अब दुनिया में भदोही के साथ बजेगा कश्‍मीर का डंका, मोदी सरकार ने दूरी की सबसे बड़ी बाधा

Carpet Business, Jammu and Kashmir- यूपी के भदोही और जम्मू कश्मीर का जो कालीन उद्योग है उसे अपने क्षेत्रों की बड़ी सांस्कृतिक विरासत माना जाता है. आर्टिकल 370 और 35A के हटने से रिश्‍ता मजबूत होगा.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 8, 2019, 6:28 PM IST
अब दुनिया में भदोही के साथ बजेगा कश्‍मीर का डंका, मोदी सरकार ने दूरी की सबसे बड़ी बाधा
भदोही की कालीन का दबदबा पूरी दुनिया में है. (फोटो-पीटीआई)
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Updated: August 8, 2019, 6:28 PM IST
वैश्विक स्तर पर भारतीय कालीन उद्योग की अलग पहचान है, खासकर उत्तर प्रदेश के भदोही-मिर्जापुर क्षेत्र और कश्मीर की निर्मित खूबसूरत कालीनों की बात ही कुछ और है. जबकि मोदी सरकार (Modi Government) के साहसिक कदम के बाद जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने और धारा 370 व 35A खत्म होने से कश्मीर से कालीन निर्यात में आने वाले सालों में 200 फीसदी का इजाफा होने की संभावना है. साथ ही जब भदोही की तकनीक कश्मीर ट्रांसफर होगी, तो उससे वहां का कारोबार बढ़ना तय है. यही नहीं इससे वहां (कश्‍मीर) बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन भी होगा.

भदोही और जम्मू कश्मीर की विरासत है कालीन
यूपी के भदोही और जम्मू कश्मीर का जो कालीन उद्योग है उसे अपने क्षेत्रों की बड़ी सांस्कृतिक विरासत माना जाता है. काफी सालों से इन क्षेत्रों से अलग-अलग वैरायटी की कालीन का निर्माण होता आया है. समय से कदम मिलाकर चलने की वजह से भदोही के कालीन उद्योग ने विदेशी बाजारों पर ऐसा कब्जा जमाया कि 6 हजार करोड़ से ज्यादा का एक्सपोर्ट अकेले भदोही परिक्षेत्र से होता है, लेकिन कश्मीर का कालीन उद्योग समय से कदम नहीं मिला पाया और इसकी बड़ी वजह धारा 370 का होना माना जाता रहा है.

जानकारों के अनुसार देश के कालीन निर्यात में कश्मीर की सिर्फ 5 फीसदी के करीब भागीदारी है. जबकि पूरे देश से सालाना 10 हजार करोड़ से ज्यादा का कालीन एक्सपोर्ट होता है.


कश्‍मीर को होगा ये बड़ा फायदा
बहरहाल, अब कश्मीर के बुनकरों और वहां के उद्योग को बड़ा लाभ होने की उम्मीद है, क्योंकि जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनने से यूपी समेत कई राज्यों के कालीन के कारोबारी अब कश्मीर जा सकेंगे. इससे ना सिर्फ वहां का उद्योग बढ़ेगा बल्कि बुनकरों को रोजगार मिलेगा.

6 हजार करोड़ से ज्यादा का एक्सपोर्ट अकेले भदोही परिक्षेत्र से होता है.

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कालीन कारोबारी दिलीप कुमार गुप्‍ता और जाबिर अंसारी का कहना है कि अब वह वहां जमीन खरीदकर अपने दफ्तर के साथ लूम भी स्थापित कर सकते हैं, जिससे अन्य राज्यों की तरह भदोही और जम्मू कश्मीर का कालीन कारोबार एक हो जायेगा.

 

कश्‍मीर से मजबूत होगा भदोही का रिश्‍ता
कश्मीर से 370 हटने की वजह से भदोही से रिश्ता और मजबूत होगा. उद्योग की तकनीक ट्रांसफर होने से अधिक लाभ जम्मू-कश्मीर को मिलेगा, क्‍योंकि भदोही से अच्छी क्वालिटी की कालीन कश्मीर में बनती है, जिस वजह से वहां के बुनकर आसानी से भदोही की कालीन का निर्माण सीख सकते हैं. कश्मीर में सिल्क की कालीन का निर्माण होता है तो भदोही परिक्षेत्र में उलेन और कॉटन से कालीन का निर्माण किया जाता है.

भारतीय कालीन प्रौधोगिकी संस्थान (भदोही) के डायरेक्‍टर अलोक कुमार का मानना है कि अगर दोनों इलाकों के लोगों को ट्रेनिंग दी जाये तो तकनीक ट्रांसफर होगी, जिससे कश्मीर में भदोही की तकनीक पहुंचने से वहां के लोगों को ज्यादा लाभ मिलेगा. जबकि भदोही के कारोबारी भी सिल्क की कालीन का निर्माण कर सकते हैं.

(रिपोर्ट-दिनेश पटेल)

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First published: August 8, 2019, 5:43 PM IST
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