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bjp largest party in legislative council in uttar pradesh going to create history

उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सबसे बड़ा दल बनकर इतिहास रचने जा रही भाजपा

बीजेपी हर कामयाबी की बुलंदियां छू रही है.

बीजेपी हर कामयाबी की बुलंदियां छू रही है.

भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भी सबसे बड़ा दल बनकर इतिहास रचने जा रही है. विधान परिषद में प्रचंड बहुमत के बाद योगी सरकार को किसी भी विधयेक को विधानसभा में पारित करवाने में कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी.

ममता त्रिपाठी

नई दिल्‍ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का स्वर्णिम काल चल रहा है. चार राज्यों के विधानसभा चुनाव जीतने के साथ ही पार्टी ने राज्यसभा में भी तीन दशकों बाद शतक लगाया. अब भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भी सबसे बड़ा दल बनकर इतिहास रचने जा रही है. विधान परिषद में प्रचंड बहुमत के बाद योगी सरकार को किसी भी विधयेक को विधानसभा में पारित करवाने में कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी. हालांकि भाजपा अभी भी 35 सदस्यों के साथ विधान परिषद में सबसे बड़ा दल है. विधान परिषद की 36 सीटों पर विगत 9 अप्रैल को वोट पड़े हैं जिसमें से 9 सीटों पर तो भाजपा पहले ही निर्विरोध जीत हासिल कर चुकी है. बाकी बची 27 सीटों के लिए मतगणना 12 अप्रैल को होनी है.

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि स्थानीय निकाय प्राधिकार क्षेत्र के इस चुनाव में सत्ता पक्ष की ही जीत होती है. 2004 में मुलायम सिंह यादव जब मुख्यमंत्री थे तब सपा 36 में से 24 सीटों पर जीती थी. इसके बाद 2010 में मायावती के शासनकाल में बसपा ने 36 में से 34 सीटों पर कब्जा किया था. अखिलेश के समय भी कुछ नहीं बदला था, 2016 में अखिलेश की समाजवादी पार्टी ने भी 36 में से 31 सीटें जीती थीं.
2022 के विधानसभा चुनावों में 274 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत में आई भाजपा ने 9 सीटें तो बिना लड़े ही अपने पाले में कर ली हैं. सियासी जानकारों का मानना है कि दो सीटों को छोड़कर जहां कांटे की टक्कर मानी जा रही है, वहीं, इस चुनाव में 34 सीटें भाजपा के खाते में जाती हुई दिखाई दे रही हैं.

गौरतलब है कि 2017 में जब योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, उस वक्त समाजवादी पार्टी विधान परिषद में सबसे बड़ा दल हुआ करती थी मगर उसके बाद जैसे-जैसे चुनाव होते गए भाजपा आगे निकलती रही. कई बार तो कार्यकाल पूरा होने के कारण तो कभी सपा के सदस्यों के इस्तीफा देने की वजह से विधान परिषद में सीटें खाली होती रहीं जिस पर भाजपा जीतती गई. जानकारों ने बताया कि 1990 से पहले कांग्रेस विधान सभा के दोनों सदनों में सबसे बड़ी पार्टी हुआ करती थी.

आपको बता दें कि विधान परिषद में 38 सीटें निर्वाचन क्षेत्र की हैं, 36 सीटें स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र की जबकि 8 सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आती हैं. इतनी ही सीटें यानि 8 स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की और 10 सीटों पर राज्यपाल मनोनीत करते हैं. अप्रैल और मई में राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए गए 6 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है. मधुकर जेटली, बलवंत सिंह, जाहिद हुसैन, राजपाल कश्यप, संजय लाठर और अरविंद सिंह ये सब समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य हैं जिनका कार्यकाल अप्रैल-मई में खत्म हो रहा है. जाहिर सी बात है अब इन 6 सीटों पर भाजपा के सदस्य ही मनोनीत किए जाएंगे. संजय लाठर को अखिलेश यादव ने विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाया है तो ऐसे में पार्टी लाठर को एक बार और विधान परिषद भेज सकती है.

Tags: BJP, CM Yogi Aditya Nath, उत्तर प्रदेश

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