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सुपरटेक नोएडा: CAG-SIT के निशाने पर हैं अथॉरिटी के बड़े ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट

सुपरटेक के विवादित टावर से संबंधित जांच कैग और यूपी एसआईटी ने शुरु कर दी है.

सुपरटेक के विवादित टावर से संबंधित जांच कैग और यूपी एसआईटी ने शुरु कर दी है.

Noida News: सुपरटेक के टावर तोड़े जाने से पहले भी CAG अपनी रिपोर्ट में नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) को 20 हजार करोड़ रुपए के राजस्व के नुकसान की बात कह चुका है.

  • News18Hindi
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    नोएडा. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से सुपरटेक के दो टावर तोड़े जाने का आदेश आते ही नोएडा अथॉरिटी से लेकर लखनऊ तक हलचल मची हुई है. यूपी सरकार ने एसआईटी (SIT) जांच शुरु करा दी है. वहीं कैग की टीम भी नोएडा पहुंच चुकी है. दोनों टीम एमरॉल्ड कोर्ट के दो टावरों के साथ ही बड़े बिल्डर्स के दूसरे प्रोजेक्ट की जांच भी करेंगी. खासतौर पर प्रोजेक्ट से जुड़े नक्शों की जांच की जाएगी. सूत्रों की मानें तो एक बार पहले भी कैग (CAG) अपनी रिपोर्ट में नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) को 20 हजार करोड़ रुपए के राजस्व के नुकसान की बात कह चुका है.

    सूत्रों की मानें तो यूपी सरकार की बनाई गई एसआईटी नोएडा पहुंच चुकी है. टीम ने जांच भी शुरू कर दी है. एसआईटी सबसे पहले सुपरटेक के एमरॉल्ड प्रोजेक्ट से जुड़े दो अपैक्स और सियान टावर के मामलों की जांच कर रही है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों टावर को तोड़े जाने के आदेश नोएडा अथॉरिटी को जारी किए हैं. जानकारों का कहना है कि 40-40 मंजिला दो टावर के बीच 16 मीटर की दूरी होनी चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया.

    2009 से 2012 तक ऐसे बदले गए नियम
    साल 2008-09 में वैश्विक मंदी का दौर था. इस वैश्विक मंदी का दुनिया और देश के कारोबारों पर असर पड़ा. मंदी के इस दौर में नोएडा के बिल्डर्स और नोएडा अथॉरिटी के पूर्व सीईओ रहे अफसरों के लिए आपदा में अवसर बन गया था. इसी का फायदा उठाते हुए अफसरों ने नियमों में ऐसे-ऐसे फेरबदल किए कि रातों-रात बिल्डर्स फर्श से अर्श पर पहुंच गए. खासतौर से साल 2007 से 2012 तक नियमों में फेरबदल उस वक्त हुआ जब यूपी में बसपा की सरकार थी.

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    ये थे नोएडा अथॉरिटी के नियम
    किसी भी बिल्डर्स को ग्रुप हाऊसिंग का प्लॉट लेने के लिए जमीन की कीमत का 10 फीसद पैसा रजिस्ट्रेशन के वक्त और 20 फीसद आवंटन के वक्त देना होता था. बाकी 70 फीसद पैसा 5 साल के दौरान 10 बराबर किस्तों में चुकाना होता था.

    लेकिन जब बदल दिए गए नियम
    नियम बदलने के बाद ग्रुप हाऊसिंग का प्लॉट लेने के लिए जमीन की लागत का 5 फीसद रजिस्ट्रेशन शुल्क और 5 फीसद आवंटन शुल्क कर दिया गया. आवंटन के बाद तीन साल तक बकाया पैसे पर केवल ब्याज लेने का नियम बना दिया गया. वहीं तीन साल बाद 7 सालों में 14 बराबर किस्तों में बाकी 90 फ़ीसद पैसा देने की रियायत बिल्डर्स को दे दी गई.

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