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अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन पर बोले बरेलवी उलेमा- AIMPLB कर रहा सियासत

HARISH SHARMA | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 19, 2019, 11:37 AM IST
अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन पर बोले बरेलवी उलेमा- AIMPLB कर रहा सियासत
तन्जी़म उलमा-ए-इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी

मौलाना ने इस पर कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लोग अयोध्या के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं और नहीं चाहते हैं कि अयोध्या मुद्दा खत्म हो.

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बरेली. अयोध्या मसले (Ayodhya Dispute) पर आए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के खिलाफ आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) ने पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल करने की बात कही है. पर्सनल लॉ बोर्ड के इस फैसले के विरोध में बरेलवी उलेमा उतर आये हैं. बरेलवी उलेमा ने पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले को गैर जिम्मेदाराना बताया है.

सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक रविवार को लखनऊ में आयोजित की गई थी. बैठक में फैसला हुआ है कि फैसले के ख़िलाफ़ रीव्यू पीटिशन दाखिल की जायेगी और 5 एकड़ जमीन नहीं लेने का भी ऐलान किया. तन्जी़म उलमा-ए-इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले मुस्लिम संगठनों और मुस्लिम नेताओं ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगा उसको हम मानेंगे. इसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी शामिल था. मगर बोर्ड की लखनऊ में बैठक हुई उसमें ये निणर्य लिया गया कि फैसले के ख़िलाफ़ रीव्यू पीटिशन दाखिल की जायेगी और 5 एकड़ जमीन नहीं लेने का भी ऐलान किया.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लोग अयोध्या के मुद्दे पर राजनीति कर रहे

मौलाना ने इस पर कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लोग अयोध्या के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं और नहीं चाहते हैं कि अयोध्या मुद्दा खत्म हो. इसको जिंदा रख कर इसी तरह की राजनीति की बिसात बिछाते रहे. बोर्ड देश में हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा और अमन व शातिं के बने अच्छे वातावरण को भगं करना चाहता है. जबकि हकीकत यह है कि बोर्ड सिर्फ देश के 25 फीसद नुमाइंदगी करता है और 75 फीसद मुस्लिम आबादी बोर्ड के ख़िलाफ़ है. मौलाना ने आगे कहा कि अब इस मुद्दे को यही छोड़ कर आगे बढ़ने की बात करनी चाहिए. इस मामले को लेकर दोबारा देश का महोल खराब न हो. अब इस विवाद का दरवाजा हमेशा के लिए बन्द हो जाना चाहिए. इस मुद्दे कि वजह से देश के मुसलमानों ने जान व माल का बहुत ज्यादा नुकसान उठाया है. अब मुसलमान नही चाहता है कि इस मुद्दे कि वजह से उसकी नयी नस्ल को मुश्किलों और मुसीबतों का सामना करना पड़े. मुसलमानों ने सबर व तहामुल्ल के साथ फैसले को स्वीकार किया है. क्योंकि मुसलमान नहीं चाहता कि देश एक बार फिर नफरत की भेंट चढ़ जाये.

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First published: November 19, 2019, 11:37 AM IST
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