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बीजेपी में ओम प्रकाश राजभर की भरपाई करेंगे ये तीन नेता, पहले से तैयार था प्लान!

बीजेपी के तीन बड़े राजभर नेता: हरिनारायण, अनिल और सकलदीप राजभर

बीजेपी के तीन बड़े राजभर नेता: हरिनारायण, अनिल और सकलदीप राजभर

बीजेपी के तरकश में तीन राजभर तीर: होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर, घोसी से लोकसभा प्रत्याशी हरि नारायण राजभर और राज्यसभा सांसद सकलदीप राजभर

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सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के नेता ओम प्रकाश राजभर की यूपी कैबिनेट से विदाई के साथ ही यह सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि आखिर 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी इस जाति की भरपाई कैसे करेगी. दरअसल, बीजेपी ने ओम प्रकाश राजभर के बगावती तेवर को देखते हुए पहले से ही डैमेज कंट्रोल के लिए प्लान बी तैयार कर रखा था. यूपी में बीजेपी के पास तीन बड़े राजभर नेता हैं, जिनके जरिए पूर्वांचल के इस वोटबैंक को साधने की कोशिश होगी.

ओम प्रकाश राजभर खुद को यूपी में राजभर समाज के बीच अकेले नेता के तौर पर खुद को पेश करते रहे. साथ में बीजेपी में रहते हुए उसे आंख भी दिखाते रहे. ऐसे में बीजेपी ने इस समाज के अपने नेताओं को भी तवज्जो देकर आगे लाना शुरू किया. अनिल राजभर को होमगार्ड राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया. घोसी से सांसद हरि नारायण राजभर को इस बार फिर से टिकट दिया. यही नहीं बलिया के रहने वाले आरएसएस कार्यकर्ता सकलदीप राजभर को राज्यसभा भेजा. (ये भी पढ़ें: योगी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर को गुस्सा क्यों आता है?)

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मकसद था गाजीपुर, मऊ, घोसी, बलिया, अंडेकरनगर, इलाहाबाद, वाराणसी और चंदौली में 10 फीसदी राजभर आबादी को साधने का. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अब इन्हीं तीन नेताओं के जरिए बीजेपी इस समाज को साधने साधेगी. दिसंबर 2018 में बीजेपी सरकार ने महाराज सुहेलदेव के नाम पर डाक टिकट जारी किया. इस कार्यक्रम में खुद पीएम नरेंद्र मोदी गाजीपुर पहुंचे थे. ओम प्रकाश राजभर ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया था. मतलब साफ है कि बीजेपी ने एसबीएसपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश पहले से ही शुरू कर दी थी.
यही नहीं 24 फरवरी 2016 को बहराइच जिले में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 11वीं सदी के राजा सुहेलदेव की एक प्रतिमा का अनावरण किया था. मकसद था पूर्वांचल की करीब सौ विधानसभा सीटों पर आबादी वाले इस वोटबैंक को साधने का.

इस बीच ओम प्रकाश राजभर को बर्खास्त करने के बाद योगी सरकार ने अनिल राजभर को उनके सभी पद देकर कद बढ़ा दिया है. मतलब अब उन्हें पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रालय भी मिल गया है. उधर, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर पिछड़ों के नहीं परिवार के नेता हैं. बीजेपी के कारण विधायक और मंत्री बने. परंतु उन्होंने पिछड़ों के हक की लड़ाई के नाम पर शुद्ध रूप से नाटक किया. पूरा पिछड़ा वर्ग बीजेपी और नरेंद्र मोदी के साथ था है और रहेगा. जबकि, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि योगी सरकार राजभर समाज की भलाई के काम कर रही है. पार्टी राजभर समाज के साथ खड़ी है.

मालूम हो कि लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे पर सहमति न बनने के बाद ओम प्रकाश ने 13 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था और बीजेपी के खिलाफ 39 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी भी उतार दिए थे.

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वरिष्ठ पत्रकार टीपी शाही कहते हैं कि बीजेपी में किसी भी समाज के नेता की कमी नहीं है. तीन बड़े राजभर नेता हैं. जिनके जरिए वो इस समाज में पैठ बनाएगी. जहां तक बात ओम प्रकाश राजभर की है तो वो अपने समाज के ठेकेदार नहीं हो सकते. बीजेपी ने ओम प्रकाश राजभर की गतिविधियों को देखते हुए शायद पहले ही समझ लिया था कि उसे इस वोटबैंक पर पकड़ बनाने के लिए अपने नेता चाहिए.

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