बुलंदशहरः इस गांव के 117 युवक हो चुके हैं शहीद, 90 फीसदी घरों से सेना में है एक सैनिक

आजादी से अब तक इस गांव के 117 लाल जाम-ए-शहादत पी चुके हैं जिसे इस गांव के लोग अपना सौभाग्य मानते हैं, जबकि देश पर जान-न्यौछावर करने की परंपरा आज भी जारी है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 14, 2018, 6:13 PM IST
News18 Uttar Pradesh
Updated: August 14, 2018, 6:13 PM IST
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक ऐसा गांव है जिसके 90 फीसदी घरों से एक न एक बेटा सेना में रहकर देश की सेवा कर रहा है. इस गांव के 117 लाल अब तक जाम-ए-शहादत पी चुके हैं जबकि गांव के बच्चे-बच्चे के सिर पर देश की सेवा का जुनून सवार है.

बुलंदशहर के इस गांव का नाम है सैदपुर. यह देश के लिए शहीद हुए जवानों के गांव के तौर पर जाना जाता है. 10 हज़ार की आबादी वाले इस गांव के हर घर से एक न एक बेटा फौज में भर्ती होकर अलग-अलग सीमाओं पर देश की रक्षा कर रहा है.

आजादी से अब तक इस गांव के 117 लाल जाम-ए-शहादत पी चुके हैं जिसे इस गांव के लोग अपना सौभाग्य मानते हैं, जबकि देश पर जान-न्यौछावर करने की परंपरा आज भी जारी है. आंकड़े बताते हैं कि इस गांव के 2 हज़ार से ज़्यादा लोग फौज में हैं.

अगर ग्रामीणों की मानें तो इस गांव में बच्चे के पैदा होने के पहले ही उसके माता-पिता उसे फौज में भर्ती कराने की ठान लेते हैं. इसके लिए बच्चे के माता-पिता उसे शुरू से ही क्रांतिकारियों के बलिदानों की गाथा सुनाते रहते हैं. तभी तो गांव के छोटे-छोटे बच्चों ने फौज में भर्ती होने की अभी से तैयारी शुरू कर दी है, ताकि अपनी उम्र में आने के बाद वे भी सरहदों पर जाकर देश की रक्षा कर सकें. इस समय सैदपुर गांव के 2 हजार से अधिक जवान अलग-अलग सरहदों पर देश की रक्षा कर रहे हैं.

(रिपोर्ट - सैय्यद अली शरर)

ये भी पढ़ें -

दलित एक्ट की तरह कानून बनाकर राम मंदिर निर्माण कराए सरकार: महंत सुरेश दास

CM योगी के शहर में शहीद परिजनों का छलका दर्द, बोले- सरकार भूल गई अपना वादा

RTI में हुआ खुलासा: 11 अगस्त की रात बीआरडी मेडिकल कॉलेज में थी ऑक्सीजन की कमी
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर