BJP कार्यकर्ता लगवाना चाहते हैं अमीर खुसरो की मूर्ति, लेकिन इसलिए मालखाने में है कैद

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की इसी दरगाह परिसर में सूफी अमीर खुसरो का मजार है.
हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की इसी दरगाह परिसर में सूफी अमीर खुसरो का मजार है.

आज भी खुसरो की मूर्ति अपनी ही हवेली के परिसर में कैद है. बीजेपी (BJP) से जुड़े एक रसूखदार नेता मूर्ति को पटियाली (Patiyali) में लगाना चाहते हैं, लेकिन अधिकारी मूर्ति को तहसील के मालखाने से रिहा नहीं कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 16, 2020, 11:22 AM IST
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नई दिल्ली. सूफी गायकी के फनकार अमीर खुसरो (Amir Khusro) का जन्म दिवस मनाया जा रहा है. बेशक लॉकडाउन (Lockdown) के चलते लोग निजामुद्दीन (Nizamuddin) स्थित उनकी मज़ार पर नहीं जा पा रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया (Social Media) पर जरूर उन्हें याद कर रहे हैं. लेकिन वहीं उनके जन्मस्थान पटियाली (कासगंज, यूपी) में आज भी खुसरो की मूर्ति अपनी ही हवेली के परिसर में कैद है.

बीजेपी (BJP) से जुड़े एक रसूखदार नेता मूर्ति को पटियाली में लगाना चाहते हैं, लेकिन अधिकारी मूर्ति को तहसील के मालखाने से रिहा नहीं कर रहे हैं. नतीजा कई साल से मूर्ति मालखाने में रखी है. पटियाली (Patiyali) वालों की मानें तो दो सियासी खेमों के चलते खुसरो की मूर्ति खुली हवा में सांस नहीं ले पा रही है. वैसे पटियाली में खुसरो के नाम से स्कूल, लाइब्रेरी और एक पार्क भी है.

खुसरो की मूर्ति को लेकर यह है विवाद
2015 में पटियाली के ही रहने वाले कारोबारी श्याम सुंदर गुप्ता ने कुछ अन्य लोगों को साथ लेकर जयपुर, राजस्थान में ख़ुसरो की एक मूर्ति बनवाई. कस्बे में उनके नाम से बने पार्क में मूर्ति को लगाना तय हुआ.
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ऐसा कहा जाता है कि पटियाली तहसील अमीर खुसरो की हवेली की जगह पर ही बनी हुई है.




उस वक्त सूबे में सपा की सरकार थी. पटियाली के रहने वाले एडवोकेट अनवर अली उर्फ इशार मियां बताते हैं, “कस्बे के लोग मूर्ति लगवाना चाहते थे. लेकिन सियासत के चलते विवाद खड़ा हो गया. सत्ता पक्ष चाहता था कि मूर्ति उनके नाम से लगे. एक अन्य पार्टी के लोग कहते थे कि खुसरो की मूर्ति लगेगी तो हमारे धर्म से जुड़े महापुरुष की भी लगेगी. इस तरह वो मूर्ति पार्क या लाइब्रेरी में तो नहीं लगी, अलबत्ता तहसील के कोषागार में बंद कर दी गई. करीब 13-14 साल पहले यहां ख़ुसरो महोत्सव शुरू हुआ था, लेकिन वो भी बंद कर दिया गया. अब यदाकद होता रहता है.”

खुसरो की हवेली को लेकर भी उठने लगा विवाद
ख़ुसरो के जन्म स्थान को लेकर उठे विवाद पर भी अनवर अली बताते हैं, “जिस किले या हवेली के हिस्से में तहसील चल रही है ये राजा द्रौपद का किला हुआ करता था. इतिहास के दस्तावेज बताते हैं कि ख़ुसरो का जन्म इसी किले की चाहरदीवारी में हुआ था. लेकिन अफसोस की कुछ लोग इस पर भी सवाल खड़े करने लगे हैं.”

अब बीजेपी में हैं श्याम सुंदर गुप्ता, फिर कर रहे कोशिश
श्याम सुंदर गुप्ता अब बीजेपी में हैं. न्यूज18 हिंदी से बातचीत में उन्होंने बताया, “2015 में कुछ सियासी कारणों से मूर्ति नहीं लग पाई थी. हमने फिर से कोशिश शुरू की है. नवबंर 2019 में हम अधिकारियों से मिले थे. उन्होंने भरोसा दिया था कि मूर्ति को मालखाने से रिहा कर दिया जाएगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब लॉकडाउन के बाद हम फिर अधिकारियों से मिलने जाएंगे. हमारी इच्छा तो यह थी कि इस जन्म दिवस पर मूर्ति लगा देते, लेकिन कोरोना के चलते ऐसा हो नहीं पाया.”

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तहसील के इस हिस्से में बने मालखाने में बंद है अमीर खुसरो की मूर्ति.


मूर्ति मालखाने से कब निकलेगी और कब पार्क में लगेगी इस बारे में बोलने के लिए कोई भी अधिकारी तैयार नहीं होता है. जिसके पीछे की वजह मामले का सियासी होना है.

एक बार पटियाली में गाना चाहते हैं एआर रहमान
अनवर अली बताते हैं, मेरे एक दोस्त के जरिए संगीतकार एआर रहमान से बात हुई थी. उनकी ख्वाहिश थी कि मैं एक बार पटियाली में गाऊं. इसके लिए उन्होंने मुझसे कहा था कि आप जब भी कार्यक्रम करेंगे मैं आ जाऊंगा. जिस पर बड़े खर्च को देखते हुए हमने मना किया तो वो बोले कि यहां आने के लिए मैं कोई पैसा नहीं लूंगा. यहां गाकर तो मेरे संगीत का हज हो जाएगा. एक्टर सलमा आगा ने भी यहां आने की ख्वाहिश ज़ाहिर की थी. कवि नीरज के भी कुछ इसी तरह के खयाल थे.

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