जानिए क्यों एक दिन के लिए वीरान हो जाता है यूपी का यह गांव

1100 की आबादी वाले सेहरी खुर्द गांव में 125 के करीब घर है. राधे रमण बताते है कि राजेंद्र पंडित के घर के लोग एक बार गांव छोड़कर नहीं गए थे. एक महीने के अंदर राजेंद्र पंडित की मौत हो गई. उसके बाद से कोई भी ग्रामीण इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश नहीं करता.

NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: July 31, 2018, 9:52 AM IST
जानिए क्यों एक दिन के लिए वीरान हो जाता है यूपी का यह गांव
फाइल फोटो
NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: July 31, 2018, 9:52 AM IST
यूपी के सिद्धार्थनगर जिले के इटवा विकास खंड के ग्राम पंचायत सेहरी खुर्द के गांव के लोग हर तीसरे वर्ष आषाढ़ महीने के देवशयनी एकादशी के दिन पूरे दिन के लिए गांव छोड़कर चले जाते हैं. गांव के लोग पूरे दिन अस्थायी टेंट लगाकर बाहर ही भोजन बनाते-खाते हैं और उसी दिन देर रात गाजे-बाजे के साथ गांव आते है. बता दें कि सेहरी गांव के लोग तड़के ही अपने घरों को छोड़कर गांव से बाहर निकल जाते हैं. 

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सेहरी खुर्द गांव के ग्राम प्रधान राधे रमण ने न्यूज18 से बातचीत में बताया कि यह परंपरा इस गांव में कई सालों से चली आ रही है. ऐसा गांव के पूर्वज बताते आए हैं. एक बार गांव में अज्ञात बीमारी ने पांव पसारा था. बीमारी की चपेट में आकर गांव में आकस्मिक मौतें होने लगीं. इंसान से लेकर जानवर सभी मरने लगे थे. गांव वीरान होता जा रहा था.

गांव के बाहर टेंट लगाकर रहते ग्रामीण


उसी दौरान असम स्थित कामाख्या मंदिर से पधारे एक सिद्ध महात्मा रात्रि विश्राम के लिए गांव में ठहरे थे. गांव के लोगों ने जब उनसे इस संकट का हल पूछा तो उन्होंने देवी से प्रार्थना की और कहा कि हर तीसरे साल के आषाढ़ महीने की एकादशी के दिन गांव के लोग पूरे दिन गांव के बाहर रहें और रात्रि में सात प्रकार के मीठे पकवानों का भोग देवी को अर्पित करें. उसी समय से यह परंपरा चल रही है जिसका पालन सभी ग्रामीण करते चले आ रहे हैं.

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1100 की आबादी वाले सेहरी खुर्द गांव में 125 के करीब घर है. राधे रमण बताते है कि राजेंद्र पंडित के घर के लोग एक बार गांव छोड़कर नहीं गए थे. एक महीने के अंदर राजेंद्र पंडित की मौत हो गई. इस गांव में खौफ इतना है कि कोई भी ग्रामीण इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश नहीं करता. जिसने भी इसको तोड़ने की कोशिश की उसके घर के सारे सदस्य खत्म हो गए.

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देवी को चढ़ता है पकवान
सेहरी खुर्द गांव के दक्षिण स्थित समय देवी के मंदिर में गांव वाले मीठे पकवान देवी को समर्पित करते हैं, जिसमें गुड़ की खीर, माल पुआ, आटे का मनभोग, मीठी पूड़ी, शुद्ध खोए की बरफी, गुड़धनिया और देशी घी में बना हलवा शामिल है. गांव का प्रत्येक परिवार इन व्यंजनों को बनाता है और देवी को भोग चढ़ाता  है. वहीं पकवान बनाने और भोग लगाने के दौरान नये कपड़े से लेकर साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिया जाता है.

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