मायावती ने नेता नहीं कलेक्शन एजेंट रखे हुए हैं, कांशीराम के साथी और बसपा के संस्थापक सदस्य का आरोप

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 28, 2019, 3:15 PM IST
मायावती ने नेता नहीं कलेक्शन एजेंट रखे हुए हैं, कांशीराम के साथी और बसपा के संस्थापक सदस्य का आरोप
बसपा के संस्थापक सदस्य रहे और कांशीराम के साथी राज बहादुर

बसपा के संस्थापक सदस्य रहे राज बहादुर ने कहा, मायावती ने कांशीराम का सपना कर दिया है ध्वस्त, वो अपने स्वार्थ से आगे नहीं बढ़तीं.

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राज बहादुर यूपी के उन चुनिंदा दलित नेताओं में से एक हैं जो बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी कम्युनिटीज एंप्लाई फेडरेशन (बामसेफ), दलित शोषित समाज संघर्ष समिति (डीएस-4) और बसपा तीनों के अहम पदों पर रहे हैं. वो कहते हैं कि मायावती ने कांशीराम का सपना तोड़ा नहीं बल्कि ध्वस्त कर दिया है. कांशीराम बहुजन के लिए काम करते थे और मायावती सिर्फ अपने निजी हित के लिए काम करती हैं. निजी हित की वजह से न उन्होंने किसी पर विश्वास किया और न उन पर किसी और ने. इसलिए अब वो पार्टी में अपने परिवार के सदस्यों आनंद कुमार और आकाश आनंद को आगे बढ़ा रही हैं. मायावती ने नेता नहीं कलेक्शन एजेंट रखे हुए हैं.

'जिसकी जितनी थैली भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी'
बसपा के संस्थापक सदस्य राज बहादुर ने न्यूज18 हिंदी से बातचीत में कहा कि, जब कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी तब इसका नारा था 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी', लेकिन जब से इसे मायावती ने टेकओवर किया है तब से इसका नारा हो गया है-'जिसकी जितनी थैली भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी'.

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वो कहते हैं कि मायावती सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए काम करती हैं. उनका बहुजनों से कोई लेना देना नहीं है. जिस नेता को पैसे लेकर वो टिकट देती हैं वो जीतने के बाद सबसे पहले अपनी भरपाई करता है. वो बहुजनों के लिए काम क्यों करेगा? बसपा पहले मिशन थी लेकिन अब वो बिजनेस कर रही है. उन्हें न कांशीराम के दोस्त चाहिए थे और न बामसेफ के साथी.

मायावती को किसी पर भरोसा नहीं
बहुजन समाज पार्टी की स्थापना के बाद से 1994 तक यूपी में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे राज बहादुर का कहना है कि मायावती ने पार्टी में कभी पिछड़ों को नजदीक रखा, कभी मुस्लिमों और कभी ब्राह्मणों को. लेकिन उन्होंने भरोसा किसी पर नहीं किया. इन समाजों के नेताओं ने भी मायावती पर भरोसा नहीं किया. नतीजा यह हुआ कि जब पार्टी लड़खड़ाई तो ये नेता साथ छोड़ गए. उनके नजदीक रहने वाले जो लोग बसपा सरकार में मंत्री थे वही भाजपा सरकार में भी मंत्री हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि आपने अपने निजी स्वार्थ में कांशीराम के सभी साथियों को बाहर कर दिया. मिशन वालों की जगह आपने कलेक्शन एजेंट बना दिए. अब जब कोई विश्वासपात्र रहा ही नहीं तो मायावती अपने परिवार को आगे बढ़ाना ज्यादा सुरक्षित समझ रही हैं.
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सपा के साथ गठबंधन तोड़ना ठीक नहीं
राज बहादुर इस समय कांग्रेस में हैं. कभी बसपा के सेेक्रेटरी जनरल रहे राज बहादुर कहते हैं कि मायावती ने सपा के साथ गठबंधन तोड़कर ठीक नहीं किया. वो कहते हैं कि मायावती ने हमेशा अपने निजी स्वार्थ में गठबंधन किया और तोड़ा है. साल 2014 में वो जीरो थीं. उनके सामने सर्वाइवल का सवाल था. इसलिए उन्होंने सपा से गठबंधन कर लिया. अब सीटें अधिक आ गईं तो तोड़ दिया. मैं तो कहता हूं कि यादवों का वोट मायावती को मिला है लेकिन मायावती दलितों का वोट ट्रांसफर नहीं करवा पाईं.

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First published: June 28, 2019, 9:51 AM IST
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