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भदोही का यह शिक्षक 874 दिन से कर रहे वृक्षारोपण, पत्नी ने पलास्टिक पैकेट में लगाई नर्सरी

अंतरिक्ष में लंबे समय तक रखे गए बीजों से पौधे निकल आए हैं. यह एक बड़ी सफलता है.
अंतरिक्ष में लंबे समय तक रखे गए बीजों से पौधे निकल आए हैं. यह एक बड़ी सफलता है.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के एक शिक्षक पर्यावरण बचाने (Save Environment) को लेकर अनूठी पहल कर रहे हैं. जिले के एक सरकारी स्कूल में तैनात शिक्षक पिछले 874 दिनों से लगातार पौधरोपण (Plantation) कर रहे हैं.

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भदोही. उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के एक शिक्षक पर्यावरण बचाने (Save Environment) को लेकर अनूठी पहल कर रहे हैं. जिले के एक सरकारी स्कूल में तैनात शिक्षक पिछले 874 दिनों से लगातार पौधरोपण (Plantation) कर रहे हैं. पूर्व माध्यमिक विद्यालय सारीपुर में कार्यरत सहायक अध्यापक अशोक कुमार गुप्ता को पर्यावरण को बचाने की इस पहल के लिए उपराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. अशोक कुमार गुप्ता (Ashok Kumar Gupta) जहां कहीं भी होते हैं, वे वहीं पौधरोपण के कार्य को अंजाम देते हैं.

उपराष्ट्रपति के हाथों हो चुके हैं सम्मानित

उन्हें 5 सितंबर 2017 को शिक्षा खेल एवं समाज की बहुमूल्य सेवा के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू से मिला था. इसके उपरांत शिक्षक अशोक कुमार गुप्ता राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी से मिले थे, जहां पर राष्ट्रपति ने शिक्षक से कहा था कि यह पुरस्कार प्राप्त करने के बाद आपकी नैतिक जिम्मेदारी राष्ट्र के प्रति और ज्यादा बढ़ जाती है. इस कार्यक्रम से लौटने के बाद वह जब भदोही पहुंचे तो एक कार्यक्रम में तत्कालीन जिलाधिकारी विशाख जी ने उन्हें सम्मानित किया गया था. तत्कालीन जिलाधिकारी ने अशोक कुमार गुप्ता से कहा था कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में कुछ ऐसा करना चाहिए जिसका अनुसरण हर कोई करें.



ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियों से निपटने के लिए कर रहे हैं वृक्षारोपण
राष्ट्रपति और जिलाधिकारी की बात अशोक कुमार गुप्ता के मन में घर कर गई. उसके बाद कई दिनों तक विचार करने के बाद उन्हें यह लगा कि ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियों से पार पाने के लिए कुछ किया जाना चाहिए. इसके बाद उन्होंने पौधरोपण का कार्य अभियान के तौर पर लिया. यह अभियान अशोक कुमार गुप्ता को नई पहचान तो दे ही रहा है. इसके साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक बड़ा कदम है. अशोक कुमार गुप्ता ने कहा की 10 अक्टूबर 2017 से रोजाना वृक्षारोपण करने में लगे हुए है और अपनी अंतिम सांसों तक वृक्षारोपण ऐसे ही करते रहेंगे.

शिक्षक की पत्नी ने वृक्षारोपण के लिए घर में बनाई पौधों की नर्सरी

अशोक कुमार गुप्ता की पत्नी अमृता गुप्ता हाउसवाइफ हैं. पत्नी अमृता को जब पता लगा कि उनके पति रोजाना एक वृक्ष लगा रहे हैं तो उन्हें लगा कि ऐसे में वृक्षारोपण के लिए पौधे खरीदने में उनका काफी रुपया खर्च हो जाएगा तो उन्होंने अपने पति के इस अभियान में हाथ बढ़ाते हुए अपने घर में ही पौधों की नर्सरी लगा डाली और इस नर्सरी की सबसे खास बात यह है कि शिक्षक की पत्नी अमृता गुप्ता ने अपने पति से कहा कि वह जब भी घर आए तो घर आने के पहले सड़कों के आसपास या कहीं भी पॉलिथीन के पैकेट फेंके मिल जाए तो उनको उठा कर ले आएं. अमृता ने पॉलिथीन के पैकेट में पौधों की नर्सरी लगानी शुरू कर दी.

पॉलिथीन पैकेट में लगा डाली नर्सरी

आपको बता दें कि फेंके हुए प्लास्टिक के पैकेट में शिक्षक की पत्नी ने घर में नर्सरी लगाई हुई है और वह उस नर्सरी की रोजाना देखभाल करती है और उसी नर्सरी के पौधों से रोजाना अशोक कुमार गुप्ता जहां भी होते हैं एक पौधा जरूर लगाते हैं. अमृता गुप्ता ने बताया कि उनके पति ने छोटी बहुत छोटी शुरुवात की थी और आज वह 874 वृक्षारोपण कर चुके हैं किसी भी काम की शुरुआत छोटी हो सकती है लेकिन वह काम कितना बड़ा हो सकता है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है.

भदोही समेत देश के कई प्रांतो में किया पौधरोपण

अशोक कुमार गुप्ता के इस अनोखे अभियान में उनको कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है सबसे अधिक दिक्कत तब होती है जब वह भदोही से बाहर होते हैं लेकिन उसके बाद भी उनका यह अभियान रूकता नहीं है. उन्होंने बताया कि बंगाल, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तेलंगाना समेत जहां कहीं भी वे गए वहां पर उन्होंने अपने अभियान के तहत वृक्षारोपण किया है.

आम, पीपल, बरगद आदि के पेड़ लगा चुके हैं अशोक गुप्ता

उन्होंने आम, पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, आंवला, जामुन ,शीशम ,रातरानी, गुड़हल एवं बेल के वृक्षों का पौधरोपण अभी तक किया है. अशोक कुमार गुप्ता के प्रेरित होकर कई अन्य लोग भी वृक्षारोपण के अभियान से जुड़ने लगे हैं. उन्होंने बताया कि इस अभियान से जुड़ने वाले रोजाना तो नहीं लेकिन जब भी लोगों को समय मिलता है तो वे जरूर वृक्षारोपण करते हैं. अशोक कुमार गुप्ता कहते हैं कि वृक्षारोपण को लोगों को अपने कार्यो का एक हिस्सा समझना चाहिए क्योकि यह सबसे अधिक जरुरी है क्योंकि अगर वृक्ष नहीं रहेंगे तो जीवन भी नहीं रहेगा.

(भदोही से दिनेश पटेल की रिपोर्ट) 

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