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यशपाल जैसी होगी पाकिस्तान में कुलभूषण की हालत!

कुलभूषण किन परिस्थतियों से गुजर रहा होगा, इसका अंदाजा लगाने के लिए आज हम आपके सामने एक शख्स को पेश कर रहे हैं.

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पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव की रिहाई को लेकर भारत सरकार तमाम कोशिशें करती दिख रही है. अभी तक कुलभूषण किस जेल में बंद है, यह जानकारी वहां की सरकार ने नहीं दी है.

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कुलभूषण किन परिस्थतियों से गुजर रहा होगा, इसका अंदाजा लगाने के लिए आज हम आपके सामने एक शख्स को पेश कर रहे हैं. बरेली में रहने वाले यशपाल पाकिस्तान की जेलों में होने वाले अत्याचार का जीता जागता उदाहरण है.



पाकिस्तान जेल में 3 साल कैद रहने के बाद यशपाल मनोरोगी हो चुका है. रिहाई के 4 साल बीतने के बाद भी उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं हो सकी है. विडंबना ये है कि गैर मुल्क की यातनाओं के बाद अब अपने ही मुल्क के प्रशासकों की वादाखिलाफी से उसका परिवार यशपाल का इलाज तक नहीं करा पा रहा है.
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बरेली जिला मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर फरीदपुर थाना क्षेत्र में पढेरा गांव का 17 साल का नौजवान यशपाल मजदूरी की तलाश में दिल्ली गया था. वहां से अपने साथियों उसने मजदूरी के लिए उसने पंजाब की राह पकड़ी. लेकिन पंजाब में उसकी जिंदगी ने करवट ली और यशपाल गलती से पाकिस्तान के बॉर्डर को पार कर गया.

पाकिस्तानी सेना ने यशपाल को गिरफ्तार कर जेल में ठूंस दिया. ये बात 2010 की है और यशपाल के साथ पाकिस्तानी जेल में यातनाओं का सिलसिला पूरे 3 साल 32 दिन चला.

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इस दौरान सिर्फ जीने लायक खाना और मानसिक व शारीरिक यंत्रणाओं ने यशपाल को तोड़कर रख दिया और उसे मनोरोगी बना दिया. सजा पूरी होने के बाद यशपाल की रिहाई की कोशिश शुरू हुई और स्थानीय एनजीओ की मदद से यशपाल लंबी जद्दोजहद के बाद मई 2013 में वतन वापस लौट सका.

घर वापसी के बाद यशपाल के लिए प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से मदद के कई वायदे किए गए लेकिन समय के साथ सभी वादे भुला दिए गए. वतन वापसी के चार साल बाद भी यशपाल की मानसिक स्थिति अभी भी ठीक नहीं हो सकी है. यशपाल का बरेली के मानसिक चिकित्सालय में उपचार चल रहा है. आर्थिक मदद ना मिलने की वजह से परिवार गरीबी में जीने को मजबूर है.

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वहीं यशपाल की मां मालती देवी कहती हैं कि पैसा होता तो वह बेटे का इलाज सही तरीके से करवा सकते थे. थोड़ा पैसा मिलता है तो इलाज कराते हैं, नहीं तो बस यशपाल बिना इलाज के घर में ही पड़ा रहता है.

Yashpal Bareilly released from pakistan prison
यशपाल से बात करने पर वह बस इतना ही बताता है कि जेल में कभी-कभी पिटाई भी होती थी. Image: ETV Network


पिता बाबू राम कहते हैं कि शुरू में आश्वासन तो सभी ने दिया था, लेकिन सहायता किसी ने नहीं दी. जिला प्रशासन ही उनकी मदद कर दे तो कम से कम बेटे का इलाज करवा सकें.

यशपाल की रिहाई के लिए लड़ाई लड़ने वाले समाजसेवी प्रदीप कुमार का कहना है कि यशपाल जैसे कई कैदी अपनी सजा पूरी होने के बाद भी पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं. नागरिकता सिद्ध करने और मानसिक रोगी होने की वजह से उनकी रिहाई संभव नहीं हो पा रही है. रिहाई के बाद सरकार न तो उपचार और ना ही पुनर्वास की व्यवस्था के बारे में सोचती है.
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