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Bareilly: एथलेटिक्स में देश का गौरव बढ़ाने को तैयार हैं रिदम शर्मा, पीटी ऊषा बनने का सपना

बरेली के रेलवे स्टेडियम में कोच अजय कश्यप से प्रशिक्षण लेती रिदम शर्मा 

बरेली के रेलवे स्टेडियम में कोच अजय कश्यप से प्रशिक्षण लेती रिदम शर्मा 

बरेली के बड़ा बाजार निवासी रिदम शर्मा बचपन से ही एथलेटिक्स ट्रैक की शौकीन रही हैं और अब वह इस ट्रैक पर खूब पसीना बहा रह ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट – अंश कुमार माथुर

बरेली: बरेली में एथलेटिक्स बिरादरी में रिदम शर्मा चर्चा का विषय बनी हुई है. इसकी मुख्य वजह यह है की रिदम शर्मा सामान्य खिलाड़ियों के बीच एक अद्भुत प्रदर्शन कर रही हैं. रिदम बचपन से ही बोलने और सुनने में असमर्थ हैं, लेकिन उनका एथलेटिक ट्रैक पर देश का गौरव बढ़ाने का है और उनका हौसला बुलंद है. रिदम ट्रैक पर दौड़ना शुरू करती है तो अपने प्रतिद्वंद्वी को दूसरे ही राउंड में पछाड़ देती है. उनका यह कौशल सामान्य खिलाड़ियों में भी दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर कर देता है. बरेली के बड़ा बाजार निवासी रिदम शर्मा बचपन से ही एथलेटिक ट्रैक की शौकीन रहीं है और अब वह इस ट्रैक पर खूब पसीना बहा रही हैं. जिले में होने वाली विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में गोल्ड मेडल भी जीत चुकी हैं.

16 वर्ष की रिदम बताती है की बचपन से ही पीटी ऊषा, हिमा दास जैसे एथलीट को देखकर 12 साल की उम्र से ही एथलेटिक्स में करियर बनाने का उन्होंने फैसला किया. उसके बाद रेलवे स्टेडियम के कोच अजय कश्यप से संपर्क किया. अजय से पहले रिदम ने और भी कोच से प्रशिक्षण के लिए कहां तो हर कोई कोच रिदम को मूकबधिर होने के कारण उनको प्रशिक्षण देने में पीछे हट जाता था. मगर कोच अजय ने रिदम के लिए आगे आकर उनको प्रशिक्षण में मदद देने का आश्वासन दिया.

रिदम का जोश और जुनून देखकर प्रभावित हुए कोच 
अजय बताते हैं की रिदम का एथलेटिक्स में करियर बनाने का जोश और जुनून देखकर वह इतना प्रभावित हुए कि रिदम से प्रशिक्षण की फीस तक लेने से उन्होंने मना कर दिया. जिसके बाद प्रतिदिन अजय की अगुवाई में रिदम ने प्रशिक्षण प्राप्त किया और उनके कमाल के प्रदर्शन ने जिले में कई प्रतियोगिताओं में उनको गोल्ड मेडल हासिल करा दिया. उनके पिता अनुपम शर्मा और मां पूनम शर्मा बेटी की सफलता का श्रेय रिदम शर्मा के कोच अजय को देते हैं. रिदम और अजय के बीच प्रशिक्षण के दौरान जो बातें होती हैं वह सभी इशारे में होती हैं. अजय उनसे इशारे में ही बात करते हैं.

कोच अजय ने सवारा रिदम का एथलेटिक्स करियर
उनकी मां पूनम बताती हैं कि उनके लिए अजय किसी भगवान से कम नहीं है क्योंकि आज रिदम को एथलेटिक्स में करियर बनाने में कोच अजय का विशेष योगदान है. अगर वो प्रशिक्षण नहीं देते तो शायद रिदम अपने अंदर के इस कौशल को नहीं तराश पाती.

रिदम ने प्रथम स्थान हासिल कर जीता गोल्ड
कोच अजय का कहना है कि वह एक कोच होने का फर्ज निभा रहे हैं और वे मानते हैं कि रिदम उनका सपना पूरा करें और जिलें का नाम रोशन करें. उनकी इच्छा है और रिदम का जूनून है की ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन कर वह देश का गौरव बढ़ाएं. ट्रैक की मल्लिका रिदम ने इस बार बरेली में हुई ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता में 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल जीता है. मिल्खा सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित खेल प्रतियोगिता में 400 मीटर रेस में भी स्वर्ण पदक हासिल किया. अभी कुछ दिन पहले हुई जिला स्तरीय स्कूल एथलेटिक्स मीट में रिदम ने रिले, 400 मीटर दौड़ और 400 मीटर हर्डल में गोल्ड मेडल जीता है. मूकबधिर होने के बाद भी रिदम सामान्य खिलाड़ियों के बीच अपने कौशल से अपनी उपलब्धि से सभी को चौंका देती है.

Tags: Bareilly news, Sports news, UP news

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