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बिजनौर CAA हिंसा: 48 आरोपियों को मिली जमानत, पुलिस नहीं पेश कर पाई एक भी साक्ष्य
Bijnor News in Hindi

SHAKEEL AHMED | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 30, 2020, 1:28 PM IST
बिजनौर CAA हिंसा: 48 आरोपियों को मिली जमानत, पुलिस नहीं पेश कर पाई एक भी साक्ष्य
जिला एवं सत्र न्यायालय बिजनौर से 48 आरोपियों को मिली जमानत

बता दें 20 दिसंबर को जुमे की नमाज़ के बाद सीएए के विरोध में मुस्लिम समाज के लोगों ने जुलूस की शक्ल में विरोध प्रदर्शन किया था. जिसमें पथराव व कुछ इलाकों में आगजनी भी की गई थी.

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बिजनौर. पिछले साल 20 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में बिजनौर (Bijnor) शहर में हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार (Arrest) कर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा था. लेकिन गुरुवार को बिजनौर कोर्ट में पुलिस (Police) आरोपियों के खिलाफ पुख़्ता सबूत पेश नहीं कर पाई. जिसके बाद एडीजे प्रथम जज ने जेल में बंद 48 आरोपियों की जमानत मंजूर करते हुए रिहाई के आदेश दिए हैं.

बता दें 20 दिसंबर को जुमे की नमाज़ के बाद सीएए के विरोध में मुस्लिम समाज के लोगों ने जुलूस की शक्ल में विरोध प्रदर्शन किया था. जिसमें पथराव व कुछ इलाकों में आगजनी भी की गई थी. बिजनौर के नजीबाबाद, नहटौर, धामपुर, नगीना में बवाल हुआ था. उसी दिन पुलिस ने कई लोगों को गिरफ़्तार कर धारा 307 सहित कई संगीन धाराओं में 100 से ज्यदाव लोगों को उपद्रव व बवाल करने के आरोप में जेल भेजा था.

पुलिस एक भी पुख्ता सबूत नहीं कर पाई पेश

जेल भेजे गए आरोपियों की तरफ से बिजनौर के तेज तर्रार वकील अहमद ज़कावत ने मुकदमे की पैरवी की. आज जमानत पर हुई सुनवाई के दौरान एडीजे प्रथम जज संजीव पांडेय ने 48 आरोपियों को इस आधार पर जमानत मंजूर कर ली, क्योंकि पुलिस कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई. जमानत के बाद अब जेल में बंद 48 आरोपियों की जेल से जल्द रिहाई होने की उम्मीद है.

वकील ने बताया- सभी आरोप बेबुनियाद

अहमद ज़कावत ने बताया कि 79 लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई थी और 84 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. सभी 79 मामले में अलग-अलग डेट लगी हुई थी. 28 जनवरी को 48 लोगों की जमानत की अर्जी लगी हुई थी और उसी दिन सभी की जमानत हो गई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि जो भी एफआईआर में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया. किसी के पास से ऐसी रिकवरी नहीं हो सकी जिससे साबित हो सके कि हिंसा हुई थी. 307 के तहत केस दर्ज किया गया था तो हथिया की रिकवरी दिखानी थी. जो पुलिस नहीं कर पाई. अभियोजन पक्ष यह सिद्ध नहीं कर पाया कि वहां कोई उग्र प्रदर्शन हुआ.

बीटेक स्टूडेंट का एक साल हुआ ख़राबबता दें 20 दिसंबर को जुमे की नमाज़ के बाद पकडा गया अनस बीटेक थर्ड ईयर का छात्र था. जिसका उस दौरान एग्जाम चल रहा था. जेल जाने के बाद गरीब परिवार के बेटे का एक साल खराब हो गया. पीड़ित पिता मोहम्मद नाज़िर की माने तो उनका बेटा बेकसूर था. बिजनौर पुलिस ने इतनी ज़्यादती की उसके हाथ पैर तोड़ डाले और धारा 307 लगा दी. इनकी मांग है बेकसूर बेटे को फंसाने वाली पुलिस के खिलाफ कानूनी कार्यवई होनी चाहिए.

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First published: January 30, 2020, 1:25 PM IST
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