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इस मंदिर में सवर्णों ने लगाई दलित समाज के प्रवेश पर रोक

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 30, 2019, 11:06 PM IST
इस मंदिर में सवर्णों ने लगाई दलित समाज के प्रवेश पर रोक
दलितों को मंदिर में प्रवेश से रोका

यूपी के बुलंदशहर (Bulandshahr) में वाल्मीकि समाज के लोगों को मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया गया. वाल्मीकि समाज के लोगों का आरोप है कि बीते 25 अक्टूबर को मंदिर में प्रवेश से रोका गया. पीड़ित लोगों खुर्जा सीओ के ऑफिस में जाकर न्याय की गुहार लगाई है.

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बुलंदशहर. उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर (Bulandshahr) के रखेड़ा गांव में स्थित मंदिर पर दलित समाज के लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई गई हैं. ये रोक सवर्ण समाज से ताल्लुक रखने वाले गांव के दबंग लोगों द्वारा दलित समाज के लोगों के प्रवेश पर लगाई गई है.

पूरा मामला जहांगीरपुर कोतवाली क्षेत्र के रखेड़ा गांव का मामला. वाल्मीकि समाज के लोगों को गांव के मंदिर में  पूजा नहीं करने दी गई. 25 अक्टूबर को वाल्मीकि समाज की महिलाएं मंदिर में पूजा करने जा रहीं थीं. पीड़ित लोगों ने दबंगों द्वारा मंदिर में प्रवेश न करने देने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया.

पीड़ित लोगों खुर्जा सीओ के ऑफिस में जाकर न्याय की गुहार लगाई है. मंदिर में ना घुसने दिए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.

सुमित दलाल की स्थापित की गई मूर्ति

वहीं दूसरी कुछ दिनों पहले ही बुलंदशहर हिंसा (Bulandshahr Violence) के स्याना में हुई दौरान अपनी जान गंवाने वाले इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह (Subodh Kumar Singh) के हत्यारोपी सुमित दलाल की मूर्ति स्थापित की गई है. मूर्ति की स्थापना स्याना गांव में ही की गई है. गौरतलब है कि सुमित की मौत उसी हिंसा के दौरान हो गई थी.

परिवार ने की ये मांग
मूर्ति स्थापित किए जाने के संबंध में सुमित के पिता अमिरजीत सिंह का कहना है कि उनकी मांगें राज्य सरकार नहीं सुन रही है. उनके मुताबिक, अगर मांगें नहीं मानी गईं तो वो धर्म परिवर्तन कर आत्महत्या कर लेंगे. अमरजीत ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने जो घोषणाएं की वो पूरी नहीं हुईं और न ही सीबीआई जांच लगाई गई. अगर अगले 3 दिसंबर तक मेरी मांगें पूरी नहीं हुईं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा.
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3 दिसंबर 2018 को हुई थी घटना
गौरतलब है कि 3 दिसंबर 2018 को बुलंदशहर के स्याना इलाके में गोकशी की खबर के बाद पूरा मामला भड़का था. इसके बाद घटना ने उग्र रूप अख्तियार कर लिया था. इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह जब घटना स्थल पर पहुंचे थे तो दंगाई भीड़ ने उनकी हत्या कर दी थी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि सुबोध कुमार सिंह को गोली मारने से पहले पिटाई की गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया था कि इंस्पेक्टर के सिर में गोली लगने से उनकी मौत हुई.

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First published: October 30, 2019, 8:55 PM IST
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