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रामपुर लोकसभा सीट: जया और आजम की चुनावी जंग में कौन जीतेगा?

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Updated: April 22, 2019, 2:37 PM IST
रामपुर लोकसभा सीट: जया और आजम की चुनावी जंग में कौन जीतेगा?
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इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने पहुंचीं जया प्रदा यहां से दो बार लोकसभा का चुनाव जीत चुकी हैं.

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  • Last Updated: April 22, 2019, 2:37 PM IST
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रामपुर ऐसी लोकसभा सीट है जहां से चुनाव जीतकर अबुल कलाम आजाद देश के पहले शिक्षा मंत्री बने थे. बात 1952 की है. लेकिन उसके बाद सिर्फ 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनावो को छोड़ दिजा जाए तो कांग्रेस लगातार 1989 तक लगातार जीती.

1977 और 1991 में दो बार राजेंद्र कुमार शर्मा ने यहां से जीत हासिल की थी और दोनों ही बार अलग-अलग पार्टियों की टिकट पर. '77 में वो जहां जनता पार्टी के टिकट पर थे तो '91 में बीजेपी के टिकट से. बाद में 1996 में कांग्रेस की बेगम नूर बानों यहां से चुनाव जीतीं तो 1998 में मुख्तार अब्बास नकवी ने बीजेपी के टिकट यह सीट फिर कब्जाई. 1999 में फिर जब बेगम नूर बानो जीतीं तो यह आखिरी बार था जब कांग्रेस का इस सीट पर सिक्का चला था. उसके बाद समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी और अदाकारा जया प्रदा 2004 और 2009 जीतकर संसद पहुंचीं. 2014 में बीजेपी के डॉ. नेपाल सिंह मोदी लहर में इस सीट से जीते थे.

abul kalam
मौलाना अबुल कलाम आजाद 1952 के लोकसभा चुनाव में रामपुर सीट से जीते थे.


कैसी होगी आजम और जया की लड़ाई

इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने पहुंचीं जया प्रदा यहां से दो बार लोकसभा का चुनाव जीत चुकी हैं. लेकिन तब अंतर ये था मुस्लिम बहुल इस इलाके में जया प्रदा को मुलायम सिंह यादव की वजह से एकमुश्त अल्पसंख्यक वोटों का फायदा हो जाता था. लेकिन इस बार की कहानी पिछली बार से उलट है. रामपुर विधानसभा सीट से 9 बार से लगातार विधायकी का चुनाव जीत रहे आजम खान जया प्रदा के सामने हैं. आजम खान की इलाके में बेहतर पैठ और वक्त गुजरने के साथ उन्होंने खुद को रामपुर की पहचान के तौर पर स्थापित किया.

ऐसे में जया प्रदा के लिए इस बार की चुनावी लड़ाई पहले जैसी आसान नहीं रहने वाली. जया के लिए एक और समस्या कांग्रेस की तरफ से संजय कपूर का खड़ा होना है. संजय कपूर स्थानीय नेता हैं. और इस स्थिति में त्रिकोणीय लड़ाई होने के पूरे आसार हैं.

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First published: April 22, 2019, 2:36 PM IST
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