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हम संविधान से अलग कोई सत्ता नहीं चाहते, हमें इस पर विश्वास है: मोहन भागवत

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 19, 2020, 3:25 PM IST
हम संविधान से अलग कोई सत्ता नहीं चाहते, हमें इस पर विश्वास है: मोहन भागवत
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि वह संविधान से अलग कोई सत्ता नहीं चाहते.

संघ प्रमुख मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) ने कहा कि हम सब हिन्‍दू हैं और जब-जब हम हिन्‍दू भाव भूले हैं, तब-तब विपत्ति आई है.

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बरेली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने रविवार को बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय में ‘भविष्य का भारत : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण’ विषय पर व्याख्यान दिया. इस मौके पर संघ प्रमुख ने कई मुद्दों पर खुल कर बात की. भागवत ने संविधान से लेकर हिंदुत्व तक पर बात की. उन्होंने कहा संविधान कहता है कि हमें भावनात्मक एकीकरण लाने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन भावना क्या है? वह भावना है- यह देश हमारा है, हम अपने महान पूर्वजों के वंशज हैं और हमें अपनी विविधता के बावजूद एक साथ रहना होगा. इसे ही हम हिंदुत्व कहते हैं.

भागवत आगे बोले, जब आरएसएस के कार्यकर्ता कहते हैं कि यह देश हिंदुओं का है और 130 करोड़ लोग हिंदू हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी के धर्म, भाषा या जाति को बदलना चाहते हैं. हम संविधान से अलग कोई सत्ता केंद्र नहीं चाहते हैं, क्योंकि हम इस पर विश्वास करते हैं. वही भविष्य का भारत पर आरएसएस का दृष्टिकोण है.



इजरायल की तारीफसंघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हम भारत की देश के संविधान में भविष्य के भारत की कल्पना की गई है. इजरायल के जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि वह दुनिया में सम्पन्न देश है. आज दुनिया में उसकी धाक है. उसको हाथ लगाया तो अंजाम भुगतना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि हमारा देश करोड़ों की जनसंख्या वाला हो गया है. देश के खजाने में 16 हजार करोड़ बाकी है. वहीं, इंग्लैंड से हमको 30 हजार करोड़ वसूलना है. संघ प्रमुख ने कहा कि हम बार-बार गुलाम होते रहे, इसलिए बार-बार स्वतंत्र होते रहे.



'हम में हैं कुछ कमियां'
मोहन भागवत ने कमियों की ओर भी संकेत किया. उन्‍होंने कहा, 'मुट्ठी भर लोग आते हैं और हमें गुलाम बनाते हैं. ऐसा इसलिए होता है कि हमारी कुछ कमियां हैं. सब एक हैं तो सबका मिलकर रहना भी होगा. हम सब हिन्‍दू हैं और जब-जब हम हिन्‍दू भाव भूले हैं, तब-तब विपत्ति आई है.' भागवत ने आगे कहा कि हम राम-कृष्ण को नहीं मानते, कोई बात नहीं, लेकिन इन सब विविधताओं के बावजूद हम सब हिन्‍दू हैं. जिनके पूर्वज हिन्‍दू थे, वे हिन्‍दू हैं. हम अपनी संस्कृति से एक हैं, हम अपने भूतकाल में भी एक हैं. यहां 130 करोड़ लोग हिन्‍दू हैं, क्‍योंकि आप भारत माता की संतान हैं.

इनपुट- हरीश शर्मा

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First published: January 19, 2020, 1:11 PM IST
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