Union Budget 2018-19 Union Budget 2018-19

बाराबंकी: मुआवजे के लिए बदलवाया मौत का कारण! सांसद ने कहा- ​सीएम योगी को बताएंगे

ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 14, 2018, 1:13 PM IST
बाराबंकी: मुआवजे के लिए बदलवाया मौत का कारण! सांसद ने कहा- ​सीएम योगी को बताएंगे
बाराबंकी से बीजेपी सांसद प्रियंका सिंह रावत
ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 14, 2018, 1:13 PM IST
बाराबंकी में लगातार मौतों का सिलसिला जारी है. इस बीच पीड़ित परिवारों ने बाराबंकी सांसद के सामने जो खुलासा किया, उससे साफ पता चल रहा है कि मामले में जिला प्रशासन ने अपनी गर्दन बचाने के लिए झूठ का सहारा लिया. अब सांसद ने पूरे मामले में सीएम योगी को जानकारी देने और कार्रवाई की मांग करने की बात कही है.

बाराबंकी की सांसद प्रियंका सिंह रावत ने इन्हीं पीड़ित परिवारों से मिल कर उनका दुख जानने का प्रयास किया. सांसद के सामने पीड़ित परिवारों ने मौत की असली वजह स्प्रिट पीने से बताई, जबकि जिलाधिकारी ने सिर्फ 3 लोगों की स्प्रिट पीने से और बाकी की स्वाभाविक मृत्यु बता कर मामले की इतिश्री कर ली थी.

सांसद के सामने यह भी बात सामने आई कि उन्हें प्रशासन के मुताबिक बयान देने के लिए मजबूर किया गया था. सांसद ने इस पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री से मिलकर लिखित रूप से देने की बात और इसमें शामिल प्रशासन के लोगों पर भी कठोर कार्यवाई करने की बात कही है.

बाराबंकी के देवा थाना इलाके में हुई 13 मौतों के मामले में चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि इन मौतों की असल वजह बताने में जिला प्रशासन झूठ बोल रहा है. सांसद के पहुंचने पर मुनिया पुरवा गांव के प्रधान सन्तोष ने बताया कि प्रशासन के लोगों ने गांव आकर उनके मनमाफिक बयान देने के लिए मजबूर करते हुए कहा था कि अगर शराब या स्प्रिट से किसी की मौत बताई तो उन्हें किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल पाएगी.

अगर इन पीड़ितों की बात को सही मानें तो फिर क्या जिलाधिकारी झूँठ बोल रहे थे क्योंकि जिलाधिकारी अखिलेश तिवारी ने ज्यादातर लोगों की मौत का कारण स्वाभाविक मौत बताया था. जिलाधिकारी ने सिर्फ तीन मौतों को स्प्रिट से मौत बताया था, जबकि सांसद जहां-जहां गईं सभी ने एक स्वर में स्प्रिट पीने की मुख्य वजह बताया.

बाराबंकी की सांसद प्रियंका सिंह रावत ने बताया कि यह घटना बहुत बड़ी है. इसी वजह से वह अपने बीमार पति को छोड़कर पीड़ितों का दुख बांटने आयी हैं. सांसद ने बताया कि इन सबकी मृत्यु स्प्रिट पीने से हुई है.

स्प्रिट पीने के लिए नहीं होती है, प्रशासन को इसकी जांच करनी चाहिए थी कि अगर स्टॉक है तो उसका क्या उपयोग हो रहा है. सांसद ने कहा कि जिन अधिकारियों का इसमें दोष है, उन सभी के विरुद्ध कठोर कार्यवाई करने के लिए मुख्यमंत्री से स्वयं मिल कर मांग करेंगी.

सांसद ने व्यक्तिगत रूप से सभी पीड़ित परिवारों को 10-10 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता और जाड़े से बचाव के लिए कम्बल दिए.

बाराबंकी के मेयो अस्पताल में इलाज करा रहे मुनिया पुरवा गांव के उमेश की आँखे इसी स्प्रिट काण्ड में चली गयी हैं. उमेश ने बताया कि उसने स्प्रिट पी थी. स्प्रिट पीने के बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी और उसकी आंखों से दिखाई देना बन्द कर दिया. यह सब देख कर वह अपना इलाज कराने यहां आ गया.

अब उसकी आंखों से दिखना बिल्कुल बन्द हो गया है. इसी गांव के निवासी देवीशरण ने बताया कि उसने भी मदन के यहाँ से स्प्रिट लेकर पी थी. उसके बाद उनकी भी हालत बिगड़ गयी और ठण्ड लगने के साथ उनकी आंखों से दिखना बन्द हो गया. समय पर बगैर किसी लापरवाही के वह यहां इलाज के लिए आ गया और अब उसकी आँखों से दिखाई देने लगा है. इन दोनों ने कैमरे के सामने स्प्रिट पीने की बात स्वीकार किया है.

मेयो अस्पताल के प्रशानिक अधिकारी ने बताया कि यह दोनों मरीज गम्भीर हालत में आये थे इनका इलाज चल रहा है. यह दोनों स्प्रिट पीकर आये थे. इन दोनों में से उमेश के आंख की रोशनी आने की संभावना न के बराबर है जबकि देवी शरण की हालत ठीक है. उधर पुलिस ने उस शख्स मदन जायसवाल को हिरासत में ले लिया है, जिसने स्प्रिट बेंचने का काम किया था.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर