BSP-RLSP गठबंधन की ये भी है बड़ी वजह, यूपी में बड़ा फायदा लेने की तैयारी में मायावती

क्या बिहार के इस दांव से बसपा को यूपी में मिलेगा फायदा?  (File Photo)
क्या बिहार के इस दांव से बसपा को यूपी में मिलेगा फायदा? (File Photo)

जाति के एक तीर से यूपी-बिहार दोनों में सियासी समीकरण साधेंगी मायावती, लेकिन क्या वो इसमें सफल हो पाएंगी?

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 9:01 AM IST
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नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar assembly election-2020) में उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) से गठबंधन कर बसपा अध्यक्ष मायावती (Mayawati)  ने यूपी के भी समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश शुरू कर दी है. उनकी कोशिश है कि इस गठबंधन से न सिर्फ बिहार बल्कि उत्तर प्रदेश में भी फायदा लिया जाए. दरअसल, कुशवाहा और मौर्य समाज कभी बसपा का कोर वोटर हुआ करता था. उसका सियासी उत्थान बसपा (BSP- Bahujan Samaj Party) से जुड़ने के बाद शुरू हुआ. लेकिन बाद में यह वोटबैंक दूसरे दलों में शिफ्ट हो गया. जिससे बसपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा.

पिछले दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) के यूपी प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने यह आरोप लगाया था कि कुशवाहा और मौर्य समाज से डिप्टी सीएम होने के बावजूद यह समाज सरकार से नाराज हैं. क्योंकि केशव प्रसाद मौर्य की सुनवाई नहीं होती. इस बात की तस्दीक कुशवाहा समाज से जुड़े लोग भी करते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे में मायावती के सामने अब अपने पुराने वोटबैंक को साधने का अच्छा अवसर है.

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क्या उपेंद्र कुशवाहा के जरिए खुश किए जाएंगे यूपी के नाराज कुशवाहा! (File Photo)




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दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार कहते हैं कि मायावती ने बहुत दूरदर्शिता से बिहार में उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) से गठबंधन करके उन्हें सीएम फेस घोषित किया है. इसका फायदा बिहार में तो मिलेगा ही यूपी में भी होगा. यूपी के कुशवाहा और मौर्य समाज के लोग इससे खुश होंगे.



बसपा से क्यों नाराज हुए मौर्य-कुशवाहा?

यूपी में कभी कुशवाहा, मौर्य समाज का सबसे ज्यादा झुकाव बसपा की ओर हुआ करता था. मायावती कैबिनेट में बाबू सिंह कुशवाहा और स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेता हुआ करते थे. इस समाज को सबसे ज्यादा टिकट बसपा देती थी और सरकार में भागीदारी भी अच्छी होती थी. लेकिन 2012 में एनआरएचएम घोटाले में फंसने के बाद मायावती ने बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी से निकाल दिया. साल 2016 में विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष स्वामी  प्रसाद मौर्य ने खुद ही बसपा छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर लिया.

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इसके बाद बसपा से इस समाज की नाराजगी बढ़ गई. इसी बीच बीजेपी ने बड़ा दांव चलते हुए 2016 में ही मौर्य-कुशवाहा वोटबैंक को हासिल करने के लिए केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर समाज को अपने पाले में कर लिया.

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केशव प्रसाद मौर्य के चेहरे पर बीजेपी ने बसपा से तोड़ लिया मौर्य-कुशवाहा वोटबैंक (File Photo)


अब इसलिए है बसपा के लिए मौका? 

राजनीतिक विश्लेषक और मेरठ यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सतीश प्रकाश कहते हैं कि केशव प्रसाद मौर्य का कद बड़ा करने के बाद इस समाज को लगा कि केशव ही सीएम बनेंगे. इसलिए इसका ज्यादातर वोट बसपा से शिफ्ट होकर भाजपा में चला गया. लेकिन केशव प्रसाद मौर्य सीएम नहीं बने. उन्हें डिप्टी सीएम का पद दिया गया और अब कहा जा रहा है कि उनकी कोई सुनवाई भी नहीं है.

ऐसे में बिहार के गठबंधन का यूपी के चुनाव में प्रभाव पड़ेगा. उपेंद्र कुशवाहा मौर्य, कुशवाहा समाज के बड़े नेता हैं. उनके जरिए यूपी का नाराज कुशवाहा वोटर बसपा की तरफ आ सकता है. इसीलिए मायावती का बिहार में आरएलएसपी से गठबंधन करने का दांव उनके पुराने वोटरों को रिझाने की कोशिश बताया जा रहा है.
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