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CBI जांच: वक्फ प्रॉपर्टी पर मोहसिन रज़ा-वसीम रिज़वी की बयानबाजी, ये है पर्दे के पीछे की कहानी!

अधिकारियों ने कहा कि ये जालसाज मध्य दिल्ली के एक चार सितारा होटल में रह रहे थे जहां से इन्हें गिरफ्तार किया गया. (फाइल फोटो)

अधिकारियों ने कहा कि ये जालसाज मध्य दिल्ली के एक चार सितारा होटल में रह रहे थे जहां से इन्हें गिरफ्तार किया गया. (फाइल फोटो)

वसीम रिज़वी (Waseem Rizvi) का कहना है कि वक्‍फ संपत्तियों की सीबीआई (CBI) जांच हो जानी चाहिए. उन्‍होंने दावा किया कि उनके पास इस बात के पूरे सबूत हैं.

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    नई दिल्ली. यूपी के मंत्री (UP Minister) मोहसिन रज़ा (Mohsin Raza) और शिया वक्फ बोर्ड (Shia waqf board) के अध्यक्ष वसीम रिजवी (Waseem Rizvi) में इन दिनों वक्फ संपत्तियों को लेकर जमकर बयानबाजी हो रही है. इसी को देखते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने वक्फ संपत्तियों में फर्जीवाड़े की आशंका पर सीबीआई (CBI) जांच कराने की सिफारिश की है. लेकिन, जानकार बता रहे हैं कि दोनों के बीच छिड़े शीत युद्ध के पीछे की कहानी कुछ और ही है.

    सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा वक्फ प्रॉपर्टी को लेकर भी था. अगर इस रिपोर्ट को मानें तो देश में 4.9 लाख से अधिक रजिस्टर्ड वक्फ प्राॅपर्टी हैं. इसकी कीमत रिपोर्ट में 1.2 लाख करोड़ रुपये बताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, ये प्राॅपर्टी 6 लाख एकड़ से ज्यादा के क्षेत्र में फैला है, लेकिन जानकार बताते हैं कि अगर राज्यवार इस वक्फ प्राॅपर्टी का आकलन किया जाए तो ये कीमत कमेटी की रिपोर्ट से कई गुना है.

    यूपी में है 50 हजार करोड़ से ज्यादा की वक्फ प्राॅपर्टी!


    वक्फ मामलों के जानकार और एडवोकेट अमीर अहमद जाफरी बताते हैं कि सच्चर कमेटी ने वक्फ प्राॅपर्टी की जो देशभर में कीमत बताई है वो सरकारी रेट के आधार पर है. लेकिन असल में इनकी बाजार कीमत कुछ और ही है. यूपी का वक्फ खासा बड़ा बताया जाता है. कुछ नहीं तो यूपी शिया और सुन्नी हजरात की मिलाकर 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की ही वक्फ प्राॅपर्टी होगी.

    जाफरी कहते हैं कि आप लखनऊ को ही देख लीजिए बड़े इमामबाड़े के पीछे कभी 20 बीघे का खुला मैदान हुआ करता था. आज यहां 250 से ज्यादा दुकानें और झुग्गी बस्ती बन चुकी है. इमामबाड़े के बगल में वक्फ की जमीन पर कई मकान बने हुए हैं. कोई दो मंजिला तो कोई एक मंजिल का है. बाजार में आज इस जगह की कीमत 80 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की आंकी जा रही है.

    कभी 46 शिया कब्रिस्तान थे, अब रह गए सिर्फ 15

    लखनऊ के ही रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार आफताब बेग बताते हैं कि आज़ादी मिलने के बाद से लखनऊ में शिया हजरात के करीब 46 कब्रिस्तान हुआ करते थे, लेकिन आज निगाह दौड़ाएंगे तो बमुश्किल 15 ही बचे हैं. जो बचे हैं उसमें भी दो-चार कब्रिस्तान के कुछ हिस्से पर अतिक्रमण हो चुका है. सही बात तो यह है कि वक्फ प्राॅपर्टी पर कब्जा करने वाले कोई और नहीं, बल्कि उनकी देखभाल के लिए तैनात किए गए मुतवल्ली (केयर-टेकर) ही हैं.

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