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भदोही लोकसभा सीट: ‘बीएसपी’ बनाम बीएसपी की लड़ाई को त्रिकोणीय बना पाएगी कांग्रेस?

भदोही लोकसभा सीट: ‘बीएसपी’ बनाम बीएसपी की लड़ाई को त्रिकोणीय बना पाएगी कांग्रेस?

file photo

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वाराणसी के नजदीक भदोही लोकसभा क्षेत्र कई वजह से प्रख्यात है. मनमोहक कालीन निर्माण और हस्तकला यहां की खासियत है.

    वाराणसी के नजदीक भदोही लोकसभा क्षेत्र कई वजह से प्रख्यात है. मनमोहक कालीन निर्माण और हस्तकला यहां की खासियत है. देश ही नहीं, विदेश में भी भदोही की छाप है, बल्कि इस जगह को कालीन शहर के नाम से भी जाना जाता है. कालीन उद्योग के अलावा बनारसी साड़ी और लकड़ी के टोकरी बनाना भी अहम उद्योग है. गंगा, वरुण और मोर्वा यहां के आसपास की प्रमुख नदियां हैं. उत्तर में जौनपुर से, पूर्व में वाराणसी से, दक्षिण में मिर्जापुर से और पश्चिम में प्रयागराज से घिरा है यह क्षेत्र.

    बहुत पीछे न जाकर करीब सवा सौ साल पहले नजर डालें, तो पाएंगे कि 1911 में भदोही को महाराजा प्रभु नारायण सिंह ने अपनी रियासत बनारस में शामिल कर लिया था. 30 जून 1994 को उत्तर प्रदेश के 65वें जिले के रूप में भदोही ने राज्य के नक्शे पर अपनी पहचान बनाई. जिला बनने से पहले यह वाराणसी जिले का हिस्सा था.

    कौन हैं प्रत्याशी

    बीजेपी ने यहां से रमेश बिंद को खड़ा किया है. बिंद बीएसपी के टिकट पर तीन बार मझवां से विधायक रहे हैं. बीजेपी ने एक तरह से पिछड़ा कार्ड खेला है. यहां से बीएसपी ने रंगनाथ मिश्रा को खड़ा किया है. कांग्रेस ने बाहुबली नेता रमाकांत यादव को टिकट दिया है.

    रमेश बिंद


    बिंद समाज के बड़े नेता माने जाते हैं रमेश बिंद. मिर्जापुर क्षेत्र में बिंद समाज का अच्छा प्रभाव है. बिंद एक समय बीएसपी में थे. 2002 में मझवां से उन्होंने बीएसपी के टिकट पर ही चुनाव जीता था. इसी पार्टी के लिए वो तीन बार विधायक रहे. 2014 में उनकी पत्नी समुद्रा बिंद को बीएसपी ने मिर्जापुर लोकसभा सीट से उतारा था. लोकसभा चुनाव से पहले बिंद ने बीजेपी से जुड़ने का फैसला किया.

    भदोही लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा क्षेत्र (भदोही, ज्ञानपुर, औराई, प्रतापपुर और हंडिया) आते हैं. दो साल पहले हुए विधानसभा चुनाव के आधार पर देखा जाए तो किसी भी राजनीतिक दल की पकड़ मजबूत नहीं है. पांच विधानसभा क्षेत्रों में से तीन जगहों पर हार-जीत का अंतर 10 हजार से कम का रहा, जिसमें दो जगहों पर 3 हजार से भी कम है. प्रतापपुर में बहुजन समाज पार्टी, ज्ञानपुर में निषाद पार्टी, भदोही से भारतीय जनता पार्टी, हंडिया में बहुजन समाज पार्टी और औराई में भारतीय जनता पार्टी जीती थी.

    पिछले चुनाव का हाल

    भदोही संसदीय क्षेत्र से इस समय बीजेपी के वीरेंद्र सिंह मस्त सांसद हैं. 2014 में आम चुनाव से पहले बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था. वह चुनाव मोदी के नाम पर लड़ा गया, जिसमें बीजेपी को बंपर फायदा मिला. बीजेपी को 1,58,141 मतों के अंतर से बड़ी जीत मिली. इस चुनाव में भदोही से 14 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी, जिसमें वीरेंद्र सिंह ने बसपा के राकेश धर त्रिपाठी को हराकर संसद में पहुंचने में कामयाबी हासिल की. वीरेंद्र सिंह को चुनाव में 4,03,544 वोट मिले. राकेश धर त्रिपाठी को 2,45,505 मत मिले. कांग्रेस पांचवें स्थान पर खिसक गई. वीरेंद्र सिंह मस्त को इस बार बलिया से टिकट मिला है.

    रंगनाथ मिश्रा


    इससे पहले 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार गोरखनाथ ने जीत हासिल की थी. उन्होंने समाजवादी पार्टी के छोटेलाल को 12,963 मतों के अंतर से हराया था. उस समय कुल 13 लोग मैदान में थे. इस चुनाव में बीजेपी पांचवें स्थान पर रही थी और उसे महज 8.76 फीसदी मत मिले थे. कांग्रेस के सूर्यमणि त्रिपाठी तीसरे और अपना दल के रामरती चौथे स्थान पर रहे.

    सामाजिक समीकरण

    2011 की जनगणना के लिहाज से जिले में 53 फीसदी पुरुष और 47 फीसदी महिलाएं हैं. यहां पर हिंदुओं की 53 फीसदी और मुसलमानों की 45 फीसदी आबादी रहती है.

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    Tags: Bhadohi S24p78, BJP, BSP, Congress, Lok Sabha Election 2019, Uttar Pradesh Lok Sabha Constituencies Profile

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