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Bareilly: बरेली का चौधरी मोहल्ला, आज भी दिखती है रानी साहिबा की परछाईं!

बरेली का चौधरी मोहल्ला जहां आज भी रानी साहिबा नजर आती हैं. चौधरी बंसत राव से जुड़ी कुछ निशानियां आज भी यहां बाकी है. रा ...अधिक पढ़ें

    अंश कुमार माथुर/बरेली. शहर के चौधरी मुहल्ले के कुछ दिलचस्प किस्से आज भी लोगों की जुबान पर रहते है. बरेली कॉलेज इतिहास विभाग के अध्यक्ष एस.के. मेहरोत्रा बताते है कि आज से लगभग 400 साल पहले इस जगह पर एक महल हुआ करता था. जिसके अवशेष आज भी यहां मौजूद है. इस मोहल्ले में एक जगह है जिसे आज भी रानी साहिबा के फाटक के नाम से जाना जाता है. फिलहाल अब तो केवल फाटक के अवशेष ही रह गये है. लेकिन किस्से आज भी काफ़ी मशहूर है. यहां के रहने वाले बाशिंदे आज भी रानी साहिबा के होने का अनुभव करते है. अक्सर एक महिला की चहलकदमी रात में लोगों को आज भी चौंका देती है.

    इस महल के पीछे के की कई कहानियां आज भी प्रचलित है. स्थानीय निवासी बताते है कि राजा वसंतराव और उनके पूर्वज ब्राह्मण थे और बैद्य का कार्य भी करते थे. एक बार की बात है बादशाह शाहजहां की गर्भवती बेटी की हालत नाजुक हो गई थी. उसे ठीक करने के लिए उनके शाही बैद्य नाकाम होने लगे थे. तभी बरेली रियासत से वसंतराव के पिता को बेटी का इलाज के लिए बुलाया गया.

    पर्दे का था चलन था पहले
    उस दौर में पर्दे का चलन बहुत ज्यादा हुआ करता था. इसलिए हाथ में डोर बांधकर नब्ज देखकर दवा दी जाती थी. उनके द्वारा दी गई दवा से बेटी ठीक हुई तो शाहजहां ने खुश होकर बरेली का यह इलाका उनको इनाम में दे दिया और उन्हें चौधरी के खिताब से भी नवाजा. तब से ही यह महल उनके परिवार के पास था. अब तो केवल महल के अवशेष ही यहां रह गये है. बाकी अब यह जगह चौधरी मोहल्ला, रानी साहिबा का फाटक और चौधरी तालाब के नाम से प्रसिद्ध है.

    हाथी के शौकीन थे राजा
    स्थानीय निवासी कल्लू मिश्रा बताते है कि राजा बसंत राव की रुहेलों से बनती नहीं थी. दोनों तरफ से हमले होते रहते थे. राजा साहब ने अपनी हिफाजत के लिए शाहबाद और लखना से अपने रिश्तेदारों को बुला लिया था. उन्हें महल के आसपास आबाद किया कुछ लोगों को जोड़कर फौज भी खड़ी कर ली थी. मोहल्ले के बुजुर्गों मेवाराम का कहना है की महल को सुरक्षित करने के लिए उस वक्त फाटक बनाया जा रहा था. जिसमें एक दीवार दिन में बनने के बाद उसी रात में अपने आप गिर जा रही थी. जिसके लिए राजा साहब को नरबलि की सलाह दी गई. जिसके बाद राजा साहब के द्वारा नरबलि दी गई. तब कहीं जाकर विशालकाय फाटक का निर्माण हुआ. फाटक काफी बड़ा इसलिए बनाया गया क्योंकि राजा बसंत राव को हाथी पालने का शौक था और अक्सर वह हाथी से भ्रमण पर निकलते भी थे.

    राजा साहब का कत्ल करने आये थे
    इतिहास के पन्ने पलटने पर पता चलता है की एकबार महल के मुख्य द्वार के पास से दो कालीन बेचने वाले ज़ोर-ज़ोर से कालीन लें लों कालीन की आवाज़ देते हुए गुजर रहे थें. तभी महल के फाटक पर तैनात सैनिकों ने कालीन देखने के लिए उनको रोक लिया. लेकिन उन्होंने कालीन केवल राजा को दिखाने की बात कहीं. जिसके बाद यह बात राजा साहब तक पहुंची और उन्हें महल के अंदर भेजा गया. ये कालीन बेचने वाले राजा का कत्ल करने आये थे. उन्होंने अंदर राजा साहब को कालीन दिखाने के बहाने अकेला पाकर उनकी हत्या को अंजाम दे दिया. जिस वक्त राजा बसंत राव चौधरी की हत्या हुई उस समय उनका सबसे वफादार कुत्ता जंजीर से बना हुआ था. उसने राजा की हत्या होते देख जंजीर तोड़ दी. तब तक मौका पाकर कातिल महल से निकल चुके थे. लेकिन राजा के पालतू कुत्ते ने पीछा नहीं छोड़ा और उस कातिल को काट कर मार डाला था.

    Tags: Bareilly news, Uttar pradesh news

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