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सैफई का ‘रिश्तेदार’ दारोगा, नहीं लिख रहा बलात्कार का मुकदमा

सैफई का ‘रिश्तेदार’ दारोगा, नहीं लिख रहा बलात्कार का मुकदमा

खाकी के कारिंदों पर नकेल लगाने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लाख दलीलें दे, लेकिन सच्चाई यह है ‘सैफई कनेक्शन’ वाले दारोगाओं के सामने पुलिस के अफसरों की बोलती बंद है। तभी तो बुलंदशहर में बलात्कार पीड़ित नाबालिग दलित छात्रा और उसका परिवार पिछले दस दिन से केस दर्ज कराने के लिए भटक रहा है, लेकिन नरौरा के थानेदार कौशलेन्द्र यादव की ताकत के सामने सब नतमस्तक है।

खाकी के कारिंदों पर नकेल लगाने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लाख दलीलें दे, लेकिन सच्चाई यह है ‘सैफई कनेक्शन’ वाले दारोगाओं के सामने पुलिस के अफसरों की बोलती बंद है। तभी तो बुलंदशहर में बलात्कार पीड़ित नाबालिग दलित छात्रा और उसका परिवार पिछले दस दिन से केस दर्ज कराने के लिए भटक रहा है, लेकिन नरौरा के थानेदार कौशलेन्द्र यादव की ताकत के सामने सब नतमस्तक है।

खाकी के कारिंदों पर नकेल लगाने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लाख दलीलें दे, लेकिन सच्चाई यह है ‘सैफई कनेक्शन’ वाले दारोगाओं के सामने पुलिस के अफसरों की बोलती बंद है। तभी तो बुलंदशहर में बलात्कार पीड़ित नाबालिग दलित छात्रा और उसका परिवार पिछले दस दिन से केस दर्ज कराने के लिए भटक रहा है, लेकिन नरौरा के थानेदार कौशलेन्द्र यादव की ताकत के सामने सब नतमस्तक है।

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खाकी के कारिंदों पर नकेल लगाने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लाख दलीलें दे, लेकिन सच्चाई यह है ‘सैफई कनेक्शन’ वाले दारोगाओं के सामने पुलिस के अफसरों की बोलती बंद है। तभी तो बुलंदशहर में बलात्कार पीड़ित नाबालिग दलित छात्रा और उसका परिवार पिछले दस दिन से केस दर्ज कराने के लिए भटक रहा है, लेकिन नरौरा के थानेदार कौशलेन्द्र यादव की ताकत के सामने सब नतमस्तक है।

नरौरा कस्बे में 10वीं की छात्रा के साथ उसी के मोहल्ले के एक दबंग बदमाश ने एक घर में बंद करके उसके साथ बलात्कार किया। बलात्कार की इस वारदात में एक छोटी बच्ची के द्वारा पड़ोस में रहने वाली महिला ने मेंहदी लगवाने के बहाने उसे अपने घर में बुलाया और आरोपी चन्द्रशेखर उर्फ छोटे ने महिला की मदद से छात्रा की अस्मत लूट ली। पीड़िता की मां को जब इस बात का पता चला तो कमरे में बंद अपनी बेटी को किसी तरह बदमाश के चंगुल से मुक्त कराया। पीड़िता थाने गई तो दारोगा छोटेलाल ने उनसे तहरीर लेकर उन्हें थाने से घर वापस भेज दिया।

पीड़िता का परिवार थाने के चक्कर लगाता रहा और दारोगा और थानेदार उसे कार्रवाई के नाम पर टालते रहे। आरोप है कि दारोगा छोटे लाल और थानेदार कौशलेन्द्र यादव ने आरोपी से सांठगांठ करके उसका रविवार के दिन शांतिभंग की धाराओं में चालान कर दिया। पुलिस की कृपा से आरोपी को खड़े-खड़े एसडीएम कोर्ट से जमानत मिल गयी। तब से आरोपी पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहा है।

दारोगा कौशलेन्द्र अपने ‘सैफई-कनेक्शन’ के चलते पहले भी विवादों में रह चुका है। औरंगाबाद और गुलावठी थानों में रहते हुए उनके कारनामों से जनता परेशान रही और जिले के बड़े अफसर उनके ‘कनेक्शन’ के चलते उनसे कुछ नही कह पाते थे। पिछले दिनों उन्हें डेढ़ साल गुलावठी में एकछत्र राज करने के बाद उनकी बिना मर्जी से कोतवाली देहात के लिए ट्रांसफर किया था, लेकिन कौशलेन्द्र यादव बिना बताए जिले से गायब हो गया। उसकी गैरहाजिरी महीनों तक बढ़ जाने पर उन्हें निलंबित भी किया गया, लेकिन कौशलेन्द्र यादव ने जब वापिसी की तो एसएसपी ने उन्हें ससम्मान नरौरा की ‘थानेदारी’ से नवाजा।

पीड़ित परिवार अंतिम बार 26 मार्च की शाम को नरौरा थाने पहुंचा तो थानेदार कौशलेन्द्र यादव ने उसे थाने से भगा दिया। साथ ही धमकी दी कि अगली बार इधर रुख किया तो जेल भेज देंगे। पीड़ित परिवार ने शुक्रवार (27 मार्च) को बुलंदशहर के एसएसपी अनंतदेव तिवारी के आफिस आकर उन्हें अपनी आपबीती सुनाई है। एसएसपी ने पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने का वायदा किया है।

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