SC/ST कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही: ओमप्रकाश राजभर

योगी सरकार पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा कि ड्राइवर नया और इंजन पुराना. उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों पर काम नहीं करने का आरोप लगाया.

HARISH SHARMA | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 31, 2018, 1:06 PM IST
SC/ST कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही: ओमप्रकाश राजभर
सुभासपा के ओम प्रकाश राजभर. Photo: News 18
HARISH SHARMA | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 31, 2018, 1:06 PM IST
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष व प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने शुक्रवार को बरेली में कहा कि एससी-एसटी एक्ट को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही था. उन्होंने कहा, 131 सांसद वहां पर एससी-एसटी के हैं.' इसलिए सरकार ने उनके दबाव में आकर यह फैसला लिया है. अपने आक्रामक तेवरों से अपने ही सहयोगी दल पर सवाल खड़े करनेवाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जिसपर मुकदमा लिख जाए तो उसी से पूछिए कि उसके उपर क्या बीतती है. राजभर ने दावा किया कि सरकार इस वक्त जो भी निर्णय ले रही है क्योकि उसकी नजर वोट बैंक पर है.

योगी सरकार पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा कि ड्राइवर नया और इंजन पुराना. उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों पर काम नहीं करने का आरोप लगाया. जो काम आजादी के बाद हुआ उस तरह से अधिकारी काम नहीं कर रहे है. पीएम मोदी ने 112 योजनाएं बनाई लेकिन धरातल पर कोई भी नहीं दिख रहा है, इसके लिए सीधेतौर पर बीजेपी सरकार जिम्मेदार है.

राजभर ने कहा, 'व्यवस्था के लिये इस देश मे सिर्फ नेता दोषी है, अगर देश में नेता सुधर जाए तो सब सुधर जाएगा, क्योकि अगर नेता गड़बड़ करता है तो अफसर भी उसकी की राह में चलकर गड़बड़ी करते है. राजभर ने कहा कि सत्ता में आने के बाद सबको एक साथ संतुष्ट नहीं किया जा सकता. वहीं कांग्रेस पर हमला करते हुए योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ने कहा कि उन्होंने 40 सालों में पिछड़ों के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया, क्योकि उनकी सबसे बड़ी चिंता वोट की रही हैं.

गौरतलब है कि राज्यसभा में एससी-एसटी ऐक्ट को मंजूरी मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस ऐक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधान पर लगाई गई रोक भी समाप्त हो गई है. लोकसभा से इस संशोधन बिल को मंजूरी दी जा चुकी थी.

बता दें कि शीर्ष अदालत ने इसी साल 19 मई को एससी-एसटी ऐक्ट के तहत शिकायत मिलने पर तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. बड़े पैमाने पर इस कानून के बेजा इस्तेमाल का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया था.

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