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यौन शोषण में घिरे प्रोफेसर को छुट्टी पर भेजने के बाद BHU छात्रों का धरना समाप्त

अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठीं छात्राएं. (फाइल फोटो)

अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठीं छात्राएं. (फाइल फोटो)

अक्‍टूबर 2018 में बीएचयू (BHU) के जूलॉजी विभाग (Zoology Department) की छात्राओं को शैक्षणिक टूर पर पुणे ले जाया गया था. टूर से आने के बाद छात्राओं ने प्रोफेसर शैल कुमार चौबे पर अश्लील कमेंट का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत की थी.

  • News18Hindi
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    बीएचयू (BHU) में अश्लील हरकत के मामले में घिरे जंतु विज्ञान विभाग (Zoology Department) के प्रोफेसर शैल कुमार चौबे को बर्खास्त करने की मांग को लेकर धरने पर बैठी साइंस डिपार्टमेंट के छात्र-छात्राओं ने देर रात धरना समाप्त कर दिया है. बताया जाता है कि कुलपति से धरने पर बैठे छात्रों की कुछ मांगे मान ली हैं, जिसमें तय हुआ है कि एक बार फिर से आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जाएगी. इसी के साथ आरोपी प्रोफेसर को अगली सुनवाई तक के लिए निलंबित कर दिया गया है. कुलपति ने कहा है कि जांच कमेटियों में आगे से छात्रों के प्रतिनिधित्व को भी शामिल किया जाएगा. वहीं अनशन कर रहे छात्र-छात्राओं के ऊपर किसी भी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी, जिसका डर दिखाकर पूरी रात छात्रों को डराया जाता रहा है.

    गौरतलब है कि प्रोफेसर चौबे को फिर बहाल किए जाने के विरोध में शनिवार देर शाम बीएचयू (BHU) के गेट पर सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने धरना शुरू कर दिया था. प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राएं आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे थे. नारेबाजी करते हुए छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर प्रोफेसर को बचाने का आरोप लगाया. चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओपी राय ने छात्राओं को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन छात्र देर रात तक कुलपति को बुलाने पर अड़े रहे.

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    बीएचयू के कुलपति से धरने पर बैठे छात्रों की कुछ मांगे मान ली हैं


    धरने पर बैठी छात्राओं ने बताया कि पुणे टूर के दौरान प्रोफेसर चौबे ने छात्राओं की शारीरिक बनावट को लेकर अश्लील कमेंट करने के साथ अभद्रता भी की थी. इस मामले में दोषी पाए जाने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें बचाने का प्रयास कर रहा है, यह समझ से परे हैं. ऐसा तब हो रहा है जब धरना-प्रदर्शन करने के साथ ही लिखित शिकायत भी की गई थी.

    ये रहा पूरा मामला
    बता दें कि अक्तूबर 2018 में जूलॉजी विभाग की छात्राओं को शैक्षणिक टूर पर पुणे ले जाया गया था. टूर से आने के बाद छात्राओं ने प्रोफेसर चौबे पर अश्लील कमेंट का आरोप लगाते हुए शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से की थी. इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था और जांच चलने तक बाहर जाने पर रोक लगाई गई थी. जांच समिति गठित कर 25 अक्तूबर 2018 से 30 नवंबर 2018 तक मामले की जांच कराई गई.

    जांच में दोषी पाए गए थे प्रो. चौबे
    कमेटी ने छात्राओं के साथ ही विभागीय शिक्षकों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट कुलपति को सौंपी थी. रिपोर्ट में जांच समिति ने छात्राओं के आरोप को सही बताया था. जून 2019 को हुई कार्यपरिषद की बैठक में कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर को चेतावनी दी गई कि भविष्य में वह इस तरह के किसी भी टूर में नहीं जाएंगे. साथ ही भविष्य में उन्हें किसी तरह का कोई पद नहीं दिया जाएगा.

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