Home /News /uttar-pradesh /

आज के कबीर हैं यूपी के अली, रचीं राम की कविताएं

आज के कबीर हैं यूपी के अली, रचीं राम की कविताएं

हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,

हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,

हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,

  • News18
  • Last Updated :
    हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,

    आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना।

    संत कबीर ने बहुत सही लिखा है। आज हर तरफ धर्म के नाम पर नफरत और झगड़े हो रहे हैं। हर कोई अपने अराध्‍य को श्रेष्‍ठ बता रहा है। ऐसे में उत्‍तर प्रदेश का एक मामूली सा रिक्‍शे वाला रहमाल अली राम की कविताएं लिखकर समाज के लिए न केवल एक मिसाल पेश की है, बल्कि ये भी बताया कि सत्‍य केवल ईश्‍वर है। धर्म तो लोगों को बनाया है, भगवान एक ही है। भगवान को चाहे कोई भी नाम दे दिया जाए, लेकिन आस्‍था एक समान ही रहनी चाहिए।

    संत कबीर साहब राम की भक्ति पर अत्यधिक बल देते हैं और कहते हैं कि सब कुछ त्याग का राम का भजन करना चाहिए।

    सरबु तिआगि भजु केवल राम

    यानी राम या परमात्मा की भक्ति से ही माया का प्रभाव नष्ट हो सकता है तथा बिना हरि की भक्ति के कभी दुखों से मुक्ति नहीं हो सकती है। संत कबीर की तरह ही बस्‍ती के रहमान भी समाज में धार्मिक सद्भावना का संचार करना चाहते हैं। रहमान ने राम पर कविताएं लिखी हैं, रहमान की लिखी कविताएं आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। उन्‍होंने कविताएं रचकर सिर्फ राम की महिमा गुणगान ही नहीं किया है, बल्कि एक दिन राम से पहरा हटने पर रामराज्य के लौटने का सपना भी देखा है।

    बस्ती के भानपुर में बेहद गरीब परिवार में जन्मे 57 साल के रहमान अली रिक्शा चलाकर जिंदगी गुजर-बसर करते करते है। संत कबीर की तरह ही बेहद कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद रहमान की कविताएं पढ़कर लोग आश्‍चर्यचकित रह जाते हैं। रहमान के कविता की कुछ पंक्तियां हैं...

    'मचा है घर घर में कोहराम, न जाने कब आओगे राम।
    दर्शन को अब पड़ गए लाले, कैद किए तुम्हें पहरा वाले।
    क्यों इतने कमजोर पड़े हो, कुछ तो बोलो अभिराम।

    अपनी कविताओं को सुनाते हुए रहमान अक्‍सर कहीं खो से जाते हैं। ऐसा लगता है मानो वह राम के ध्‍यान में कहीं ओर बह गए हैं। राम पर कविताएं लिखने पर रहमान का कहना है कि भगवान राम ने तो खुद कहा है कि 'मम प्रिय सब मम उपजाए' यानी सभी मनुष्य मेरी ही संतान हैं। इसलिए मुझे सभी समान रूप से प्रिय है।

    रहमान का कहना है कि जब राम पहरे से मुक्त होंगे, तभी रामराज्य का सपना पूरा होगा। जिसमें सभी लोग आपस में प्रेम से रहकर परंपराओं के अनुसार अपने धर्म का पालन करेंगे। उनके मुताबिक, इसी भावना के कारण वह राम पर कविताएं लिखने के लिए प्रेरित हुए।

    18 साल तक उन्होंने कानपुर में रिक्शा चलाया और आज भी वह बस्ती में रिक्शा चलाकर ही अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। रहमान ने बताया कि अब तक उनकी 6 किताबें प्रकाशित हो चुकी है, जिसमें 'कुछ कविताएं' और 'भगवान राम का प्यारा हूं' काफी भी लोकप्रिय रही हैं। हाल ही में रहमान का नया काव्य संग्रह 'बोल उठा हिन्दुस्तान' भी प्रकाशित हुआ है।

    रहमान व्यंग्य और कविताओं के अलावा सवैया छंद, युगल गीत और मुक्तक भी लिखते हैं। उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2004 में राष्ट्रपति ने इनके पास शुभ कामना पत्र भी भेजा था। वहीं, 2007 में पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने रहमान की कृतियों के लिए उन्हें सम्मानित किया था। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर अपनी कविताओं के लिए रहमान दर्जनों इनाम भी हासिल कर चुके हैं।

     

    आप hindi.news18.com की खबरें पढ़ने के लिए हमें फेसबुक और टि्वटर पर फॉलो कर सकते हैं.

    आपके शहर से (बस्ती)

    बस्ती
    बस्ती

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर