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Ground Report: पश्चिमी यूपी में जातियों के 'जंजाल' को तोड़ने के लिए बीजेपी ने चला है ये 'ब्रह्मास्त्र'
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News18 Uttar Pradesh
Updated: April 4, 2019, 12:47 PM IST
Ground Report: पश्चिमी यूपी में जातियों के 'जंजाल' को तोड़ने के लिए बीजेपी ने चला है ये 'ब्रह्मास्त्र'
11 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 8 प्रमुख सीटों पर भी वोटिंग होगी. बीजेपी को यहां पिछली बार के मुकाबले कड़ी चुनौती मिल रही है.

11 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 8 प्रमुख सीटों पर भी वोटिंग होगी. बीजेपी को यहां पिछली बार के मुकाबले कड़ी चुनौती मिल रही है.

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सुमित पांडे

मयंक मयूर के मोबाइल पर एक अन-रजिस्टर्ड नंबर से कॉल आता है. कॉल पर बात करने के बाद वे बताते हैं, 'नजीबाबाद में कोई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में शामिल होना चाहता है. मैं इसी सिलसिले में उन्हें थोड़ा गाइड कर रहा था.'

मयंक मयूर तीन दशक से ज्यादा से बिजनौर जिले में संघ के प्रमुख पदाधिकारी हैं. चाय पर चर्चा करते हुए मयूर बताते हैं कि यह चुनाव देश को मजबूत बनाने के लिए है. वे कहते हैं, 'कोई यह नहीं कह सकता कि किसी के साथ भेदभाव हुआ है. बिजनौर की जनसांख्यिकी ऐसी है कि यहां पर किसी भी सरकार की योजना का सबसे ज्यादा लाभ अल्पसंख्यकों को ही मिलता है.'

दूसरे छोर पर एक मोहल्ले में बीजेपी कार्यकर्ता पार्टी उम्मीदवार और सांसद भारतेंद्र सिंह के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं. यहीं पर हिमांशु नाम का एक कार्यकर्ता वोटर के साथ फोटो क्लिक कर रहा है. इसके साथ ही वो कहता है, 'मोदी जी को वोट दीजिए.'



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वोटर के साथ ली गई फोटो को तुरंत लोकसभा क्षेत्र के आईटी सेल ऑफिस में भेजा जाता है. नाम न छापने की शर्त पर बीजेपी के कैंपेन मैनेजर कहते हैं, 'ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि नजर रखी जा सके कि कौन कहां जा रहा है? इसके साथ ही कैडर को मोटिवेट किया जाता है ताकि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिल सकें.'

पहले चरण में उत्तर प्रदेश की जिन 8 सीटों पर मतदान होना है, उनमें से ज्यादातर सीटिंग एमपी को ही बीजेपी ने टिकट दिया है. सिर्फ कैराना की उम्मीदवार मृगांका सिंह को बदला गया है. मृगांका को पिछले साल हुए उपचुनाव में हार मिली थी.

सीटिंग एमपी को टिकट देने के मामले पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक बीजेपी नेता बताते हैं, 'हो सकता है कि पार्टी के नेताओं ने विशेष कारणों से ये फैसला लिया हो.' सीटिंग एमपी को टिकट देने का फैसला पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिसमें बीजेपी प्रेसिडेंशियल स्टाइल में कैंपेन करती है. हाल के चुनावों में इसका उदाहरण भी देखने को मिला है. इसमें शीर्ष नेतृत्व महत्वपूर्ण होता है न कि उम्मीदवार.

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जातीय गणित परंपरागत तौर पर बीजेपी के लिए अनुकूल रहा है. पार्टी के बड़े नेता रहे कल्याण सिंह का इस क्षेत्र में मजबूत समर्थक वर्ग रहा. बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यकों के होने से यह क्षेत्र सांप्रदायिक तौर पर संवेदनशील और ध्रुवीकरण वाला है.



हालांकि हाल के पांच वर्षों में बीजेपी के बड़े नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बजाए पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से सांसद हैं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इलाहाबाद से संबंध रखते हैं.

2014 के चुनाव में राज्य में शानदार प्रदर्शन करने वाली बीजेपी को इस बार एसपी, बीएसपी और चौधरी अजीत सिंह की पार्टी आरएलडी से मजबूत चुनौती मिल रही है.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लगे बागपत से सत्यपाल सिंह बीजेपी के उम्मीदवार हैं. पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर के खिलाफ पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण के पोते जयंत चौधरी मैदान में हैं. आरएलडी के जयंत चौधरी एसपी-बीएसपी गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार हैं. दोबारा जीत के लिए जोर लगा रहे सत्यपाल सिंह का कैंपेन सिर्फ एक मुद्दे पर है और वो है प्रधानमंत्री मोदी और उनकी लीडरशिप.

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सीटिंग एमपी को सुनने के लिए जमा हुआ गांव वालों से सत्यपाल सिंह कहते हैं, 'जब मैं गांव की तरफ आ रहा था, तब मैंने दीवार पर एक विज्ञापन देखा. उस पर लिखा था, सुरक्षा की गारंटी. मोदी और बीजेपी को वोट देने का मतलब हुआ- सुरक्षा की गारंटी.'

वहीं पास के मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के संजीव बालियान आरएलडी प्रमुख अजीत सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं. क्षेत्र के गांव में कैंपेन करते हुए बालियान कहते हैं, 'मोदी को हराने के लिए सभी चोर इकट्ठा हो गए हैं.' इस इलाके में प्रचार के दौरान शायद ही आप देखें कि बीजेपी के सांसद केंद्र और राज्य सरकार के प्रदर्शन पर वोट मांग रहे हों.

खतौली में कैंपेन करते हुए जयंत चौधरी एक गांव में जाते हैं. इस गांव में मुस्लिम और जाट की मिश्रित आबादी है. 2014 लोकसभा चुनाव से पहले आपस में बंटे ये दोनों अब साथ आ गए हैं.

प्रचार के दौरान जयंत चौधरी कहते हैं, 'वे आपको भटकाने की कोशिश करेंगे, वे कहेंगे कि यह चुनाव बड़े मुद्दों पर है. यह प्रधानमंत्री चुनने के लिए है. क्या पंचायत से लेकर संसद तक चुने हुए लोगों की कोई जिम्मेदारी नहीं है?'

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यूपी की राजनीति में कांग्रेस के डाउनफॉल के बाद ऊंची जाति के वोट भी बीजेपी के पक्ष में जाने लगे हैं. हालांकि कम आबादी वाली पिछड़ी जातियों के वोट बीजेपी के लिए काफी फायदा पहुंचाने वाले साबित हुए हैं. यादव और जाटव के मुकाबले ये कम संख्या में हैं लेकिन ये एक साथ मिलकर पूरे वोटर्स के पांचवे हिस्से के बराबर हैं.



इनमें धीमर, पाल, नाई, सैनी और कश्यप जैसी जातियां हैं. कैराना लोकसभा क्षेत्र में कश्यप जाति का प्रभाव है. वहीं सहारनपुर में 5 प्रतिशत सैनी वोटर्स हैं.

बिजनौर टाइम्स के संपादक सूर्यमणि रघुवंशी बताते हैं, 'बिजनौर में छोटे समुदाय जैसे कि पाल और धीमर पर बीजेपी का प्रभाव है. हाल के जातीय गणित को देखते हुए लगता है कि वे बीजेपी के साथ जा सकते हैं.'

11 अप्रैल को जिन 8 सीटों पर मतदान होना है, उनमें से 6 पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं. बीजेपी को उम्मीद है कि वोट का बंटवारा होगा और इसका लाभ पार्टी को मिल सकता है. सहारनपुर और बिजनौर से कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद और नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है.

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बीएसपी सुप्रीमो मायावती के खास रहे सिद्दीकी को बिजनौर में रणनीति के तौर पर बीजेपी ने मुख्य विपक्षी बना दिया है. उन्हें उम्मीद है कि इससे मुस्लिम वोट में बंटवारा होगा. बिजनौर के बीजेपी नेता विकास अग्रवाल कहते हैं, 'लड़ाई नसीमुद्दीन से ही होगी आप देखना.'

उत्तर प्रदेश में बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी, उनके नेतृत्व, ओबीसी वोट में लामबंदी, अल्पसंख्यक वोट में बंटवारा और भारत को मजबूत बनाने ((Make India Strong)) के भरोस पर लड़ाई लड़ रही है.

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First published: April 4, 2019, 12:16 PM IST
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