चंदौली लोकसभा को जीत मोदी-शाह के खासमखास बने थे ये नेता, खत्म किया था BJP का 15 साल का सूखा

महेंद्र नाथ पांडेय ने 2014 आम चुनाव में यूपी के चंदौली सीट पर बीजेपी की खोई साख वापस लाने में सफलता पाई थी.

News18Hindi
Updated: May 8, 2019, 2:31 PM IST
चंदौली लोकसभा को जीत मोदी-शाह के खासमखास बने थे ये नेता, खत्म किया था BJP का 15 साल का सूखा
महेंद्र नाथ पांडेय ने 2014 आम चुनाव में यूपी के चंदौली सीट पर बीजेपी की खोई साख वापस लाने में सफलता पाई थी.
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Updated: May 8, 2019, 2:31 PM IST
उत्तर प्रदेश भारत की सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाला प्रदेश है. यहां कुल 80 लोकसभा सीटें हैं. इसलिए इस प्रदेश पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी नजर होती है. इसलिए इस प्रदेश में होने वाले किसी भी बदलाव को बहुत सोच समझकर लिया जाता है. 2014 आम चुनाव में अमित शाह उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे. नतीजा, बीजेपी ने 80 में 71 सीटें जीतीं. यही से उनका उदय हुआ, वे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और पहला काम उन्हें यूपी बीजेपी अध्यक्ष पर भरोसेमंद आदमी चाहिए था. तब इस पद के लिए केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाम पांडेय का नाम चुना गया था.

महेंद्र नाथ पांडेय ने 2014 आम चुनाव में यूपी के चंदौली सीट पर बीजेपी की खोई साख वापस लाने में सफलता पाई थी. उन्होंने बीजेपी का 15 सालों का सूखा समाप्त कर दिया था. इसके बाद से ही वे मोदी-शाह की नजर में थे. उन्हें चंदौली जीतने का तोहफा पहले उनके ऊपर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का भी हाथ है. ऐसे में अबकी उनका टिकट कटने का सवाल ही नहीं खड़ा होता.

बीजेपी प्रत्याशी महेंद्र नाथ पांडेय माइक पर भाषण देते हुए


असल में कभी चंदौली बीजेपी के गढ़ में तब्दील हो गया था. 1991, 1996 और 1999 के आम चुनावों बीजेपी के आनंद रतन मौर्या ने लगातार तीन जीत दर्ज की थी. लेकिन 1999 और 2004 के चुनाव में आनंद रतन का जनाधार खिसक गया और वे दूसरे नंबर पर रहे. 2009 के चुनाव में लड़ाई सपा बनाम बसपा में तब्दील हो गई. लेकिन 2014 के चुनाव में बसपा के अनिल कुमार मौर्य को मात देकर महेंद्र नाथ ने चंदौली में फिर से कमल खिला दिया. अब बीजेपी बिल्कुल नहीं चाहेगी इस सीट को दोबारा गंवाए.

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चंदौली लोकसभा चुनाव 2019 के प्रत्‍याशी
बीजेपी के उम्मीदवार, उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे होंगे. लेकिन इस बार बीजेपी को घेरने के लिए सपा-बसपा गठबंधन ने पूरा प्लान बना लिया है. इसिलए उनके सामने अपने दोनों पिछले उम्मीदवारों को बदलकर नया उम्मीदवार लेकर आए हैं. इस बार गठबंधन की तरफ से संजय चौहान उम्मीदवार हैं. इस बार जानबूझकर गठबंधन ने सवर्ण प्रत्‍याशी मैदान में उतारा है. जबकि कांग्रेस ने भी शिवकन्या कुशवाहा पर दांव लगाया है. हालांकि 2014 में गाजीपुर से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी शिवकन्या को कांग्रेस ने हाथ पंजा निशान नहीं दिया है. उन्हें जन अधिकार पार्टी, अपना दल का समर्थन भी प्राप्त है. उनका चुनाव चिन्ह डोली है. यहां लोकसभा चुनाव 2019 के सातवें चरण में आगामी 19 मई को वोटिंग होनी है.
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गठबंधन प्रत्याशी संजय चौहान गले में गेंदे की माला पहने हुए


चंदौली लोकसभा चुनाव 2014 के परिणाम
आम चुनाव 2014 में चदौली लोकसभा को जीतने वाले महेंद्र नाथ पांडे को कुल 414135 वोट मिले थे. हालांकि दूसरे और तीसरे स्‍थान पर रहे बीएसपी के अनिल कुमार मौर्या को 257379 और एसपी के रामकिसुन को 204145 वोट मिले थे. दोनों को जोड़ दे तो यह बीजेपी उम्मीदवार से ज्यादा हो जाते हैं, जैसा कि इस बार दोनों साथ लड़ रहे हैं. चौथे स्‍थान पर कांग्रेस उम्मीदवार तरुण पटेल को 27194 वोट ही मिल थे.

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चंदौली लोकसभा क्षेत्र के समीकरण
साल 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक चंदौली लोकसभा क्षेत्र के अंतरगत करीब 1,952,756 लोग हैं. इनमें 1,017,905 पुरुष और 934,851 लाख महिलाएं हैं. इनमें अनुसूचित जाति की आबादी 4,46,786 और अनुसूचित जनजाति की 41,725 है बताई जाती है.

कांग्रेस उम्मीदवार शिवकन्या कुशवाहा


चंदौली लोकसभा क्षेत्र के अंतरगत कुल पांच विधानसभाएं मुगलसराय, सकलडीहा, सैयदराजा, अजगरा और शिवपुरी आते हैं. इनमें बीजेपी के पास तीन, सुहेलदेव भारत समाज पार्टी के पास एक और सपा के पास एक सीट है.

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First published: May 8, 2019, 1:33 PM IST
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