बुलंदशहर: 31 वर्षों से दो परिवारों के बीच चल रही दुश्‍मनी में 16 लोगों की मौत, जानें कैसे शुरू हुआ था विवाद

दोनों परिवारों के बीच 1990 में दुश्‍मनी शुरू हुई थी.

दोनों परिवारों के बीच 1990 में दुश्‍मनी शुरू हुई थी.

बुलंदशहर के थाना ककोड़ कोतवाली क्षेत्र के गांव धनोरा के कालीचरण और राजेंद्र सिंह के परिवार के बीच 1990 में होली (Holi)के दिन हुई दुश्‍मनी में अब तक 16 लोगों की जान जा चुकी है. हैरानी की बात है कि यह सिलसिला अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 1:58 PM IST
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बुलंदशहर. उत्‍तर प्रदेश के बुलंदशहर (Bulandshahar) के थाना ककोड़ कोतवाली क्षेत्र के गांव धनोरा में हाल ही में बदमाशों की अंधाधुंध फायरिंग से हड़कंप मच गया था. इस घटना में एक ही परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिन्‍हें ग्रेटर नोएडा के कैलाश अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था, जिसमें से एक की मौत हो गई है. इसके साथ दो परिवारों की रंजिश में पिछले 31 साल में अब तक 16 लोगों की जान जा चुकी है. यही नहीं, दोनों परिवारों के बीच यह दुश्‍मनी 1990 में होली (Holi)के दिन हुई और जब भी यह त्‍यौहार आता है, तो गांव के लोग सहम जाते हैं.

बता दें कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में थाना ककोड़ कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत गांव धनोरा में पुरानी रंजिश के चलते रविवार को एक परिवार के चार लोगों पर हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी. इस गोली कांड में चार लोग गंभीर रुप से घायल हो गए और इनको ग्रेटर नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया. यही नहीं, परिवार की सुरक्षा में तैनात गनर भी गोली लगने से घायल हुआ. इस घटना में धर्मपाल सिंह अभी अस्‍पताल में गंभीर हालत में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, तो उनके एक 32 साल के एक बेटे ने दम तोड़ दिया है. इससे मामले पर बुलंदशहर एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने कहा कि एक ही परिवार के लोगों पर हमला हुआ है. विगत कई सालों से पुरानी रंजिश चली आ रही है और आज अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर चार लोगों को घायल किया है. फिलहाल पुलिस की टीमें गठित कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किया जा रहा है.

31 साल पुरानी दुश्‍मनी में 16 का कत्‍ल और...

बुलंदशहर के ककोड़ कोतवाली क्षेत्र के गांव धनोरा के राजेंद्र सिंह और कालीचरण के बीच 1990 में होली के दिन किसी किसी बात को लेकर विवाद हुआ. यह विवाद इतना बढ़ा कि रंगों की होली खून की होली में बदल गई और दोनों पक्षों के बीच गोलीवारी में सात लोग ढेर हो गए. इस घटना में कालीचरण के परिवार से चार, तो राजेंद्र के परिवार के तीन लोगों की मौत हुई थी. हालांकि सबूतों के अभाव में कालीचरण के परिवार के लोग जमानत पर छूट गए और राजेंद्र सिंह के परिवार के पांच लोग आज भी जेल में बंद हैं. इस बात से राजेंद्र सिंह का परिवार और बौखला गया.
इसके बाद राजेंद्र के परिवार ने कालीचरण के परिवार के एक और सदस्‍य की हत्‍या कर दी. जबकि इस हत्या का बदला कालीचरण के परिवार ने 1998 में विरोधी खेमे के इंद्रपाल की हत्या कर लिया. इसके बाद 3 जनवरी 2005 को राजेंद्र सिंह के भाई जयप्रकाश की भी गोली मारकर हत्या कर दी. इसके बाद धर्मपाल की मां और उनके नौकर की हत्‍या हुई, तो दो साल बाद 2007 में अमित की मां और मामा का मर्डर हो गया, जिसका आरोप धर्मपाल के परिवार पर लगा. जिस वक्‍त राजेंद्र सिंह की पत्नी की हत्या हुई उस वक्‍त उनका नाबालिग बेटा अमित मौजूद था. इसके बाद कुछ साल तक दोनों परिवारों के बीच चल रही दुश्‍मनी लगा शांत हो रही है, तभी वो दिन आया जब राजेंद्र के बेटे अमित ने 2019 में कालीचरण के बड़े बेटे जगपाल की हत्या करवा दी. हालांकि वह पुलिस की तमाम दबिशों के बाद पकड़ा नहीं जा सका और पिछले साल उसने कालीचरण को मौत के घाट उतार दिया. इससे पहले अमित ने पिछले साल जून में संजीव प्रधान की हत्‍या कर दी थी, जो कि कालीचरण के परिवार के नजदीक था.फिलहाल अमित और उसके तीन साथी जेल में बंद हैं. जबकि हाल ही में कालीचरण के परिवार से एक और मौत हुई है. अब तक इस दुश्मनी में 16 लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं.12 हत्याएं बुलंदशहर में हुईं हैं, तो बाकी की चार दूसरे शहरों और राज्यों में करवाई गईं.
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