युवाओं के आदर्श थे शहीद कर्नल आशुतोष, पत्र लिखकर करते थे सेना में भर्ती होने को प्रेरित

शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा. (फाइल फोटो)

शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा. (फाइल फोटो)

2001 से 2003 के बीच कई खत कर्नल आशुतोष शर्मा ने अमित को लिखें. एक खत में वे लिखते हैं कि सेना की वर्दी पहन कर उन्हे बहुत गर्व होता है, जब भीड़ में निकलते हैं तो से सेना की वर्दी पहने उसकी शान अलग ही होती है, सेना में आना कितने सम्मान की बात है.

  • Share this:
श्रीनगर. कश्मीर के हंदवाड़ा (Handwara) में शहीद हुए कर्नल आशुतोष शर्मा (Martyr Colonel Ashutosh Sharma) देश की मिट्टी के लाल तो थे ही, कुछ लोगों के लिए आदर्श भी थे. दरअसल, उन्होंने कई लोगों को लगातार जीवन में अच्छा बनने के लिए प्रेरित किया. यह बात 2001 से 2003 के बीच की है, जब कर्नल आशुतोष उन युवाओं को चिट्ठी भी लिखा करते थे, जिसमें उन्होंने सेना में शामिल होने के लिए उनको प्रेरित भी किया है. साथ ही सेना के गौरव को भी बयान किया है.

'सेना की वर्दी पहन कर गर्व होता है'

अमित भी उन युवाओं में से एक हैं जो फिलहाल गाजियाबाद (Ghaziabad) वैशाली में रहते हैं, वह 2001 में बुलंदशहर में कर्नल आशुतोष शर्मा के पड़ोसी थे. ये उनसे उम्र में छोटे थे, इन्हीं के सामने कर्नल आशुतोष शर्मा ने पढ़ाई की और सेना में उनको दाखिला मिला. जिसके बाद परिचित होने के नाते कर्नल अशुतोष ने कुछ सालों तक लगातार उनको चिट्ठी लिखी. इन चिट्ठियों में उन्होंने सेना के प्रति सम्मान का जिक्र किया और खुशी जताई कि सेना की वर्दी जब वह पहन कर निकलते हैं तो उन्हे कितना गर्व होता है. इसके अलावा वे लगातार अमित को मेहनत करने के लिए प्रेरित भी करते.

हालांकि अमित सेना में नहीं भर्ती हो पाए और फिलहाल वह वकील हैं. लेकिन अशुतोष भैया ने उनके जीवन में बहुत गहरा प्रभाव छोड़ा है. वे उनके आदर्श, मार्गदर्शक सबकुछ थे. इतना ही नहीं अमित के छोटे भाई को भी वे लगातार प्रोत्साहित करते
2001 से 2003 के बीच कई खत कर्नल आशुतोष शर्मा ने अमित को लिखें. एक खत में वे लिखते हैं कि सेना की वर्दी पहन कर उन्हे बहुत गर्व होता है, जब भीड़ में निकलते हैं तो से सेना की वर्दी पहने उसकी शान अलग ही होती है, सेना में आना कितने सम्मान की बात है.

'सो गए तो फिर नहीं उठेंगे'

ऐसे ही एक और खत में वह लिखते हैं - अभी बहुत काम है. 24 घंटे में से 18 से 20 घंटे उनको काम करना पड़ता है, लेकिन उन्हें काम करना है क्योंकि अगर वह सो गए तो फिर नहीं उठेंगे. जब कैप्टन के पद पर आशुतोष का प्रमोशन हुआ तब भी एक और चिट्ठी में उसका उन्होंने जिक्र किया ये लिखकर कि तेरा भाई कैप्टन बन गया है. बहुत डिस्टरबेंस है बार्डर पार, बस आर या पार हो जाना चाहिए. इसके अलावा वह अमित और उनके भाई को लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित करते और पूरा दिशानिर्देश करते. कर्नल आशुतोष के चले जाने के बाद देश के साथ-साथ अपने आदर्श को खोकर आज अमित की भी आंखें नम हैं
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज