बुलंदशहर हिंसा: घटना पर प्रधानों ने उठाया सवाल, आखिर इतनी भीड़ कहां से जुटी!

अजय प्रधान ने कहा कि जिला प्रशासन को ऐसे उपद्रवियों के फोन को ट्रेस करके उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. जिन्होंने शहर के माहौल को खराब करने की बड़ी कोशिश की. हिंसा के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है.

NAVEEN LAL SURI | News18 Uttar Pradesh
Updated: December 8, 2018, 9:53 AM IST
बुलंदशहर हिंसा: घटना पर प्रधानों ने उठाया सवाल, आखिर इतनी भीड़ कहां से जुटी!
बुलंदशहर हिंसा (File Photo)
NAVEEN LAL SURI | News18 Uttar Pradesh
Updated: December 8, 2018, 9:53 AM IST
बुलंदशहर के स्याना तहसील के गांव महाव में गोकशी की अफवाह के बाद भड़की हिंसा में पुलिस, हिंदूवादी संगठनों और ग्रामीणों में जमकर टकराव हुआ. गुस्साए ग्रामीणों ने चिंगरावठी चौकी के पास सड़क पर जाम लगा दिया, इस दौरान इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और सुमित नाम के एक युवक की मौत हो गई. लेकिन सवाल ये खड़ा होता है कि इतनी बड़ी संख्या में भीड़ कहां से जमा हुई. इस मामले में महाव गांव के ग्राम प्रधान प्रीतम सिंह ने कहा कि महाव गांव की कुल आबादी 2200 के करीब है, लेकिन घटना के बाद इतनी बड़ी संख्या में लोग कहां से आए ये पता नहीं चल पाया." बता दें कि चिंगरावठी, महाव और नया गांव में हिंसा भड़की थी.

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3 दिसंबर की घटना को याद करते हुए प्रीतम सिंह कहते हैं कि मैं गांव में लगे पशु कैंप में शामिल होने गया था. तभी गांव में  गोवंश अवशेष मिलने की सूचना फैली. लेकिन उसी दौरान गांव के कुछ लोग भागे हुए आ रहे थे. महाव के प्रधान ने दावा करते हुए कहा कि मेरे गांव की कुल आबादी 2200 के करीब है कि लेकिन अचानक इतनी संख्या में लोग गांव में घुस गए. प्रीतम सिंह कहते हैं कि ये सभी लोग बजरंग दल से जुड़े हुए कार्यकर्ता थे. वहीं कुछ लोग बाहर से बुलाए गए थे.

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चिंगरावठी गांव के प्रधान अजय ने बताते हैं कि घटना वाले दिन हम लोगों ने लोगों को बहुत शांत करने की कोशिश की, लेकिन जो लोग ट्रैक्टर-ट्राली में गोवंश के अवशेष लेकर  चिंगरावठी चौकी पर आए थे, वो लोग पूरी तरह हिंसा करने पर आमादा थे. पुलिस से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बहुत मनाने की कोशिश की, लेकिन वे लोग प्रशासन द्वारा कार्रवाई करने का भरोसा देने के बाद भी दंगा फसाद करने का मकसद था. अजय प्रधान ने बताया कि मेरे गांव की आबादी 1800 के करीब है, लेकिन इतनी बड़ी तादद में लोग कहा से आए, इन लोगों को फोन से बुलाकर बुलंदशहर में दंगा कराया गया.

पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की गोली लगने से मौत हो गई थी. (फाइल)


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अजय प्रधान ने कहा कि जिला प्रशासन को ऐसे उपद्रवियों के फोन को ट्रेस करके उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. जिन्होंने शहर के माहौल को खराब करने की बड़ी कोशिश की. हिंसा के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है. वहीं बुलंदशहर हिंसा के चार दिन बाद भी मुख्य आरोपी बजरंगदल के संयोजक योगेश राज की गिरफ्तारी ने होने से यूपी की एनकाउंटर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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मुख्य आरोपी अभी भी पकड़ से दूर

मामले में पुलिस ने अभी तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है. हिंसा के बाद 27 नामजद और 60 अज्ञात के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जो मुख्य आरोपी हैं, वह अभी भी फरार हैं. हालांकि पूरे मामले में पुलिस के आला अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं उनका कहना है कि आरोपियों की तलाश के लिए टीमें बना दी गई हैं. उन्हें पकड़ने के लिए जगह-जगह दबिश दी जा रही है.

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वहीं, दूसरी एफआआईआर गोकशी के मामले में दर्ज की गई है, जिसमें सात लोगों के नाम हैं. इस मामले की जांच एसआईटी और एडीजी इंटेलिजेंस कर रहे हैं. आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की छह टीमों ने अब तक 22 ठिकानों पर छापेमारी की हैं.

बता दें कि बुलंदशहर के स्याना में कथित रूप से गोकशी के शक में सोमवार को काफी हंगामा हुआ था. इस दौरान पुलिस पर पथराव और गोलीबारी की गई थी. भीड़ की हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और सुमित नाम के एक युवक की मौत हो गई थी.
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