मर्द और औरत साथ भोजन नहीं कर सकते, दरगाह आला हजरत ने जारी किया फतवा

दरगाह आला हजरत के मरकजी दारुल इफ्ता से जारी फतवे में कहा गया है कि शादी समारोह और जलसों के मौकों पर औरतों और मर्दों का एक साथ भोजन करना नाजायज है.

ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 15, 2018, 10:36 PM IST
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Updated: February 15, 2018, 10:36 PM IST
बरेली की विश्व प्रसिद्ध दरगाह आला हजरत द्वारा गुरूवार को जारी किया गया एक अजीबोगरीब फतवा चर्चा का विषय बन गया है. दरगाह आला हजरत के मरकजी दारुल इफ्ता से जारी फतवे में कहा गया है कि शादी समारोह और जलसों के मौकों पर औरतों और मर्दों का एक साथ भोजन करना नाजायज है.

दरअसल, दरगाह आला हजरत स्थित मरकजी दारुल इफ्ता से पीलीभीत निवासी इमदाद हुसैन ने एक सवाल पूछा, जिसमें एक मौलाना के भाई की शादी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भाई की शादी में बैंड बाजा और डीजे बजवाया गया और औरतों और मर्दो को एक साथ एक ही हाल में भोजन कराया गया, क्या शरीयत के हिसाब से यह सही है?

बताया जाता है दारुल इफ्ता के मुफ्ती कौसर अलील रजवी ने यह फतवा इसी मामले को लेकर जारी किया है, जिसमें उन्होंने शादी समारोह और जलसों के मौकों पर औरतों और मर्दो का एक साथ भोजन करना नाजायज बताया है और ऐसी जगहों पर मर्दो का औरतों से मिलना-जुलना भी नाजायज ठहराया है.

दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता मौलाना शहाबुद्दीन ने बताया कि फतवों की हमेशा अहमियत रही है, जिसे सदियों से लोग मानते आ रहें हैं, कोई भी शरीयत और इस्लाम से ऊपर कोई नहीं है. वहीं, जारी किए गए फतवे पर इस्लाम को मानने वाले मुस्लिमों ने कहना है कि ऐसे बेजा फतवों से ही फतवों की अहमियत खत्म हो रही है. उन्होंने ऐसे फतवों को इस्लाम की छवि के लिए भी खराब ठहराया है.

वहीं, समाजसेवी मुख़्तार अंसारी ने बताया कि इस्लाम में पति-पत्नी के एक साथ भोजन करने को सही ठहराया गया है. उन्होंने कहा कि इस्लाम में बहुत सारी चीजों पर पाबंदी है, जिसमें मोबाइल पर बात करना, टीवी देखना और टीवी पर डिबेट करना भी शामिल है, लेकिन समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है और अब लोगों को भी बदलने की जरूरत है.
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