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COVID-19: UP में ट्रांसजेंडर बने तारणहार, अपने पैसों से मजदूरों को खिला रहे हैं खाना
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News18 Uttar Pradesh
Updated: March 30, 2020, 4:05 PM IST
COVID-19: UP में ट्रांसजेंडर बने तारणहार, अपने पैसों से मजदूरों को खिला रहे हैं खाना
लॉकडाउन के बाद मजदूर अपने गांवों की ओर भूखे और प्यासे ही लौट चले हैं (File Photo)

लॉकडाउन के बाद दिहाड़ी मजदूरों का काफिला सड़कों पर आ गया. वे बेघर और बेरोजगार हो गए. दिल्ली व अन्य शहरों से अपने गांव की ओर भूखे ही चल पड़े. इन्हें खाना खिलाने और पानी पिलाने की जिम्मा ट्रांसजेंडर ने अपने कंधों पर ले लिया.

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बरेली/ प्रयागराज. यूपी में ट्रांसजेंडर समुदाय (Transgender Community) कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचाव के तौर पर लॉकडाउन लागू करने के बाद दिहाड़ी मजदूर और कामगारों को अपनी बचत के पैसों से खाना खिला रहे हैं. बरेली और प्रयागराज में ट्रांसजेंडरों का समूह लॉकडाउन के बाद अपने घरों को लौट रहे प्रवासी मजदूरों को भोजन और पानी उपलब्ध कराने के लिए आगे आ रहे हैं. बरेली में लगभग 50 ट्रांसजेंडर हर दिन 100 लोगों को भोजन प्रदान कर रहे हैं. ट्रांसजेंडर अपनी बचत के पैसों से गरीब और मजदूरों को खाना खिला रहे हैं.

एक ट्रांसजेंडर प्रेमा ने कहा कि कई परिवार ऐसे हैं जो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और वे खाने के लिए रोजाना की कमाई पर ही निर्भर हैं. हम उन्हें खाना परोस रहे हैं क्योंकि हमें लगता है कि मानवता की सेवा करना सबसे अच्छी सेवा है.

ट्रांसजेंडरों का एक समूह रसोईघर शुरू करने की बना रहे योजना



बरेली की प्रेमा ने कहा कि मेरे करीब 50 दोस्तों का समूह गरीब मजदूरों को गर्म पका हुआ भोजन खिलाने के लिए सामुदायिक रसोईघर शुरू करने की योजना बना रहा है. हमें इस काम को शुरू करने के लिए स्थानीय प्रशासन की अनिवार्य अनुमति का इंतजार है. उसने बताया कि फिलहाल हम लोगों को बिस्कुट और फल दे रहे हैं.



प्रयागराज में 30 ट्रांसजेंडर भोजन और पानी बांट रहे

वहीं प्रयागराज में लगभग 30 ट्रांसजेंडरों का एक अन्य समूह यात्रियों और बेघरों को भोजन और पानी की बोतलें परोस रहा है. एक ट्रांसजेंडर ईश्वरी ने बताया कि हमने मंदिरों के पास तैनात रहते हैं क्योंकि ज्यादातर बेघर और प्रवासी गरीब मजदूर राहत के लिए यहां आते हैं. हम इस काम के लिए अपनी बचत का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इनकी मेहरबानी से 70 घंटे के बाद मिला भोजन और पानी

प्रवासी मजदूर राजेश कुमार ने बताया कि रविवार को ट्रांसजेंड समूह द्वारा हमें भोजन कराया गया था. उन्होंने कहा कि हम हमेशा इन लोगों का मजाक उड़ाते हैं लेकिन आज की तारीख में वे मेरे तारणहार रहे हैं. लगभग 70 घंटे तक बिना भोजन किए रहने के बाद, उन्होंने मुझे भोजन और पानी दिया. राजेश ने मेरठ से प्रयागराज की पैदल यात्रा की है. वे मेरठ में एक बिस्कुट के कारखाने में काम करते हैं. उनका गांव वाराणसी में है. वे अपने गांव लौट रहे हैं.

ईश्वरी और उनके टीम के सदस्यों ने कहा कि वे COVID-19 के बारे में लोगों को शिक्षित कर रहे हैं और सभी तरह की सावधानी बरत रहे हैं. वे जिला प्रशासन के दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं.

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First published: March 30, 2020, 3:46 PM IST
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