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UP Bye-election 2020: जानिए आजादी के बाद से कैसा रहा है बुलंदशहर सीट का राजनीतिक सफर

बुलंदशहर सीट पर 3 नवंबर को होना है उपचुनाव के लिए वोटिंग
बुलंदशहर सीट पर 3 नवंबर को होना है उपचुनाव के लिए वोटिंग

Bulandshahr Assembly Seat Bypoll: आजादी के बाद 1952 में हुए यूपी के पहले इलेक्शन में बनारसी दास इसी सीट से कांग्रेस के विधायक बने थे. हालांकि 1979 में जब वे मुख्यमंत्री बने तब वे विधान परिषद के सदस्य थे.

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बुलंदशहर. यूपी की जिन सात सीटों पर विधानसभा के उपचुनाव (UP Assembly Bye-election 2020)  होने जा रहे हैं, उनमें से सबसे ज्यादा वीआईपी सीट बुलंदशहर (Bulandshahr Assembly Seat) की मानी जा सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस सीट से जीते विधायक ने कभी यूपी के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी. आजादी के बाद 1952 में हुए यूपी के पहले इलेक्शन में बनारसी दास इसी सीट से कांग्रेस के विधायक बने थे. हालांकि 1979 में जब वे मुख्यमंत्री बने तब वे विधान परिषद के सदस्य थे. इस सीट की एक खासियत ये भी रही है कि यहां की जनता ने अपने विधायकों को भरपूर काम करने का मौका दिया. ज्यादातर विधायक दो टर्म के लिए चुने गये.

जाट-मुस्लिम वोटों का दबदबा रहा है

पौने चार लाख से ज्यादा वोटरों वाली इस सीट पर जाट-मुस्लिम वोटों का दबदबा रहा है. यही वजह रही है कि अब तक हुए 17 चुनावों में से 7 बार इस सीट से मुस्लिम उम्मीद्वार विधायक चुने गये. साल 2012 में हुए परिसीमन के बाद इसका समीकरण कुछ बदला है. अगौता विधानसभा को खत्म करके उसका कुछ इलाका इसमें जोड़ा गया. इससे जाट वोटरों की संख्या इस सीट पर पहले से ज्यादा हो गयी है. 2017 से पहले पिछले 10 सालों से बीएसपी का इस सीट पर कब्जा था, लेकिन 2017 में भाजपा ने ये सीट छीन ली. 10 सालों के बाद उसे दोबारा जीत नसीब हुई थी. 1974 में जनसंघ ने भी ये सीट जीती थी. इस सीट पर कांग्रेस 4 बार, भाजपा 3 बार बसपा 2 बार और सपा 1 बार चुनाव जीत चुकी है.



अजीबो गरीब इतिहास रहा है इस सीट का
आजादी के बाद कांग्रेस का पूरा देश में परचम फहरा रहा था. 1952 में हुए पहले चुनाव में बनारसी दास कांग्रेस से विधायक भी बने लेकिन, 5 सालों के बाद जनता ने उन्हें कुर्सी से उतार दिया. 1957 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने यहां से चुनाव जीता. इस सीट को बाहुबली डीपी यादव के लिए भी याद किया जाता है. डीपी यादव को तीन बार इस सीट से विधायक बनने का मौका मिला है. 2017 में विधायक चुने गये वीरेन्द्र सिंह सिरोही के निधन के चलते ये सीट खाली हुई है. 3 नवम्बर को वोट डाले जायेंगे और यहां की जनता इस उपचुनाव के जरिये अपना विधायक चुनेगी.आईये जानते हैं कि इस सीट से कब, कौन विधायक रहा.

अब तक इस सीट से ये चुने गए विधायक

2017 - भाजपा के वीरेन्द्र सिंह सिरोही, 2012 - बसपा के अलीम खान, 2007 - बसपा के अलीम खान, 2002 - भाजपा के महेन्द्र सिंह यादव, 1996 - भाजपा के महेन्द्र सिंह यादव, 1993 - सपा के डीपी यादव, 1991- जनता पार्टी के डीपी यादव, 1989 - जनता दल के डीपी यादव, 1985 - कांग्रेस के सईदुल हसन, 1980 - कांग्रेस के सईदुल हसन, 1977 - जनता पार्टी के विजय राज सिंह, 1974 - जनसंघ के सत्यबीर, 1969 - अखिल भारतीय राम राज्य परिषद के शमीम आलम, 1967 - अखिल भारतीय राम राज्य परिषद के शमीम आलम, 1962 - कांग्रेस के इर्तिजा हुसैन, 1957 - प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रघुराज सिंह, 1952 - बनारसी दास.
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