कृषि बिल के खिलाफ UP में किसानों का हल्लाबोल, बाराबंकी में जोरदार प्रदर्शन, नेशनल हाइवे जाम कर आगजनी

बाराबंकी में किसानों ने लखनऊ अयोध्या हाइवे जाम कर दिया है. (Photo: News 18)
बाराबंकी में किसानों ने लखनऊ अयोध्या हाइवे जाम कर दिया है. (Photo: News 18)

बाराबंकी (Barabanki) में किसान नेता आशू चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार आनन-फानन में जो ये कृषि अध्यादेश लेकर आई है, हम लोग इसका विरोध कर रहे हैं. अगर ये अध्यादेश किसानों के हित में है, तो इसे लागू करने से पहले किसानों से बात की जाती. सभी की सहमति के बाद इसे लागू किया जाता.

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बाराबंकी. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बीते मानसून सत्र (Monsoon Session 2020) में पास कराए गए 3 कृषि अध्यादेशों (Farmers Bill) के विरोध में आज किसान आंदोलनरत हैं. पंजाब और हरियाणा में पहले ही रेल रोको आंदोलन (Rail Roko Aandolan) चल रहा है. वहीं उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भी किसान सड़कों पर उतर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन को उतरे.

अयोध्या-लखनऊ हाइवे जाम

सैकड़ों की संख्या में किसानों ने अयोध्या-लखनऊ हाइवे जाम कर दिया. इस दौरान किसान आन्दोलन में राहगीरों का लम्बा जाम लग गया. हाइवे के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी लाइनें लग गईं. किसानों के हंगामे को लेकर प्रशासन के हाथ-पांव फूले. बता दें कई महीनों से किसान अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन को चेतावनी दे रहे थे.



ऐलान- तीनों विधेयक वापस लेने तक चलेगी लड़ाई
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने रोड पर जाम लगाया और आगजनी भी की. प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि केंद्र के कृषि बिल से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और कृषि क्षेत्र बड़े पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा. किसानों ने कहा कि तीनों विधेयक वापस लिए जाने तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.

Farmers protest barabanki
प्रदर्शन केद दौरान विरोध में आग जलाते किसान (Photo: News 18)




लागू करने से पहले किसानों से बात नहीं की

किसान नेता आशू चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार आनन-फानन में जो ये कृषि अध्यादेश लेकर आई है, हम लोग इसका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर ये अध्यादेश किसानों के हित में है, तो इसे लागू करने से पहले किसानों से बात की जाती. फिर सभी की सहमति के बाद इसे लागू किया जाता. आशू ने कहा कि इतने सालों से देश का किसान अपने किसान आयोग की मांग कर रहा है, लेकिन उसपर ध्यान न देकर इस अध्यादेश को लागू किया गया है.

आशू ने कहा कि किसानों का आरोप है कि केंद्र के इस बिल से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और कृषि क्षेत्र बड़े पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा. किसानों ने कहा कि तीनों विधेयक वापस लिए जाने तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.
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