कबीर की समाधि, मज़ार और फिर जनसभा: कुछ ऐसी है पीएम मोदी की मगहर यात्रा

आजादी के बाद पहली बार देश का कोई प्रधानमंत्री मगहर आ रहा है. ऐसे में पीएम मोदी की इस यात्रा को लेकर एक तरफ कबीरपंथियों में खासा उत्साह दिख रहा है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 28, 2018, 10:07 AM IST
कबीर की समाधि, मज़ार और फिर जनसभा: कुछ ऐसी है पीएम मोदी की मगहर यात्रा
आजादी के बाद पहली बार देश का कोई प्रधानमंत्री मगहर आ रहा है. ऐसे में पीएम मोदी की इस यात्रा को लेकर एक तरफ कबीरपंथियों में खासा उत्साह दिख रहा है.
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Updated: June 28, 2018, 10:07 AM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  गुरुवार को संत कबीर दास की निर्वाण स्थली मगहर में पहुंच रहे हैं. संत कबीर के प्राकट्य उत्सव पर पीएम मोदी संत कबीर नगर जिले के मगहर में कबीर की समाधि और मज़ार के दर्शन करेंगे. इसके अलावा वह यहां 24 करोड़ की लागत से बनने वाली कबीर एकेडमी की आधारशिला रखेंगे और फिर एक जनसभा को संबोधित करेंगे.

पीएम मोदी की इस रैली को लोकसभा चुनाव के अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री इस रैली से न सिर्फ चुनाव अभियान का बिगुल फूंकेंगे, बल्कि विरोधियों पर भी जमकर निशाना साधेंगे. प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, जिसकी कमान खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभाली है.

आजादी के बाद पहली बार देश का कोई प्रधानमंत्री मगहर आ रहा है. इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम मगहर में आकर कबीर की समाधि और मजार के दर्शन कर चुके हैं. ऐसे में पीएम मोदी की इस यात्रा को लेकर एक तरफ कबीरपंथियों में खासा उत्साह दिख रहा है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, देश के कोने-कोने से कबीरपंथी मगहर आए हैं.


वहीं स्थानीय निवासियों को भी पीएम मोदी के इस यात्रा से मगहर की पहचान को देश-दुनिया के मानचित्र पर नया आयाम मिलने की उम्मीद है. उन्हें उम्मीद है कि वर्षों से बंद पड़ी यहां की कताई मिल और गांधी आश्रम जल्द ही दोबारा चालू हो सकेगा.

संतकबीरनगर से बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी कहते हैं कि पीएम मोदी का मगहर आगमन जिले के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा. वह कहते हैं, 'प्रधानमंत्री के मगहर में कबीर निर्वाण स्थली पर आने से देश में सामाजिक समरसता का संदेश जाएगा. कबीर सामाजिक समरसता, मानवता, साम्प्रदयिक एकता और समाज को कुरीतियों से उबारने वाले महानायक थे. पीएम के आगमन से पूरी दुनिया मे कबीर के संदेशों और विचारों को बल मिलेगा.'

बता दें कि बनारस के लहरतारा में जन्में संत कबीर ने जीवन के अंतिम तीन वर्ष मगहर में बिताए थे. कहा जाता है कि 1575 ई में मगहर में कबीर का देहावसान हो गया. काशी में मरने से मोक्ष और मगहर में मरने से नरक मिलने का मिथक तोड़ने और अकाल से जूझ रहे लोगों को राहत देने के लिए मगहर आए सूफी कबीर ने अपने संदेशो के जरिये सामाजिक समरसता का ऐसा ताना-बाना बुना, जिसने हिन्दू-मुस्लिम के बीच की खाई को पाटने का काम किया. कबीर ने अपने समय के सामाजिक आडम्बरों और कुरीतियों पर जमकर चोट किया.

आमी नदी के किनारे बनी है संत कबीर की समाधि और मज़ार
आमी नदी के तट पर स्थित हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक विश्व प्रसिद्ध सूफी संत कबीर के परिनिर्वाण स्थली मगहर में एक साथ स्थित उनकी समाधि और मजार कौमी एकता के प्रतीक के रूप में जानी जाती है. समाधि पर जहां हिन्दू माथा टेकते हैं, तो वहीं मजार पर मुस्लिम समुदाय नमाज अता करता है.

सामाजिक कुरीतियों और आडम्बरों पर अपने विचारों के जरिये प्रहार करने वाले महात्मा कबीर को मानने वाले देश दुनिया के कई हिस्सों में फैले हैं. कबीर के अनुयायियों के लिए मगहर का कबीर चौरा किसी तीर्थ से कम नहीं. पीएम के आगमन को लेकर कबीरपंथी भी जुटने लगे हैं. उनका मानना है कि पीएम के आने से मगहर का विकास होगा और दुनिया मे कबीर के संदेश पहुंचेंगे.

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