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Debai Assembly Seat: क्या अब सुरक्षित नहीं रहा भगवा दुर्ग? दो बार सेंध लगा चुके हैं गुड्डू पंडित

Debai Assembly Seat: क्या अब सुरक्षित नहीं रहा भगवा दुर्ग? दो बार सेंध लगा चुके हैं गुड्डू पंडित

UP Chunav 2022: बुलंदशहर की डिबाई विधानसभा सीट के चुनावी हाल की रिपोर्ट यहां पढ़ें.

UP Chunav 2022: बुलंदशहर की डिबाई विधानसभा सीट के चुनावी हाल की रिपोर्ट यहां पढ़ें.

Debai Assembly Seat Election: आजादी के बाद से ही कांग्रेसी विचारधारा डिबाई विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं को लुभा नहीं पाई. 1952 के चुनाव से ही इस सीट पर भगवा राजनीति सिर चढ़कर बोली. 1980 तक लगातार 28 साल यहां से जनसंघ के हिम्मधत सिंह विधायक रहे. अब तक हुए 17 चुनावों में कांग्रेस यहां से मात्र दो बार ही जीत सकी है.

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बुलंदशहर. जनसंघ के जमाने से डिबाई विधानसभा क्षेत्र मजबूत भगवा दुर्ग रहा है. 1952 में हुए पहले चुनाव से लेकर 1980 तक 28 साल इस सीट पर जनसंघ के हिम्‍मत सिंह का कब्‍जा रहा. 1980 के चुनाव में पहली बार इस सीट पर कांग्रेस ने जीत का स्‍वाद चखा. इससे पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक के मसिहाई राजनीति का डिबाई के मतदाताओं पर कोई असर नहीं हुआ. हिम्‍मत सिंह का जादू ही यहां के मतदाता के सिर चढ़कर बोलता रहा. इस सीट पर दक्षिणपंथी राजनीति की मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक हुए 17 विधानसभा चुनावों में से 12 बार जनसंघ, भाजपा और कल्‍याण सिंह का कब्‍जा रहा. कांग्रेस दो बार जीत पाई. जनता दल, सपा और बसपा को एक-एक बार सफलता मिल सकी है. वर्तमान में अनीता लोधी इस सीट से भाजपा की विधायक हैं.

डिबाई को राम मंदिर राजनीति के अगुवा रहे पूर्व मुख्‍यमंत्री कल्‍याण सिंह का गढ़ कहा जाता था. इस सीट से वह दो बार विधायक रहे. पहली बार 1996 में इसके बाद भाजपा से अलग होकर जब उन्‍होंने राष्‍ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई तब 2002 में भी यहीं से विधायक चुने गए. यही नहीं कल्‍याण ने जिसे भी इस सीट से चुनाव लड़ाया वह उनके नाम पर आसानी से जीतता रहा. पर जरा ठहिरये! डिबाई में कल्‍याण सिंह की सफलता की इस कहानी में एक दुखांत भी है. वह अपने बेटे राजवीर को यहां से नहीं जिता पाए. एक बार नहीं बल्‍कि दो-दो बार.

कल्याण सिंह ने अपनी राष्‍ट्रीय क्रांति पार्टी का भाजपा में विलय कर 2007 में इस सीट से राजवीर सिंह को चुनाव लड़ाया. बसपा के टिकट पर लड़ रहे बाहुबली भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने राजवीर को 15 हजार से अधिक वोटों से हरा दिया. इससे कल्‍याण सिंह को गहरा धक्‍का लगा. इसके बाद आया 2012. चुनाव से पहले गुड्डू पंडित समाजवादी हो गए. तब तक कल्‍याण सिंह भी दोबारा भाजपा छोड़ अपनी पार्टी बना चुके थे. डिबाई में एक बार फिर गुड्डू पंडित और राजवीर सिंह आमने-सामने आए. इस बार भी जीत गुड्डू पंडित के हाथ लगी. अपने पिता की जनक्रांति पार्टी से चुनाव लड़ रहे राजवीर सिंह दोबारा से 35 सौ से अधिक वोटों से चुनाव हार गए.

डिबाई विधानसभा सीट पर मतदाताओं की संख्‍या 3.33 लाख के करीब है. सबसे अधिक वोट कल्‍याण सिंह की लोध बिरादरी के वोटर हैं. इनकी संख्‍या करीब 1.20 लाख है. 40 हजार मुस्‍लिम, 37 हजार ब्राह्मण और 30 हजार के करीब जाटव मतदाता हैं. 2017 के चुनाव में भाजपा की अनीता लोधी ने बसपा के हरीश कुमार को 65 हजार से अधिक वोटों से हराया था.

Tags: Bulandshahr news, UP Election 2022, UP news

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