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जानिए बस्ती के शहीद शिव गुलाम सिंह की कहानी, जब छोटी सी उम्र में अंग्रेजों से लिया था मोर्चा

Basti News: जिससे वो अंग्रेजी हुकूमत के आंखो की किरकिरी बन गए.

Basti News: जिससे वो अंग्रेजी हुकूमत के आंखो की किरकिरी बन गए.

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रिपोर्ट- कृष्ण गोपाल द्विवेदी

बस्ती. बस्ती के रूधौली क्षेत्र के 70 गांव की रियासत संभालने वाले दौलत सिंह के 23 वर्षीय बड़े पुत्र शिव गुलाम सिंह में 1857 के आजादी के जंग की आग धधक उठी थी. उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत से देश को आजाद कराने की ठान ली. छोटी सी उम्र में ही उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया. अपने रियासत के नवजवानों को इकठ्ठा कर सेना बनाना शुरू कर दिया. हालांकि शिव गुलाम सिंह के पास अंग्रेज की बड़ी सेना से सीधा मुकाबला करने के लिए संसाधन की कमी थी. लिहाजा उन्होंने गुरिल्ला युद्ध करने का प्लान बनाया और उसके लिए अपने सैनिकों को ट्रेनिंग भी दी. गुरिल्ला युद्ध के सहारे उन्होंने दर्जनों अंग्रेजी अफसरों को मार गिराया. जिससे वो अंग्रेजी हुकूमत के आंखो की किरकिरी बन गए.

शिव गुलाम सिंह तलवार चलाने की कला में निपुण थे. उनको दोनों हाथों से निपुणता से तलवार चलाने में महारथ हासिल थी. शिव गुलाम सिंह की शहादत स्थल बस्ती जिले के रूधौली तहसील के पैडा चौराहे पर उनकी याद में प्रतीक चिन्ह और पार्क बना हुआ है. बता दें कि शिव गुलाम सिंह के तीन और भाई थे. शिव बक्श सिंह, जीत सिंह व रंगा सिंह, जिसमें उनके तीसरे नंबर के भाई शिवबक्श सिंह की असमय मृत्यु हो गई थी. वहीं बाकी दोनों भाइयों जीत सिंह और रंगा सिंह को अंग्रेजों ने मारकर उनकी रियासत छीन ली. इसके बाद भी शिव गुलाम सिंह पीछे नहीं हटे और अंग्रेजी हुकूमत से अपनी लड़ाई जारी रखी व गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से अंग्रेज अधिकारियों व सैनिकों को मारते रहे.

धोखे से मिली शहादत
अंग्रेज चाल चलकर शिव गुलाम सिंह के कुछ करीबी और विश्वासपात्र लोगों को अपने साथ मिला लिया. उन्हीं के माध्यम से शिव गुलाम सिंह को सूचना पहुंचाई की अंग्रेजी हुकूमत के कुछ अधिकारी पैडा में आ रहे हैं, उर्दू में भेजे गए इस संदेश में चाल चली गई. जिससे शिव गुलाम सिंह की सेना भानपुर तहसील के बैड़वा पहुंच गई और शिव गुलाम सिंह अपने मात्र चार सिपाहियों के साथ पैडा पहुंचे. जहा अंग्रेजों के साथ हुए युद्ध में उनको शहादत मिली.

अंग्रेज शहीद शिव गुलाम सिंह को जिंदा पकड़ना चाहते थे. कारण अंग्रेजों ने पहले उनके पैर पर बीस से अधिक गोलियां मारी. फिर भी महान क्रांतकारी शहीद शिव गुलाम सिंह जमीन पर बैठकर ही दोनों हाथों से तलवार चलाते रहे. दर्जनों अंग्रेज सैनिकों का सर धड़ से अलग कर दिए. घबराकर अंग्रेजों को उनके सीने में गोली मारनी पड़ी. इस प्रकार महान योद्धा शिव गुलाम सिंह देश के आजादी के जंग में शहीद हो गए.

अंग्रेजों ने युद्ध का किया ऐलान
शहीद स्थल पैडा क्षेत्र के निवासी 92 वर्षीय बाबा रामयश द्विवेदी बताते हैं कि जब शिव गुलाम सिंह पैडा आए तो उन्होंने पूजा पाठ के लिए किसी पण्डित से मिलने की इच्छा जताई. तब उनके बाबा पण्डित राम दत्त जी गए. उन्होंने शिव गुलाम सिंह से कहा भी की आप यहां से चले जाइए. आज का दिन आपके लिए शुभ नहीं है. लेकिन शिव गुलाम सिंह ने कहा कि चढ़ा क्षत्रि वापस नहीं होगा और उनके बाबा के घर पहुंचते ही अंग्रेजों ने युद्ध का ऐलान कर दिया. शिव गुलाम सिंह को मारने के बाद अंग्रेज उनका सिर काटकर अपने साथ ले गए.

साहस की होती है चर्चा
इतिहासकार प्रो बलराम ने बताया की शहीद शिव गुलाम सिंह जैसा पराकर्मी और वीर योद्धा बस्ती में दूसरा कोई नहीं हुआ. छोटी सी उम्र में ही वो इतने आकर्षक और तलवारबाजी में निपुण थे. उनके सामने अंग्रेज सेना की छोटी टुकड़ी कभी टिक ही नहीं पाई थी.

Tags: Basti news, CM Yogi, Freedom fighters, Freedom Struggle Movement, UP news, Yogi government

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