूर्व माध्यमिक विद्यालय, औरंगाबाद से सामने आया है. सुबह जब बच्चे स्कूल पहुंचते हैं तो उनके हाथ में पेंसिल और कॉपी-किताब की जगह झाड़ू थमा दी जाती है. स्कूल के टीचर ही छात्रों को सफाई कर्मी बना देते हैं.

प्रधानाध्यापिका नूरजहां. Photo: News 18


छात्रों के साथ किए जा रहे इस तरह के व्यवहार को देखकर जब न्यूज18 की टीम स्कूल के अंदर पहुंची तो महिला टीचर हड़बड़ा गईं और बच्चों को झाड़ू रखकर क्लास में बैठने के लिए कहने लगीं. जब हमने स्कूल की प्रधानाध्यापिका नूरजहां से पूछा कि आप बच्चों से झाड़ू क्यों लगवा रही हैं तो वह मानने को तैयार ही नहीं थीं. वह सफाई देने लगीं कि स्कूल में कोई सफाईकर्मी नहीं आता है.

देवरिया में पढ़ने की जगह इस स्कूल में सफाई करते हैं बच्‍चे

जब न्यूज 18 ने ये तस्वीरें बाराबंकी के बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार को दिखाईं तो वह भी हैरान रह गए. उन्होंने इस मामले में स्कूल के टीचरों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है. उनका कहना है कि जांच के बाद वह इन टीचरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति न बने. बीएसए के मुताबिक सरकारी स्कूलों में सफाई के लिए सफाईकर्मियों को लगाया गया है. टीचरों को उन्हीं से सफाई करानी चाहिए.

(रिपोर्ट: अनिरुद्ध शुक्ला)
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