17 साल पहले जिस चीनी मिल के लिए किसानों ने खाईं थीं गोलियां, CM योगी ने किया उद्घाटन
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17 साल पहले जिस चीनी मिल के लिए किसानों ने खाईं थीं गोलियां, CM योगी ने किया उद्घाटन
बेसिक शिक्षा विभाग के स्थानांतरण नीति को CM योगी ने दी मंजूरी (file photo)

अंग्रेजों के जमाने (1932) में स्थापित मुंडेरवा चीनी मिल (Munderwa Sugar Mill) को वर्ष 1998 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने अपरिहार्य कारणों से बंद कर दिया था.

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लखनऊ. पिछले 21 वर्षों से बंद चल रही पूर्वांचल (Purvanchal) की प्रमुख मुंडेरवा चीनी मिल (Munderwa Sugar Mill) के पेराई सत्र की शुरुआत गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) कर दी. इस दौरान गन्ना मंत्री सुरेश राणा सहित चीनी निगम के उच्च अधिकारी मौजूद रहे. साल 1998 में बंदी के बाद इस चीनी मिल को खोलने के लिए किसानों ने कई आंदोलन किए, जिसमें उन्होंने गोलियां भी खाईं थीं. वर्ष 2002 में चीनी मिल को चालू करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में गोली चलने से तीन किसान मारे गए थे.

बता दें कि अंग्रेजों के जमाने (1932) में स्थापित इस चीनी मिल को 1998 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने अपरिहार्य कारणों से बंद कर दिया था. करोड़ों रुपए बकाया भुगतान और मिल को फिर से चलाने के लिए व्यापक आंदोलन और धरना-प्रदर्शन भी हुए थे. 12 दिसंबर 2002 को आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा गोली चलाए जाने के चलते तीन किसानों की मौत हो गई थी. लोगों ने इन्हें शहीद का दर्जा दिया. मुंडेरवा तिराहे पर तीनों किसानों की मूर्ति भी स्थापित की गई है.

सरकार का मानना है कि मुंडेरवा मिल का चालू होना यहां के लोगों के लिए एक सपने के पूरा होने जैसा है. इस मिल से करीब 45 हज़ार लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोज़गार पैदा होगा. यहां बिजली का भी उत्पादन होगा, जिसका लाभ जनता को मिलेगा.



सरकार बनते ही एक्शन में आए थे सीएम योगी
वैसे इस चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की कवायद सीएम योगी आदित्यनाथ ने सत्ता में आते ही शुरू कर दी थी. साल 2017 में सीएम योगी ने बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने और पुरानी मिलों की क्षमता बढ़ाने के एजेंडे पर प्राथमिकता से काम करना शुरू किया था. मार्च 2018 में मुख्यमंत्री ने मुंडेरवा चीनी मिल का शिलान्यास किया. उसी समय उन्होंने घोषणा की कि 383 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस मिल की क्षमता 5000 टीडीसी की होगी. यहां बनने वाली चीनी सल्फर मुक्त होगी. मिल में 27 मेगावाट का कोजेन प्लांट भी होगा. मिल रिकॉर्ड 12 महीने में बनकर तैयार होगी.

बता दें कि इसी साल अप्रैल में इस मिल का सफल ट्रायल हुआ था. अब 21 नवंबर को उद्घाटन के बाद यहां चीनी बनने लगेगी. बता दें इससे पहले मुख्यमंत्री ने इतनी ही क्षमता की पिपराइच, गोरखपुर चीनी मिल का भी उद्घाटन किया था.

1984 में यूपी सरकार ने किया था अधिगृहीत

इतिहास की बात करें तो साल 1932 में माधो महेश शुगर मिल प्राइवेट लिमिटेड, मुंडेरवा की 7 एकड़ जमीन में स्थापना हुई थी. 1984 में मिल को उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिगृहीत कर लिया. साल 1989 में मिल को विस्तार देने के लिए अगल-बगल की जमीनों का भी अधिग्रहण किया गया. साल 1998 में तत्कालीन सरकार मिल के घाटे में चलने के चलते बंद कर दिया. साल 2017 में मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने मिल को फिर से चलाने की घोषणा की.

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