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अल्पसंख्यक आयोग ने दर्ज किया निदा खान और फतवा देने वालों के बयान

निदा खान का बयान दर्ज 
(file Photo)

निदा खान का बयान दर्ज (file Photo)

अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य रूमाना सिद्दीकी और कुंवर इकबाल हैदर ने दोनों पक्षों के लिखित बयान दर्ज किए. शुक्रवार को जांच र ...अधिक पढ़ें

    हलाला, तीन तलाक और बहुविवाह के खिलाफ आवाज उठाने वाली निदा खान के मामले में उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने दोनों पक्षों के लिखित बयान दर्ज किए हैं. आला हजरत खानदान की बहू निदा खान को इस्लाम से खारिज करने के फतवे पर गुरुवार को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग सदस्यीय जांच समिति ने पहुंचकर निदा और उनके खिलाफ फतवा जारी करने वाले पक्ष से बातचीत की.

    अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य रूमाना सिद्दीकी और कुंवर इकबाल हैदर ने दोनों पक्षों के लिखित बयान दर्ज किए. शुक्रवार को जांच रिपोर्ट आयोग की बैठक में रखी जाएगी. जांच समिति ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह घटना बेहद संवेदनशील है. इससे धार्मिक, जनभावनाएं जुड़ी हैं. इसके बावजूद कोई भी व्यक्ति कानून को चुनौती नहीं दे सकता है, कानून का राज है. फतवे के जरिये कानून का उल्लंघन करने वालों पर मुकदमा दर्ज हो सकता है.

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    जिलाधिकारी वीरेन्द्र कुमार सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुनिराज जी. समिति से मिलने पहुंचे और समिति ने अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम का फीडबैक लिया. इस बीच, गत 16 जुलाई को बरेली शहर के बानखाना क्षेत्र में एक कथित हलाला पीड़िता के बचाव के लिये पहुंची निदा पर भीड़ के ‘हमले’ के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गयी है. उनके पास पहले से ही एक गनर था अब एक और गनर उन्हें दे दिया गया है.

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    दारुल इफ्ता ने जारी किया था निदा के खिलाफ फतवा
    बता दें कि गत 16 जुलाई को आला हजरत दरगाह के दारुल इफ्ता विभाग ने निदा के खिलाफ फतवा जारी किया था. शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया था कि मुफ्ती अफजाल रजवी के दस्तखत से जारी फतवे में कहा गया है कि निदा अल्लाह और उसके बनाये हुए कानून की मुखालिफत कर रही हैं, लिहाजा उनका ‘हुक्का-पानी’ बन्द कर दिया गया है. निदा की मदद करने वाले और उनसे मिलने-जुलने वाले मुसलमानों को भी इस्लाम से खारिज किया जाएगा.

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    'निदा बीमार हो तो दवाई भी ना दी जाए'
    मुफ्ती आलम ने बताया कि फतवे के मुताबिक निदा अगर बीमार हो जाती हैं तो उनको दवा भी नहीं दी जाएगी. निदा की मौत पर जनाजे की नमाज पढ़ने पर भी रोक लगा दी गई है. इतना ही नहीं निदा की मृत्यु होने पर उन्हें कब्रिस्तान में दफनाने पर भी रोक लगा दी गयी है.

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    निदा की शादी आला हजरत खानदान के उस्मान रजा खां उर्फ अंजुम मियां के बेटे शीरान रजा खां से 16 जुलाई 2015 को शादी हुई थी मगर बाद में पांच फरवरी 2016 को उनका तलाक हो गया था. उसके बाद निदा ने अदालत का सहारा लिया है. निदा अन्य तलाकशुदा महिलाओं के लिये भी आंदोलन कर रही हैं. उन्होंने तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं के खिलाफ भी अभियान छेड़ रखा है.
    (एजेंसी इनपुट के साथ)

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    Tags: Bareilly news

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